जब पत्नी लड़ते-लड़ते शरमा गई | जीवन का अनुभव | कहानी

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके सामने जानकी जी के जीवन से जुड़ा हुआ एक अनुभव आपके सामने लेकर प्रस्तुत है जो उन्होंने मैं शर्म से लाल हो गई श्रृंखला के अंतर्गत हमें भेजा है इसमें हमने पात्र और नाम जगह दोनों के नाम अलग कर दिए हैं.


जानकी जी को बचपन से ही कला का अत्यधिक शौक था क्योंकि उनके पिता भी कला प्रेमी थे और हिंदी साहित्य के जानकार भी थे. तो आप कह सकते हैं कि यह गुण जानकी को विरासत में मिला था.


जानकी अपने स्कूल में गायन, कविता पाठ और नृत्य कला में और नाट्य कला में हमेशा पार्टिसिपेट किया करती थी. पिता के कारण जानकी लेखन में भी काफी सिद्धहस्त थी वह काफी अच्छा लिखा कर दी थी.


अपने कॉलेज के दिनों में जानकी  थिएटर से भी जुड़ी हुई थी. महाभारत, रामायण और दूसरे धार्मिक कार्यक्रमों से संबंधित नाटकों में जानकी रोल किया करती थी. 


जानकी का विवाह एक ऐसे व्यक्ति से हुआ था जो जानकी की लेखन और कला से काफी प्रभावित था. 


जानकी विवाह होकर अपने मायके कोलकाता से ससुराल आ गई, और यहां उनका काफी हद तक कला से साथ टूट सा गया था. क्योंकि घर की जिम्मेदारियां और बच्चियों की जिम्मेदारियां जब सर पर आ जाती है तो परिवार को ही वरीयता देना भारतीय समाज में महिलाओं को सिखाया जाता है और उन्होंने अपने शौक को अलग रखकर अपने परिवार को वरीयता दी.

 
कहीं ना कहीं कला से साथ छूट जाना उन्हें दुख देता था, लेकिन उनका हस्बैंड उन्हें काफी मान सम्मान और प्यार करता था और एक अच्छे परिवार की वजह से उन्हें काफी संतुष्टि भी मिलती थी. 


जानकी जी बताती हैं कि जीवन चला जा रहा था एक दिन उनका अपने पति से किसी बात को लेकर झगड़ा शुरू हो गया और झगड़ा थोड़ा सा बढ़ गया.


और जानकी ने गुस्से में आकर और बिना सोचे समझे कह दिया कि “मैं तुमसे तंग आ गई हूं, इससे अच्छा तो यह रहता कि मैं कुमारी ही रह जाती


इतना सुनते ही जानकी के हस्बैंड ने तपाक से कहा “हमने तो सुना था, कि तुमने अपने कॉलेज के दिनों में द्रोपति के बहुत रोल किए हैं जो महिला 5,5 पति को संभाल सकती है वहीं एक पति से कैसे तंग आ सकती है

जब पत्नी लड़ते-लड़ते शरमा गई


इस अनएक्सपेक्टेड बात को सुनकर जानकी की का सारा गुस्सा तुरंत छूमंतर हो गया और वह शरमा गई.

जानकी के चेहरे पर गुस्से से अचानक इस प्रकार के भाव देखकर जानकी के हस्बैंड भी कुछ नहीं समझ पाए और वह भी हक्के बक्के होकर जानकी को देख रहे थे.

जब उन्होंने अपनी बात का मतलब स्वयं समझा तो वह भी हंसने लगे और जानकी शर्म से लाल होकर दूसरे कमरे में चली गई.

जब भी इस घटना का जिक्र जानकी और उसके हस्बैंड के सामने आता है, तो जानकी आज भी वही महसूस करने लगती है, जो उस दिन झगड़े के बाद उन्होंने महसूस किया था.

 वह इसे अपने जीवन की एक अद्भुत घटना मानती हैं. जिसमें कई प्रकार की भावनाओं का समावेश था. यह बात उन्हें आज भी गुदगुदा आती है.

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