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गुरुवार, 3 अक्तूबर 2019

गर्भावस्था में मुंहासों के क्या कारण है और प्राकृतिक तरीकों से कैसे मुहांसों से बचा जाए

नमस्कार दोस्तों आज की POST में हम आपसे चर्चा करने वाले हैं प्रेगनेंसी में अगर मुंहासे हो जाए तो उसके क्या कारण होते हैं और उन्हें प्राकृतिक तरीकों से कैसे दूर किया जाए इस विषय पर चर्चा करने वाले हैं
प्रेगनेंसी के दौरान मुंहासे होना एक साधारण सी बात है इसमें चिंता वाली कोई बात नहीं होती है क्योंकि  50% महिलाओं को ऐसी स्थिति में मुंहासे होते हैं, बस किसी को थोड़े से कम होते हैं और किसी को थोड़े से ज्यादा हो जाते हैं.

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं के शरीर में बहुत सारे आंतरिक और बाह्य बदलाव आते हैं इसके साइड इफेक्ट के तौर पर कभी-कभी महिलाओं को मुहांसों की समस्या आ जाती है.

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इसमें बहुत घबराने वाली बात नहीं होती है,  प्रेग्नेंसी के दौरान मुंहासे आपके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण होते हैं.इसका आप प्राकृतिक तरीके से इलाज कीजिए आप इस समस्या से बहुत जल्दी निजात पा जाएंगे.



मुंहासे क्यों होते हैं और प्राकृतिक तरीके से इसका इलाज कैसे किया जाए इस विषय पर चर्चा करते हैं .

गर्भवती महिलाओं में होने वाले हार्मोन परिवर्तन के कारण गर्भावस्था के दौरान त्वचा परिवर्तन, रंग में परिवर्तन होना आम बात है. इसीलिए गर्भवती महिला हार्मोन परिवर्तन के कारण कई तरह के बदलाव भी शरीर के भीतर और बाहरी रूप से महसूस करती है.

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प्रेग्नेंसी के दौरान मुंहासे होना सामान्य लक्षण है, जिसे आसानी से ठीक किया जा सकता है. इसके लिए आपको  बिल्कुल भी तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है.
गर्भावस्था में मुहांसों के कुछ कारण इस प्रकार से हैं.

शरीर में तरल की अधिकता के कारण : जब आप प्रेग्नेंट होती हैं तो आपके शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा बनी रहती है. शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा बनाए रखना गर्भ में पल रहे बच्चे की परवरिश के लिए आवश्यक है लेकिन इसकी वजह से शरीर से विषाक्त पदार्थ प्रॉपर तरीके से निकल नहीं पाते हैं क्योंकि यह तरल में घुल मिलकर शरीर में ही रह जाते हैं, और मुहांसों की एक वजह बनते हैं.

हार्मोंस असंतुलित होना: प्रेग्नेंसी के दौरान मुंहासे होने का सामान्य कारण हार्मोंस के लेवल में बदलाव होना होता है. पहले तीन महा महिला के शरीर में हारमोंस के अंदर, उसकी मात्रा में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं.

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प्रोजेस्टेरोन मुख्य हार्मोन है जो आपकी ग्रन्थि से ज्यादा मात्रा में नेचुरल ऑइल का उत्पादन कराता है, इसके कारण मुंहासे हो जाते हैं, होता क्या है गर्भावस्था में हार्मोन ग्रंथि से अधिक मात्रा में ऑयल का उत्पादन होता है, यह ऑयल त्वचा के रोम छिद्रों को बंद कर देता है और त्वचा में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जिसके कारण मुहांसों की समस्या पैदा हो जाती है .


पहले से ही मुहांसों की समस्या : अगर आप को पहले से ही मुंहासों  की समस्या है तो प्रेग्नेंट होने के बाद मुहासे होने की समस्या बहुत आम होती है

शरीर पर अतिरिक्त भार : शरीर को एक और शरीर को पालने की जिम्मेदारी होती है जिसकी वजह से शरीर स्वयं की आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए उतना ध्यान नहीं दे पाता है, क्योंकि आपके शरीर में तो रिसोर्सेज लिमिटेड होते हैं ऐसे में भोज्य पदार्थ जरा सा भी ऊपर नीचे हो जाता है तो अपच एसिडिटी कब्ज की समस्या पैदा हो जाती है जिसके कारण भी मुंहासे हो जाते हैं.



दोस्तों चर्चा कर लेते हैं प्राकृतिक तरीके से हम किस प्रकार से गर्भावस्था के अंदर मुहांसों से मुक्ति पा सकते हैं.

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भोजन का प्रकार : गर्भावस्था में आपको अपने भोजन पर विशेष ध्यान देना है आप कोशिश करें कि बाहर का तला भुना ना खाएं, बासी खाना ना खाएं, तीखा चटपटा ना खाएं . आप कोशिश करें कि आपका बहुत जाए अत्यधिक सुपाच्य हो, जिसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मेहनत ना करनी पड़े क्योंकि शरीर के पास ऐसी अवस्था में अतिरिक्त मेहनत करने का ना तो समय होता है ना ही रिसोर्सेज होते हैं अगर ऐसे में खाना पेट के अंदर सही तरीके से नहीं पचेगा, पिंपल्स की समस्या आ सकती है.


अपनी त्वचा को साफ रखें: प्रेग्नेंसी के दौरान मुंहासों से बचने के लिए अपनी त्वचा को हमेशा साफ रखें. इसके लिए अपने चेहरे को दिन में दो बार धोएं. एक बार जब आप सुबह सो कर उठें और एक बार रात को सोने से पहले, अपने चेहरे को अच्छी तरह धोएं ताकि उससे गंदगी निकल जाए और उसके बाद आराम से सुखाएं. त्वचा पर कुछ भी रब ना करें.

भरपूर पानी पिए : मुंहासे शरीर में विषाक्त पदार्थों के जमा होने के कारण होते हैं अगर आप अत्यधिक पानी पीते हैं तो ऐसे में सभी विषैले तत्व पानी के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं, कम पानी की वजह से आपकी त्वचा सुखी हो जाती है जो मुंहासे होने के लिए उपयुक्त होती है . आप इसके साथ ही ताजे फलों के जूस का सेवन भी कर सकती हैं.

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केमिकल युक्त प्रसाधन का : गर्भावस्था के दौरान किसी भी केमिकलयुक्त पदार्थ का प्रयोग  निषेध होता है . गर्भावस्था के दौरान किसी भी केमिकलयुक्त पदार्थ का प्रयोग निषेध होता है आप ध्यान रखें मुंहासे हो जाने पर आप किसी भी प्रकार के केमिकल युक्त क्रीम  या लेप का प्रयोग  ना करें यह बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

सूरज की रोशनी में ना जाएं: सूरज की रोशनी में ज्यादा देर तक रहने से ना केवल मुंहासे होते हैं बल्कि त्वचा को भी नुकसान पहुंचता है. इसलिए जब भी धूप में जाएं तो सनस्क्रीम का इस्तेमाल जरुर करें. लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि सनस्क्रीम से आपको मुंहासे ना हो.

मुहांसों से छेड़छाड़ : मुंहासे हो जाने पर महिलाएं मुहांसों को स्क्रब कर देती हैं उसे हटाने की कोशिश करती हैं जिसके कारण चेहरे पर घाव  हो जाते हैं और स्थिति बद से बदतर हो जाती है, अगर मुंहासे हो जाए तो उसके साथ छेड़छाड़ ना करें.

मुंहासे होने पर उपचार के समय चेहरे पर कोई दाग-धब्बे न पड़े इसके लिए मुंहासों की जगह बार-बार हाथ नहीं लगाना चाहिए. इससे त्वचा संक्रमण का खतरा भी हो सकता है.

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भोज्य पदार्थों का चयन : गर्भावस्था में आप अपने भोजन के अंदर एल्कलाइन फूड्स ज्यादा रखें क्योंकि एल्कलाइन फ़ूड पचने में बहुत आसान होते हैं और इन्हें लेने से कब्ज एसिडिटी गैस आदि की समस्या नहीं के बराबर होती है, आपका पाचन तंत्र मजबूत रहेगा अगर आपका पाचन तंत्र मजबूत है तो मुहांसों की समस्या जल्दी से नहीं होती है क्योंकि शरीर में विषैले तत्व बनते ही नहीं है.


गर्भावस्था के दौरान मुंहासों से बचने के लिए बाहर निकलते समय चेहरे को कवर करना चाहिए और धूल-मिट्टी से बचाना चाहिए.

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गर्भावस्था में मुंहासों से बचने के लिए मेकअप का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए. अगर इस्तेमाल करें भी तो वाटरप्रूफ और हल्का मेकअप ही करें.
सुबह-सुबह दौड़ना और सैर करना भी त्वचा के लिए अच्छा रहता है.
मुंहासों को दूर करने के लिए समय-समय पर क्लींजिंग करवाते रहना चाहिए.
मुंहासों से बचने के लिए गर्भावस्था में साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखना चाहिए. चेहरे पर उपयुक्त मॉश्चराइजिंग लोशन या क्रीम लगानी चाहिए.

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