अल्ट्रासाउंड गर्भस्थ शिशु की उम्र कम क्यों बताता है ?

 प्रश्न : हमने अल्ट्रासाउंड कराया है तो हमारा गर्भ तो 8 हफ्ते का है लेकिन अल्ट्रासाउंड के दौरान उसे 6 या 5 हफ्ते का बताया गया है. और जब उनका गर्भ उनके अनुसार 8 या 9 हफ्ते का होता है और अल्ट्रासाउंड में उसे कम दिनों का बताया जाता है तो माता-पिता को लगता है कि उनके बच्चे की ग्रोथ नहीं हो रही है और वह चिंतित हो जाते हैं.
काफी माता-पिता तो अपनी रिपोर्ट को ठीक प्रकार से घर जाकर देखते हैं और जब उन्हें यह पता चलता है,  कि गर्भ तो बताए गए हफ्तों से कम हफ्ते का है तो परेशानी का अनुभव करते हैं.


आज हम इसी समस्या के समाधान को लेकर चर्चा कर रहे.




दोस्तों यह बात तो हकीकत है कि गर्भ किस दिन ठहरता है, उसका किसी को भी पता नहीं होता है.

बहुत सी महिलाएं यह बात कहती हैं कि, उन्हें पता है कि उनका गर्भ किस दिन से है, लेकिन यह हकीकत है कि उन्हें भी नहीं पता होता है. क्योंकि जिस दिन महिला के शरीर में अंडे का उत्सर्जन होता है. उसके बाद ही गर्भ ठहरता है, और महिला के शरीर में पुरुष का अंश 3 दिन से ज्यादा समय तक जीवित रह सकता है. तो ऐसा हो सकता है कि दंपत्ति जिस दिन संतान प्राप्ति के लिए कोशिश करें गर्भ उसके 3 दिन बाद ही उत्पन्न हुआ हो. 

ऐसा संभव है, तो ऐसे में यह बात भी है कि जब उस महिला को नहीं पता जिसके शरीर में गर्भ है, तो ऐसे में डॉक्टर को कैसे पता कि आप की प्रेगनेंसी कितने दिन की, या  कितने हफ्ते की या कितने महीने की है.

इस समस्या को देखते हुए इसका समाधान खोजा गया कि प्रेगनेंसी उस दिन से मानी जाए, जिस दिन लास्ट पीरियड आता है. उस दिन पहला दिन माना जाता है. उसके बाद प्रेगनेंसी काउंट होने लगती है और यह भी एक वास्तविकता है कि प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते में अर्थात जिसे पहला हफ्ता माना जाता है. उसमें प्रेगनेंसी का नामोनिशान दूर-दूर तक नहीं होता है. 

प्रेगनेंसी किसी भी गर्भवती महिला को उसके पहले महीने के 10 दिन के बाद से लेकर 20 दिन तक के बीच में होती है. अर्थात कम से कम 2 हफ्ते का तो समय ऐसा होता है जिसमें प्रेगनेंसी नहीं होती या मात्र शुरुआत हुई होती है. 


अल्ट्रासाउंड एक मशीन है और यह बच्चे के अंग प्रत्यंग ओं के विकास के आधार पर इस बात की कैलकुलेशन करती है, कि बच्चे की उम्र कितने हफ्ते की है और उसका कैलकुलेशन लगभग लगभग सही सही बैठता है, और वह हमेशा दूसरे महीने के अल्ट्रासाउंड में बच्चे को लगभग लगभग दो हफ्ते कम ही बताती है और वास्तविकता भी यही है कि शिशु लगभग 2 हफ्ते कम उम्र का होता भी है.


कभी-कभी शिशु की उम्र 3 हफ्ते तक कम रहती है और कभी-कभी मात्र 1 हफ्ते तक कम रहती है.
और थोड़ा बहुत वेरिएशन अल्ट्रासाउंड मशीन की कैलकुलेशन में भी हो सकता है जिससे लगभग 1 हफ्ते का फर्क आ जाता है.

एक उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि किसी महिला को पीरियड 10 जुलाई को आता है, और 10 अगस्त को उसका पीरियड मिस हो जाता है और पता चलता है कि वह गर्भवती है. वास्तविकता तो यही है कि वह 10 जुलाई के 10 दिन बाद ही प्रेग्नेंट होगी लेकिन उसके प्रेगनेंसी 10 जुलाई से ही मानी जाती है.

10 अगस्त तक उसे लगभग 4 हफ्ते मान लिए जाते हैं, और 10 अगस्त तक 1 महीना हो जाता है.

लेकिन वास्तविकता यही है कि वह महिला पीरियड के लगभग 5 दिन के बाद और उसके भी कुछ दिनों बाद जब अंडे का उत्सर्जन हुआ होगा तब प्रेग्नेंट हुई होगी तो लगभग 10 से 15 दिन का समय तो लगता ही लगता है.

तो ऐसी अवस्था में किसी भी अल्ट्रासाउंड में जो कि 2 महीने के बाद किया जाता है या दूसरे महीने में किया जाता है उसमें शिशु की उम्र लगभग लगभग 2 हफ्ते के आसपास कम ही बताई जाती है.

ऐसा अल्ट्रासाउंड जिसके अंदर बच्चे की उम्र  1 से 2 हफ्ते तक कम बताई जाती है वह सही माना जाता है.

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