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शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

महिलाओं में बांझपन के क्या कारण होते हैं - महिला की उम्र के कारण

किसीभी महिला के लिए बांझपन दुनिया का सबसे बड़ा गम होता हैं। इसमें महिला को माँ बनने के सुख से वंचित रहना पड़ता हैं। और आप ये भी कह सकते हैं बांझपन एक ऐसी बीमारी होती हैं जिसमे महिला गर्भधारण नहीं कर सकती हैं। इस स्थिति का होना किसी भी महिला के लिए बहुत ही बुरा होता हैं। क्योंकि माँ बनना हर महिला का सपना होता हैं| परंतु किसी महिला के साथ ऐसी समस्या होने पर उसे बहुत बड़ा झटका लग सकता हैं।
महिलाओं में बांझपन के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार से हैं--
शारीरिक कारण,
मानसिक कारण,
महिला की उम्र के कारण,
महिला के लाइफस्टाइल के कारण,
महिला की शारीरिक एनर्जी डिस्टर्ब होने के कारण
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आज अपने वीडियो में हम चर्चा करने वाले हैं कि महिला की बढ़ती उम्र के कारण बांझपन की समस्या क्यों आ जाती है और इसको किस ढंग से हम दूर करने की कोशिश कर सकते हैं इस पर चर्चा करेंगे तो आइए दोस्तों वीडियो शुरू करते हैं।

बांझपन के बहुत से कारण हो सकते हैं| कई बार महिलाएं गर्भधारण तो करती हैं, परंतु बार-बार गर्भपात के कारण बाद में उनका गर्भधारण नहीं हो पाता हैं, या फिर मासिक धर्म से जुडी समस्या के कारण, गर्भाशय से जुडी समस्या के कारण, ट्यूब्स में परेशानी होने के कारण,टीवी की समस्या होने के कारण, योंन रोग होने के कारण, आदि ये कुछ कारण हो सकते हैं| जो महिला के अंदर बाँझपन की क्रिया को जन्म देते हैं।
गर्भधारण एक जटिल प्रक्रिया है जो कई बातो पर निर्भर होती है.जैसे की पुरुष द्वारा स्वस्थ शुक्राणु तथा महिला द्वारा स्वस्थ अंडो का उत्पादन, गर्भ नलिकाओं में किसी तरह की समस्या न होना| ताकि शुक्राणु बिना किसी रूकावट के अंडो तक पहुँच सके, मिलने के बाद अंडो को निषेचित करने की शुक्राणु की क्षमता, निषेचित अंडो की महिला के गर्भाशय में स्थापित होने की क्षमता और गर्भाशय की स्थिति आदि।
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अगर सब कुछ अब तक ठीक भी रहता है तो उसके बाद भी 9 महीने तक बच्चे को बहुत ज्यादा पोषक तत्व और देखभाल की जरूरत होती है यह सारी जरूरतें महिला के शरीर के द्वारा पूरी की जाती है, इसके लिए महिला के शरीर के हर एक अंग को मिलकर कार्य करना पड़ता है अगर महिला की उम्र अधिक होती है तो उसका शरीर कमजोर होने लगता है ऐसी स्थिति में शरीर की कार्य क्षमता उतनी नहीं रह पाती है जितनी की होनी चाहिए और बड़ी उम्र में जाकर शरीर भी स्वस्थ नहीं रह पाता है, तो गर्भपात की समस्या का सामना करना पड़ जाता है, बांझपन की समस्या दिखाई देने लगती है।

करियर की वजह से लोगों की शादी की उम्र बढ़ रही है और इसके कारण बच्चे की प्लानिंग 30 की उम्र के बाद ज्यादा हो रही है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आयी कि 30 की बाद प्रेग्नेंसी से कई प्रकार की जटिलतायें हो सकती हैं।
शोधकर्ता उला वाडेनस्ट्रॉम के अनुसार, ''हमने 30 से 34 वर्ष की महिलाओं पर शोध किया और बहुत चौंकाने वाले परिणाम मिले। इन्हें तो गर्भावस्था के दौरान खतरा अधिक होता है ही, साथ ही धूम्रपान करने वाली या अधिक वजन वाली महिलाओं को भी यह खतरा कहीं अधिक होता है।''

30 साल की उम्र में पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को समय से पूर्व प्रसव यानी प्रीमेच्योर डिलिवरी या मृत शिशु का खतरा सामान्य महिलाओं की अपेक्षा 20 प्रतिशत अधिक होता है। इससे पहले हुए कई शोधों में यह उम्र 35 वर्ष तक की मानी जाती थी। 80 90 के दशक में  इन्वायरमेंट ठीक था, खाना पीना पोस्टिक हुआ करता था, लाइफस्टाइल इतनी फास्ट नहीं थी तो उम्र 35 वर्ष थी

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भारत में जन्म संबंधी आंकड़ों के अनुसार प्रति 1000 महिलाओं में जन्म दर निम्नांकित है:

25 से 29 साल की उम्र में 157 जन्म
30 से 34 साल की उम्र में 66 जन्म
35 से 39 साल की उम्र में 30 जन्म
40 और 44 साल की उम्र में नौ जन्म
45 और 49 साल की उम्र में चार जन्म

कुल मिलाकर यह बात सामने आती है कि महिलाओं की क्षमता कम हो जाती है अगर शरीर में इतनी क्षमता नहीं होगी जितनी की एक बच्चे को पैदा करने के लिए चाहिए तो कोई महिला मां नहीं बन सकती चाहे वह 20 वर्ष की हो चाहे वह 40 वर्ष की हो | उम्र बढ़ाने के साथ-साथ शरीर की क्षमता कम होती जाती है, यही स्थिति बांझपन की समस्या भी पैदा कर सकती है चाहे शरीर प्रेगनेंट होने के लिए सही क्यों ना हो
महिला के शरीर की क्षमता कम हो क्यों जाती है

इसके लिए आज के समय में जो हमारा वातावरण इतना ज्यादा दूषित हो चुका है इतना ज्यादा पोलूशन उसने मिल चुका है यह शरीर की क्षमता को कम कर देता है हर तरह से

30 की उम्र पार करते-करते शरीर में किसी ना किसी प्रकार का रोग लग ही जाता है यह भी शरीर की क्षमता को कम कर देता है.

आजकल मशीनी युग है इस युग में हम किसी भी प्रकार का शारीरिक मेहनत नहीं करते सभी कार्य के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है, जब शरीर को प्रयोग ही नहीं करेंगे, तो शरीर की क्षमता  कम हो ही जाएगी.

बिना वजह की टेंशन पाले रखना यह भी शरीर की क्षमता को कम कर देता है.

आजकल हम अपने खाद्य पदार्थों की तरफ उसकी पौष्टिकता की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते है भोज्य पदार्थ शरीर की आवश्यकता ना समझ उसे स्वाद के लिए खाना पसंद करते हैं, जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व ही नहीं मिलेंगे जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं तो शरीर की क्षमता तो कम हो ही जाएगी, रोग भी लग जाएंगे.
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कभी-कभी शरीर में कुछ विसंगति होती है अर्थात कुछ कमी होती है जिसकी वजह से प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है, अगर समय रहते इस समस्या का समाधान कर लिया जाता है तो महिला मां बन जाती है अगर आप बड़ी उम्र में मां बनने की कोशिश करें उस वक्त वह समस्या आपके सामने आए तो जरूरी नहीं कि वह समस्या बड़ी उम्र में ठीक ही हो जाए क्योंकि शरीर की क्षमता कम हो जाती है

अगर आप बड़ी उम्र में मां बनने का डिसीजन ले ही चुकी है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए शुरू से ही.
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आपको धूम्रपान नहीं करना है
आपको शराब भी नहीं पीनी है
चाय कॉफी भी लिमिटेड ही पीनी है इस में कैफीन की मात्रा ज्यादा होती है तो आपको कैफीन नहीं लेना है
आपको शारीरिक मेहनत करनी है,
आपको नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए
पौष्टिक भोजन खाना है
पार्टनर से नियमित संबंध बनाएं
दिनचर्या में हर कार्य के लिए समय निश्चित करें
आपको मोटापा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए
अपनी सेहत का ख्याल रखें
अपना कंपलीट चेकअप आपको करवाते रहना चाहिए
कोशिश करें आपको किसी भी प्रकार की बीमारी ना लगे और आपको कोई बीमारी हो गई है तो वह ठीक हो जाए यह सुनिश्चित करें
आपके दिमाग में यह बात अवश्य होनी चाहिए कि आपको अभी मां भी बनना है
आपके शरीर का लचीलापन समाप्त नहीं होना चाहिए
ज्यादा दवाइयों के सेवन से बचें


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