बच्चे को सुलाने या आराम करने से संबंधित 18 टिप्स

 9 महीने की एक कठिन तपस्या के बाद एक गरबा नवजात शिशु की प्राप्ति काफी सुखद होती है. लेकिन इसके साथ ही साथ एक नई जिम्मेदारी बच्चे की देखभाल आपके ऊपर आ जाती है.
 जितना ध्यान आपने अपना प्रेगनेंसी के दौरान रखा है. अब भी आपको उतना ही ध्यान रखना रखना है.

बच्चे को सुलाने या आराम करने से संबंधित 18 टिप्स


 साथ ही साथ आपको बच्चे का भी ध्यान रखना होगा. हम बच्चे को सुनाने से संबंधित कुछ छोटी-छोटी बातें आपसे शेयर करने जा रहे हैं. अगर आप पहली बार मां बन रही है, तो यह बातें आपके लिए काफी काम की सिद्ध हो सकती है.

  1. बच्चा जब जन्म लेता है तो वह एक थकावट भरी प्रक्रिया से गुजर कर आता है. ऐसे में उसे काफी आराम की आवश्यकता होती है. पहले 24 घंटे तो बच्चे को दूध पिलाने के अलावा उसे गर्म रखें और उसे आराम करने दें. उसे ज्यादा गोद में नहीं ले. उससे थोड़ा दूरी बनाकर रखें. क्योंकि बच्चा पैदा होने के बाद अपने आप को मजबूत करना शुरू कर देता है, ताकि वह इस बाहरी वातावरण में अपने आप को एडजस्ट कर सकें.


  2. बच्चे को अपने आप को मजबूत करने में लगभग 20 से 30 दिन का समय लगता है, और इतने समय में वह काफी मजबूती प्राप्त कर लेता है.


  3. इस दौरान आपको उसे काफी कुछ सिखाने की भी आवश्यकता होती है. उसे दूध पिलाना आपको सिखाना पड़ता है. और यह पहले 24 घंटे से ही ट्रेनिंग शुरू हो जाती है.


  4. जो माताएं इस बात का ध्यान नहीं रखती है उन्हें शुरुआती समय में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है. क्योंकि बच्चा दूध पीना नहीं सीखता है, और उसे दूध पिलाना बहुत आवश्यक होता है. हालांकि दूध पीने के गुण उसके अंदर जन्मजात होते हैं, लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना है कि वह माता का दूध पिए.


  5. बच्चे को मजबूत बनाने के लिए आराम करना काफी आवश्यक होता है. कुछ बच्चे शुरुआती समय में 1 दिन के अंदर 16 घंटे तक आराम कर सकते हैं. हालांकि जब बच्चा 3 महीने या उससे बड़ा हो जाए तो वह एक साथ 6 से 7 घंटे सो सकने में सक्षम होता है, लेकिन प्रारंभिक अवस्था में बच्चा केवल एक बार में 2 से 3 घंटे ही सोता है, और यदि बच्चे ने 4 घंटे तक कुछ नहीं खाया है तो आप उसे नींद से उठाएं धीरे से उठाएं और उसे दूध पिलाएं.


  6. दूध पिलाने में जबरदस्ती नहीं करनी है. बस उसे पिलाने की कोशिश करें. अगर वह पीता है तो बहुत अच्छा हालांकि 4 घंटे बाद बच्चा दूध पिएगा ही. अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा 4 घंटे बाद भी दूध पीने में सक्षम नहीं हो पा रहा है तो आप डॉक्टर से इस बारे में बात जरूर करें.


  7. यह बात भी देखने में आई है कि नवजात शिशु को कभी-कभी दिन और रात में भ्रम होता है. यह कुछ बच्चों के साथ होता है, यदि आपका बच्चा रात में अधिक सक्रिय है तो बच्चे की रात्रि उत्तेजना को सीमित करने के लिए रोशनी हल्की रखें और आप धीरे-धीरे बात करें और तब तक धैर्य रखें जब तक आपके बच्चे का नींद का चक्र नॉर्मल नहीं हो जाता है.


  8. जब आप अपने बच्चे को लेटआते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वह पीठ के बल ही लेटे और यह ध्यान रखना तब तक आवश्यक है जब तक उसकी नाभि का जख्म ठीक नहीं हो जाता है. जब बच्चे की नाभि ठीक हो जाती है उसके बाद उसे पेट के बल भी लेटने का मौका अवश्य दें.


  9. आपका बच्चा काफी नाजुक होता है. खासकर शुरुआत के 3 महीने तो इस बात का विशेष ध्यान रखें, कि उसे जिस भी जगह पर लेट आए वह बिस्तर काफी मुलायम होना चाहिए.


  10. बच्चे का व्यवहार ऐसा हो सकता है, कि वह दाई तरफ या बाई तरफ ज्यादा लेट , तो आप कोशिश करें कि वह जिस तरफ ज्यादा लेता है. उसके दूसरी तरफ भी वह लेटे, इसके लिए आप मुलायम तकिए का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.


  11. बच्चे को सुलाते समय खासकर शुरू के 3 महीने तकिया बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए. बच्चे की गर्दन बच्चा संभाल नहीं पाता है. इससे उसके सांसों की नली मोड़ सकती है, और काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि तकिया तो लगाना ही नहीं चाहिए.


  12. बच्चे के रूम में मच्छरों से बचने के लिए कभी भी आपको ऐसे ही केमिकल युक्त पदार्थों का यूज नहीं करना है, जो बाजार में मिलते हैं. आप इसके लिए मच्छरदानी का उपयोग करें, क्योंकि मच्छर या कीट पतंगे भी बच्चे को नहीं सोने देते हैं. उन के काटने से बच्चे को बहुत बेचैनी होती है.


  13. अगर आपके बच्चे का सोने का चक्र उल्टा है अर्थात दिन में कम सोता है रात में ज्यादा सोता है तो आप कोशिश करें कि उसका चक्र बदल जाए इससे माता को भी काफी लाभ मिलेगा लेकिन इसके लिए बच्चे के साथ जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए. बस आपको ऐसा माहौल बनाना है, वह भी माहौल बच्चे की आदत के अनुसार ही बनाया जाता है कि उसे लगे कि रात्रि सोने के लिए है. इस बात के लिए कोई विशेष ट्रिक नहीं होती है.


  14. बच्चे को पहले दिन से ही काफी कुछ सिखाने की आवश्यकता होती है जैसा हमने बताया दूध पीना उसे सीखना होता है और आप बच्चे को थपकी देकर सुलाया करें ताकि उसे यह लगे कि जब उसे थपकी दी जाती है तब उसे सोना है उसे आराम करना है यह उसके क्रम को बदलने में काफी मदद कर सकता है.


  15. आप ऐसा भी कर सकते हैं कि जब बच्चा आपका दो से 3 घंटे सोता है तो आप उसे 2 घंटा पूरा हो जाने पर हल्के से हिला कर उठाने की कोशिश कर सकते हैं या उसे गोद में लेकर सुला सकते हैं ताकि वह स्वता ही उठ जाए और रात्रि में कोशिश करें कि वह नहीं उठे.


  16. जब आपका बच्चा आराम की मुद्रा में आता है या आप उसे सुला रहे होते हैं तो आप कोई हल्का सा मीठा म्यूजिक लगा दे धीरे-धीरे बच्चे को उस म्यूजिक को सुनकर यह लगेगा कि उसे सोना है उसे आराम करना है. इस ट्रिक का इस्तेमाल मैंने स्वयं किया है शुरू के 1 साल तक तो असर रहता है लेकिन बाद में नहीं.


  17. बहुत से ऐसे इसेंशल ऑइल (तेल) आते हैं, जिनकी खुशबू बच्चे को आराम महसूस करवाती है. यह बच्चे को सुलाने के लिए भी काफी कारगर हो सकते हैं. लेकिन इनका इस्तेमाल करने से पहले आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछें और डॉक्टर की सलाह पर ही इस प्रकार का तेल इस्तेमाल करें. अर्थात जिस तेल को वे रिकमेंड करें आप उसे ले.इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि जब बच्चा आराम कर रहा हो तो माता को भी उस वक्त आराम अवश्य करना चाहिए.


  18. नवजात शिशु अगर 16 घंटे से कम सोता है तो एक बार डॉक्टर से अवश्य बात करें यह आवश्यक है.

 

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