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इस हारमोंस की अनियमितता की वजह से प्रेगनेंसी नहीं होती है

प्रेगनेंसी होने में एक कंपलीट प्रोसेस होती है. इस प्रोसेस में कई सारी कड़ियां है. इन सभी कड़ियां का प्रेगनेंसी के दौरान मजबूत होना काफी आवश्यक होता है.

अगर कोई सी भी कड़ी कमजोर रह जाती है, तो प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है.

इसके अंदर पुरुषों के स्पर्म से लेकर महिलाओं के अंडे और काफी सारे हारमोंस का बहुत बड़ा योगदान होता है.

साथ ही साथ महिला के शरीर के अंदर रीप्रोडक्टिव सिस्टम का भी ठीक होना, स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है.

एक ऐसा हारमोंस है अगर यह गड़बड़ हो जाता है तो महिला को प्रेगनेंसी होने में समस्या का सामना करना पड़ता है.

 एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए शरीर में हार्मोन्स का संतुलित होना जरूरी है.

खानपान के बदलते तौर-तरीके और रहन-सहन की गलत आदतों से सबसे पहले शरीर के विभिन्न हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं.

एक हारमोंस जिसे हम एंटी मुलेरियन हार्मोन (एएमएच) कहते हैं. यह महिलाओं के शरीर में एक महत्वपूर्ण हार्मोन होता है. जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी होने में समस्या का सामना करना पड़ता है. उसके अंदर अधिकतर इस हारमोंस की गड़बड़ी पाई जाती है. 

यह हार्मोन महिला के अंडाशय में बनता है. इसका स्तर अंडाशय के अंदर eggs के प्रवाह को प्रभावित करता है. ऐसे में इसका कम हो जाना महिलाओं के अंदर इनफर्टिलिटी अर्थात बांझपन की समस्या का एक कारण हो सकता है.

इस हारमोंस की अनियमितता की वजह से प्रेगनेंसी नहीं होती है


महिलाओं के रक्त में इस हारमोंस का मिलना इस बात का संकेत है, कि महिला के शरीर के अंदर अंडाशय में अंडों की उपस्थिति काफी अच्छी है.

साथ ही साथ इस बात का भी संकेत है कि फर्टिलाइजेशन के लिए उपलब्ध अंडे भी अर्थात परिपक्व अंडे भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.

अर्थात महिला के ओवुलेशन पीरियड में मैच्योर अंडे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. अगर महिला प्रेगनेंसी के लिए कोशिश कर रही है तो उसके गर्भवती होने की संभावना काफी ज्यादा है. यह हारमोंस छोटे विकसित फॉलिकल्स के जरिए बनता है.

असल में आजकल बदलती जीवन शैली के चलते और भोजन की गुणवत्ता सही नहीं होने के चलते महिला के शरीर में रिप्रोडक्टिव सिस्टम में जो बदलाव 35 वर्ष की उम्र के बाद होने लगते हैं, वह पहले ही शुरू हो जाते हैं, और महिला बांझपन का शिकार बन जाती है.

अगर महिला को प्रेगनेंसी की समस्या हो रही है, तो ऐसे में इस हारमोंस का टेस्ट अंडाशय की कार्यप्रणाली को गहराई से जानने और मेनोपॉज की शुरुआत के बारे में पता लगाने का अच्छा साधन है.

खासकर 20 वर्ष की उम्र से लेकर 25 वर्ष की उम्र तक इस हारमोंस की गुणवत्ता बहुत अच्छी रहती है.

उम्र बढऩे के साथ महिलाओं के अंडाशय में अंडों की कमी होने लगती है. ऐसा शरीर में पोषण तत्त्वों की कमी से होता है.

खराब गुणवत्ता वाला भोजन करने, रक्तसंचार बेहतर न होने, असंतुलित हार्मोन व अन्य सेहत संबंधी समस्याओं के कारण भी महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पातीं.

इसलिए प्रेगनेंसी नहीं होने में सबसे पहला कदम तो यही होता है, कि महिला अपना खानपान सुधारें. अपनी लाइफ स्टाइल को सुधारें.

समय से उठना, समय से सोना, अत्यधिक आवश्यक है. सुबह के समय योगा भी कोशिश करना चाहिए. और साथ ही साथ महिला को तनाव बिल्कुल भी नहीं लेना है. यह आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है.

डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और अंकुरित अनाज शामिल करें. खासकर कैल्शियम व आयरन की कमी को पूरा करने के लिए पालक व दूध उत्पाद लें.

 यह हार्मोन शिशु के शुरुआती समय से लेकर शिशु के जन्म तक काफी महत्वपूर्ण होता है. इसका उत्पादन होना अत्यधिक आवश्यक है. इसके लिए आपकी सही जीवनशैली और सही भोजन अत्यधिक आवश्यक होता है.

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