बरसात में गर्भवती स्त्री को संक्रमण के कारण

किसी भी गर्भवती स्त्री को बरसात के मौसम में किन किन बातों का ध्यान रखना काफी आवश्यकता है. वैसे तो हमेशा ही ध्यान रखने की आवश्यकता होती है.
लेकिन बरसात के मौसम को कच्चा मौसम कहा जाता है. यह कच्चा मौसम से मतलब है कि बरसात के समय बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. आइए बात करते हैं गर्भवती स्त्री को किन किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है.



दोस्तों स्पेशली गर्भवती स्त्री को संक्रमण के खतरे से दूर रहना चाहिए और बरसात के मौसम में संक्रमण किन-किन तरीकों से होने की संभावना होती है उस पर बात कर लेते हैं.

कपड़ों से संक्रमण का खतरा

बरसात के मौसम में बैक्टीरिया का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. ऐसे में हमारे कपड़े भी बिल्कुल सुरक्षित नहीं है.

असल में बरसात के मौसम में आद्रता बहुत ज्यादा रहती है अर्थात हवा में पानी की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है. जिसकी वजह से कपड़ों में नमी बनी रहती है. यही नमी बैक्टीरिया का कारण बन सकती है.

इसलिए कोशिश करें कि आपके कपड़े धूप में जरूर सूखे. क्योंकि धूप बैक्टीरिया को मारने का कार्य करती है.
बरसात में जो कपड़े ठंड में सूखते हैं. आप देखेंगे कि उसके अंदर थोड़ी सी गंध आती है. यह गंद गर्भवती स्त्री के कपड़ों से नहीं आनी चाहिए.

बरसात में गर्भवती स्त्री को संक्रमण के कारण

आपका पीने का पानी

हम पीने के पानी के प्रति काफी ज्यादा लापरवाह रहते हैं. बैक्टीरिया मुख्य रूप से नमी में ही बढ़ता है, और नमी के अंदर कई प्रकार के फंगस भी फलते फूलते हैं.

इसलिए महिला को चाहिए कि वह अपना पानी एक बार उबालकर और फिर ठंडा करके पिए. यह उसके लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित रहता है, और उसका बर्तन भी साफ होना चाहिए. आजकल बाजार में काफी ज्यादा प्रोडक्ट है. इनके द्वारा प्राप्त किया गया पानी भी सही रहता है, बस इनकी सफाई का ध्यान जरूर रखें.



भोजन

खासकर बरसात के मौसम में महिला को अपने भोजन के प्रति काफी सजग रहने की आवश्यकता होती है. सबसे पहले गर्भवती महिला यह नियम बना ले कि उसे हर हाल में ताजा ही भोजन खाना है, अर्थात भोजन बनने के 1 घंटे के अंदर अंदर उसे भोजन ग्रहण कर लेना है.

उसके बाद का भोजन उसे बिल्कुल भी नहीं खाना है. यह नियम अपने आप में काफी सारी समस्याओं का समाधान है.

बाजार से लाई गई सब्जियों को अच्छे से धो कर ही बनाएं बाजार से लाए गए फलों को भी धोने में विशेष सावधानी रखनी चाहिए. क्योंकि फल तो कच्चे ही खाए जाते हैं, और सब्जी तो एक बार गर्म करके बनाई जाती है, तो उसकी शुद्धता वापस आ जाती है.

अब आप ने प्रण कर लिया है, कि आपको ताजा ही भोजन खाना है तो इसका सीधा सा मतलब है कि बाजार में मिलने वाला कोई भी भोजन आपको नहीं लेना है.

खासकर बरसात के मौसम में तो बिल्कुल नहीं लेना है. बाजार से मिलने वाला पैक्ड फूड भी काफी समय पहले बनकर तैयार हो जाता है. इसलिए उसकी पौष्टिकता तो समाप्त हो ही जाती है. वह तो लेना ही नहीं है चाहे वह कितना ही शुद्ध क्यों ना हो.

नालियों की बदबू

आपने देखा होगा कि अक्सर बरसात के मौसम में घर में खुलने वाली सिंक की या बाथरूम की जो भी नालियां होती हैं. उनमें से काफी गंध आती है.

यह सब संक्रमण को आमंत्रित करती हैं. इनकी सफाई करें. इसके लिए आप काफी गर्म पानी इनके अंदर छोड़ दें या फिर बाजार में नाली की सफाई में प्रयोग होने वाले केमिकल के द्वारा इन्हें साफ करवा ले.

त्वचा  का संक्रमण

बरसात के मौसम में वातावरण की नमी हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाने का कार्य करती है, और प्रेग्नेंसी के समय हार्मोन के कारण या उसके साइड इफेक्ट के रूप में हमारी त्वचा पर खुजलाहट की समस्या पहले से ही हो सकती है, और त्वचा खींचने से भी खुजलाहट की समस्या आती है, और नमी इस समस्या को काफी बढ़ा सकती है. तो अपनी त्वचा का विशेष ध्यान रखें. त्वचा का संक्रमण होने से अपने को बचाएं.

कीट पतंगों से संक्रमण

बरसात के मौसम में काफी कीट पतंगे आपके चारों और रहते हैं इसलिए आपको चाहिए कि आप संपूर्ण वस्त्र पहने और इस बात को भी सुनिश्चित करें कि आपके घर में बाहर से किसी भी प्रकार का कीट पतंगा प्रवेश नहीं कर पाए.
कीट पतंगों से बचने के लिए अक्सर बाजार में आने वाले काफी सारे प्रोडक्ट हैं, उनका प्रयोग किया जाता है.

खासकर मच्छरों के लिए, यह सब खतरनाक केमिकल के द्वारा बनाए जाते हैं, तो कोशिश करें कि गर्भावती  महिला अपने कमरे में इसका प्रयोग नहीं करें. इसके स्थान पर वह मच्छरदानी का प्रयोग करें तो ज्यादा अच्छा है.

आपने एक छोटी सी बात और देखी होगी या आगे नोट करना बरसात के मौसम में अगर आप अपने घर के फर्श को साफ करते हैं तो वह देर से सूखता है और दूसरे मौसम की अपेक्षाकृत वह थोड़ा सा ज्यादा चिकनाहट वाला भी होता है. गर्भवती स्त्री इस बात का थोड़ा ध्यान रखें कि उसे फर्श पर आराम से चलना चाहिए. क्योंकि अपना घर है और एक आदत भी होती है इसलिए ध्यान रखें.

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