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गैस का कारण हमारी फूड हैबिट्स | Our Food Habits Cause Gas - Part #2

 हम पेट में गैस बनने के मुख्य कारणों को लेकर डिटेल में चर्चा कर रहे हैं. हमने एक इससे पहले article दिया है कि हम अगर समय से भोजन नहीं करते हैं तो हमारे पेट में गैस क्यों बनती है. इसके पीछे क्या कारण है. इस पर भी चर्चा की थी.


 आज हम बात कर रहे हैं पेट में गैस बन रही है तो इसके पीछे कारण हमारी फूड हैबिट्स हो सकती है. किस प्रकार से फूड हैबिट्स हमें गैस की समस्या देती है,इस पर चर्चा करते हैं.  

अगर आप खाना खाने के शौकीन है, और आपको गैस की समस्या है, तो हो सकता है कि आप अपने शौक को बरकरार रखते हुए गैस की समस्या को काफी हद तक कम करने में सक्षम हो पाए.
 
दोस्तों अगर आपको गैस की समस्या है, तो आप का पाचन तंत्र ठीक नहीं है. यह इस बात को दर्शाता है.


अगर आप पाचन तंत्र को मजबूत करने वाले योगा अपने जीवन में अपनाते हो तो बहुत सारी समस्याओं से आपको स्वयं ही निजात मिल जाएगी, लेकिन यह हर एक व्यक्ति के लिए संभव, खासकर आजकल नहीं होता है. 


क्योंकि आजकल लाइफस्टाइल काफी बिजी हो गया. हमारे पास हमारे शरीर के लिए समय ही नहीं होता है अगर समय दिया तो हम दूसरों से पीछे रह जाएंगे.


आपकी फूड हैबिट्स आपको किस प्रकार से गैस की समस्या देती है इसके लिए आपको एक दो छोटी छोटी बातें समझनी होंगी.


हमारा शरीर एक मशीन है. और यह जिस वातावरण में आप रहते हो, वहां के अनुसार अपने आप को ढाल लेता है.
जैसी लाइफस्टाइल आप जीते हो उसके अनुसार अपने आप को बदल लेता है.
जैसा भोजन आप करते हो उसके अनुसार आपके लिए कार्य करता है. 


आयुर्वेद कहता है कि आपके भोजन में कम से कम वैरायटी होनी चाहिए. तभी वह आसानी से पचता है. और पाचन तंत्र मजबूत रहता है.


आप का वातावरण तो एक ही रहता है लेकिन जैसे जैसे आप बड़े होते हो तो आपका लाइफस्टाइल और आपका भोजन धीरे-धीरे बदलने लगता तो यह गुण हमारे शरीर के अंदर है कि वह धीरे-धीरे परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है और उसके अनुसार अपने आप को बदलता भी रहता है.


आपको कोई शारीरिक प्रभाव या परेशानी नजर नहीं आती है, और आपका लाइफस्टाइल और भोजन बदल जाता है. लेकिन यह बहुत धीरे-धीरे बदलता है, तो इसलिए आपको कोई समस्या नहीं आती है. और आपको पता भी नहीं चलता है.


अब आप अचानक से एक शहर से दूसरे शहर चले जाते हैं. अपने क्षेत्र से 100 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर दूर चले जाते हैं. अपने गांव से शहर चले जाते हैं, तो वहां पर जाते ही आप का वातावरण आपका लाइफस्टाइल और आपका भोजन तीनों ही एक झटके में बदल जाते हैं.


अगर आप ध्यान नहीं रखेंगे तो इसका सबसे पहला प्रभाव आपकी पाचन क्रिया पर ही आता है. आपके पेट पर आता है. और आपको पेट से संबंधित काफी सारी समस्याएं नजर आने लगती है. फिलहाल हम गैस को लेकर बात कर रहे हैं तो इसी पर रहते हैं.


जब तक आप वहां के वातावरण के अनुसार वहां की लाइफ स्टाइल के अनुसार और वहां के भोजन के अनुसार अपने आप को ढाल नहीं लेते तब तक आप को इस प्रकार की गैस की समस्या रह सकती है.


ऐसी स्थिति में आप वातावरण और लाइफस्टाइल पर तो नियंत्रण नहीं रख सकते हैं. क्योंकि अगर आप वहां कार्य करने गए हैं, तो आपको लाइफ स्टाइल को बदल नहीं पड़ेगी.

 लेकिन आप अपने भोजन को नियंत्रित कर सकते हैं, भोजन के नियंत्रण से आप गैस जैसी समस्या को भी नियंत्रित कर सकते हैं.


आपको एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के 6 महीने तक कम से कम हल्का और सुपाच्य भोजन ही खाना चाहिए. और उसके बाद धीरे-धीरे अपने भोजन की हैबिट को बदलना चाहिए.


परंतु हम पहले दिन से ही अलग भोजन को देखकर ललचा जाते हैं, और अपने फूड हैबिट पर कंट्रोल नहीं रख सकते.  और नतीजा हमें गैस की भारी समस्या नजर आती है कब्ज की भारी समस्या नजर आती है.


आपने कई बार देखा होगा कि पानी बदलने की वजह से भी गैस की समस्या हो जाती है.  क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग प्रकार का पानी होता है. वहां अलग-अलग प्रकार के खनिज तत्व पानी में पाए जाते हैं, तो पानी बदलने से भी गैस की समस्या होती है. आपके शरीर को उस पानी को अपनाने में उसके अनुसार अपने आप को डालने में समय लगेगा. और शरीर तभी अपने आप को ढाल पाएगा जब आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होगा. शरीर मजबूत होगा.


दूसरा फूड हैबिट को लेकर हमारा पॉइंट इस प्रकार से है कि अगर आप एक ही समय में अलग-अलग प्रकार का भोजन करते हैं या खाते हैं अर्थात आपने हल्का सुपाच्य भोजन भी लिया है.


 जैसे की लौकी तोरी की सब्जी और  साथ में आपने राजमा, चना, उड़द इत्यादि की दाल भी ली है, जो गरिष्ठ और देर से पचने वाला है.  और साथ में आपने जूस भी ले लिया और दो तीन पूड़ी कचौड़ी भी खाली.
खासकर शादी ब्याह में इस प्रकार का भोजन व्यक्ति ले लेता है. 


आग एग्जांपल लेकर हम आप को समझा रहे हैं कि इससे क्या होता है गैस क्यों बनती है


यह सभी खाद्य पदार्थ पचने में अलग-अलग समय लेते हैं लौकी तोरी या मूंग की दाल आधा घंटे से पहले ही पच सकती है. चना राजमा की दाल 40 मिनट का समय ले सकती है. जूस को पचने में कोई समय नहीं लगेगा, बहुत ही कम समय लगता है. और पूड़ी कचौड़ी 40 मिनट से अधिक समय पचने में ले सकती हैं. ऐसे में जब तक पूरा भोजन आपके शरीर में नहीं  पचेगा, वह आगे आंतों में नहीं बढ़ेगा. 


क्योंकि आंतों में भोजन पचने के बाद ही जाता है जब तक पूरा भोजन नहीं पचगा तब तक भोजन आपके पेट में ही रहेगा और जो भोजन काफी पहले पच गया है. वह सड़ने लगेगा और गैस की समस्या को नजर आने लगेगी.  इसलिए भोजन की अत्यधिक वैरायटी होना वह भी गैस का मुख्य कारण होता है.

फूड हैबिट की वजह से तीसरा कारण क्यों गैस बनती है
हम मान रहे कि आप सुपाच्य भोजन कर रहे हैं लेकिन अगर वह भोजन आपने अपनी कैपेसिटी से अधिक खा लिया है, तो भोजन को पचने में काफी समय लगता है. कुछ भोजन पहले पचगा कुछ भोजन धीरे-धीरे पचेगा. 


क्योंकि आपने भोजन अपनी कैपेसिटी से अधिक खाया है, तो जो भोजन पहले पच जाएगा. वह सड़ने लगेगा और आपको गैस बनेगी. आपने देखा होगा कि कभी-कभी अधिक खाने से भी गैस बनती है. 

यही कारण होगा और अगर आपने ऐसा भोजन खाया है जो गरिष्ठ है जो पचने में समय लेता है तो फिर गैस की समस्या तो होगी ही होगी.

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