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शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

प्रेगनेंसी में नींद पर्याप्त सोना क्यों जरूरी है

नमस्कार दोस्तों आज के इस POST के माध्यम से हम चर्चा करने वाले हैं प्रेग्नेंसी के समय महिला को किस प्रकार सोना चाहिए इस संबंध में हम अपने इस POST के माध्यम से चर्चा करेंगे कि
गर्भावस्था में सोना क्यों मुश्किल होता है
गर्भावस्था के दौरान कितनी नींद हमें लेनी चाहिए
क्या कम नींद प्रेगनेंसी में नुकसान पहुंचा सकती है
गर्भावस्था में नींद ना आने से क्या समस्याएं होती हैं

इन सब विषयों पर अपने इस POST के माध्यम से चर्चा करने वाले आइए चर्चा करते हैं

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दोस्त प्रेग्नेंसी के समय नींद बहुत ही महत्वपूर्ण होती है जब महिला सोती है तो उसमें बच्चे का विकास बहुत अच्छे से होता है क्योंकि उस वक्त शरीर को सिर्फ और सिर्फ एक कार्य रहता है वह होता है बच्चे की देखभाल तो आज मैं अपनी इस POST के माध्यम से नींद को लेकर चर्चा करने वाले हैं—
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गर्भावस्था में सोना क्यों मुश्किल होता है
प्रेगनेंसी के दौरान महिला के भूल का आकार बढ़ता जाता है महिला के स्तनों का आकार भी बढ़ता है. महिला को भारीपन महसूस होता. रात को बार बार पेशाब जाना पड़ता है, पेशाब जैसा महसूस होता है कई बार सांस लेने में भी दिक्कत आ जाती है. और डॉक्टर पेट के बल सोने की सलाह देते हैं. हिला के शरीर में हार्मोन काफी तेजी से बदलते रहते हैं जिसकी वजह से महिला का मन भी खराब रहता है. इस वजह से प्रेगनेंसी के दौरान सोने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है.


गर्भावस्था के दौरान कितनी नींद हमें लेनी चाहिए
डॉक्टर्स के अनुसार 18 से 64 वर्ष तक की आयु के लोगों को 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए. लेकिन भाई अगर गर्भवती महिला की बात करें तो उसे थोड़ा सा ज्यादा सोना चाहिए और साथ ही साथ दिन में भी कुछ घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए.

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क्या कम नींद प्रेगनेंसी में नुकसान पहुंचा सकती है
महिला के गर्भ में पल रहे शिशु को ऑक्सीजन और पोषक तत्व की जरूरत होती है. कई बार महिला के जागते समय बच्चे की आवश्यक जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं. भ्रूण की हृदय गति कम हो जाती है, उसे खून की कमी हो सकती है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब गर्भवती महिला सो रही होती है, तो उस वक्त भ्रूण तक रक्त का संचार, ऑक्सीजन का प्रवाह तेज गति से होता है क्योंकि शरीर को केवल एक ही कार्य होता है बच्चे की देखभाल और इस वक्त शरीर में हारमोंस का निर्माण भी नहीं हो रहा होता है तो बच्चे के विकास में अगर कुछ कमी रह गई होती है या पोषण में कमी रह गई होती है तो वह सोते समय पूरी हो जाती है.

गर्भावस्था में नींद ना आने से क्या समस्याएं होती हैं
प्रेग्नेंसी के दौरान रात को अच्छी तरह न सोने से गर्भवती को उच्च रक्तचाप व गर्भावधि मधुमेह जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है.  इतना ही नहीं स्लिप एप्निया, अधिक वजन, अनियंत्रित ग्लूकोज का स्तर व भूख बढ़ने जैसी समस्या भी हो सकती है. इन सबके साथ साथ में गर्भस्थ शिशु में ब्लड की सप्लाई और ऑक्सीजन का प्रवाह, उसका संचार सही प्रकार से नहीं होता है. जिसके कारण गर्भ शिशु के विकास और रुकने का अंदेशा बना रहता है और कभी-कभी समय से पहले भी डिलीवरी की समस्या देखने में आती है.
और भी दूसरे प्रकार की समस्याएं नजर आती हैं जो इस प्रकार से हैं.

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इम्यून सिस्टम प्रभावित हो सकता है।
सिजेरियन डिलीवरी की आशंका बढ़ सकती है।
गर्भवती महिला को तनाव तक का सामना करना पड़ सकता है।
गर्भवती महिला को दिनभर ज्यादा थकावट महसूस हो सकती है।
जन्म के दौरान शिशु का वजन कम हो सकता है।
त्वचा पर झाइयां नजर आ सकती हैं।
किसी भी काम को करने में एकाग्रता कम हो सकती है।

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