प्रेगनेंसी में अंडाशय की इंपोर्टेंस क्या है

 किसी भी महिला को गर्भवती होने में एक पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. उस प्रक्रिया की हर एक कड़ी को अपने आप में सही होना अत्यधिक आवश्यक है.

इस कड़ी में पुरुष स्पर्म की क्वालिटी से लेकर महिला के शरीर में अंडों की क्वालिटी और प्रजनन सिस्टम के हर एक अंग का सही तरह से कार्य करना और सही आकार में होना अत्यधिक मायने रखता है.

अगर कहीं भी किसी भी कड़ी में किसी भी प्रकार की कमी रह जाती है, तो प्रेगनेंसी होने में समस्या का सामना करना पड़ता है.



आज हम बात कर रहे हैं, क्या गर्भाशय का आकार भी महिला की प्रेगनेंसी में अपनी भूमिका निभाता है

 

what is the importance of ovary in pregnancy

 

ओवरी का साइज

महिला की ओवरी अर्थात अंडाशय के अंदर अंडों का निर्माण और रिजर्व होता है. ऐसे में अंडाशय सीधे तौर पर तो प्रेगनेंसी में अपनी भूमिका नहीं निभाते हैं. लेकिन अंडे जोकि प्रेगनेंसी में अपनी सीधी भूमिका निभाते हैं. उनकी क्वालिटी को मेंटेन करना उनकी संख्या को मेंटेन करना इसमें अंडाशय का महत्वपूर्ण रोल होता है.

गर्भधारण में ओवरी यानी अंडाशय अहम भूमिका निभाते हैं.ओवरी में ही अंडे बनते हैं, जोकि बाद में स्पर्म से फर्टिलाइज होकर प्रेगनेंसी को आगे बढ़ाते हैं.

ओवरी में प्रमुख स्त्री प्रजनन हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन भी बनते हैं. गर्भधारण करने में ओवरी का साइज भी महत्व रखता है. अगर ओवरी छोटी हो तो उसमें सामान्य से कम अंडे होते हैं.

हालांकि, ओवरी का साइज बड़ा होने का ये मतलब बिल्कुल भी नहीं होता है, कि उसमें एग रिजर्व ज्यादा होगा. कई कारणों से ओवरी के साइज में बदलाव आ सकता है, जिसके बारे में बात करते हैं…


ओवरी का साइज बदलने के कारण


प्यूबर्टी की उम्र में पहुंचने से पहले और मेनोपॉज के बाद ओवरी का साइज छोटा होता है.

उम्र के अलावा अगर अंडाशय में कुछ विकार आ गया है. उसके कारण भी महिला की ओवरी अर्थात अंडाशय  छोटा हो सकता है.

महिला को प्रेगनेंसी कई कारणों से नहीं होती है. ऐसे में अगर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लिया जा रहा है, तो उसके साइड इफेक्ट के रूप में भी अंडाशय छोटा हो सकता है.
 
बहुत से कारणों में प्रेगनेंसी के दौरान भी कभी-कभी महिला के ओवरी साइज में परिवर्तन आ जाता है.

अंडाशय का साइज और प्रेगनेंसी


जैसा कि हमने बताया है कि अंडाशय सीधे-सीधे प्रेगनेंसी में अपनी भूमिका नहीं निभाता है, लेकिन अंडाशय का साइज महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने या घटाने में अपनी भूमिका जरूर निभाता है.

यह प्रेगनेंसी की क्षमता को प्रभावित करता है. अंडों के फर्टिलाइजेशन होने की क्षमता भी ओवरी के साइज पर ही निर्भर करती है. अगर अंडाशय का साइज नॉरमल से कम रहता है, तो महिला को गर्भ धारण करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. इसका एक रिजर्व सामान्य से कम होता है. प्रेगनेंसी के लिए अंडों की संख्या का अधिक होना महत्वपूर्ण होता है.

अगर महिला के ओवरी का साइज किसी कारणवश बढ़ जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है, कि यह महिला को प्रेग्नेंट होने में मदद करेगा.

कभी कभी रसोली या ट्यूमर हो जाने पर महिला के अंडाशय का आकार बढ़ जाता है.

पीसीओएस की समस्या में भी महिला की के अंडाशय का साइज बढ़ जाता है तो महिला को Ovulation होने में समस्या का सामना करना पड़ता है, और प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है.

प्रेग्नेंसी के लिए अंडाशय का साइज 3 से.मी x 2.5 से.मी x 1.5 से.मी होना चाहिए. ये स्वस्थ ओवरी का साइज है. इस आकार के अंडाशय में पर्याप्त एग रिजर्व होता है.

एक सही आकार के स्वस्थ अंडाशय के अंदर एक अंडे को डिवेलप और परिपक्व होने में काफी आसानी होती है. 

अगर अंडाशय का साइज कम होगा तो महिला के अंडे सही प्रकार से परिपक्व नहीं हो पाएंगे और अपरिपक्व अंडे प्रेगनेंसी को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं.

अगर आपको प्रेगनेंसी होने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो आप एक बार यह जरूर देखें कहीं अंडाशय का आकार तो कम नहीं है, या किसी कारणवश अधिक तो नहीं हो गया है.

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