प्रेगनेंसी में गर्भ संस्कार के नियमों का पालन कैसे करें

 गर्भ संस्कार एक संस्कृत का शब्द है. इसका शाब्दिक अर्थ है, गर्भकाल में शिक्षा.

एक गर्भस्थ शिशु को गर्भ में किस प्रकार से शिक्षित करना चाहिए. साथ ही साथ गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के विकास और शारीरिक विकास के संबंध में गर्भवती माता को शिक्षा, गर्भ संस्कार के अंतर्गत आता है.

किसी भी गर्भवती स्त्री को गर्भस्थ के स्वास्थ्य और मस्तिष्क विकास के संबंध में शिक्षा बड़ी आसानी से दी जा सकती है. लेकिन गर्भस्थ शिशु को शिक्षा देना अपने आप में काफी बड़ा कार्य होता है. इस विषय में गर्भ संस्कार के अंतर्गत काफी अच्छे से समझाया जाता है.

माना जाता है कि बच्चे के व्यक्तित्व का विकास माता के गर्भ से ही शुरू हो जाता है.  इसलिए माता को प्रेगनेंसी के दौरान काफी सावधान रहने की आवश्यकता होती है.

गर्भ संस्कार के अनुसार आपका गर्भस्थ शिशु संगीत और अन्य आवाजों पर प्रतिक्रिया देता है. उन पर विचार करता है. भावनाओं को पहचानने की कोशिश करता है. क्रिया प्रतिक्रिया करने में सक्षम रहता है.

 इसलिए हमेशा घर के बुजुर्ग इस बात पर जोर देते हैं, कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हमेशा सकारात्मक और तनाव मुक्त रहना अत्यधिक आवश्यक है.

गर्भ संस्कार कैसे करें

गर्भ संस्कार के अनुसार महिला किन बातों का ध्यान रखें

गर्भ काल में माता जितना खुश रहती है. जितने उसके विचार सकारात्मक रहते हैं. उतना ही शिशु के लिए अच्छा होता है.

गर्भ संस्कार अभ्यास गर्भस्थ बच्चे के पूर्ण विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बनाने में काफी मदद करता है.

गर्भ संस्कार का अभ्यास मां को भी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है, और गर्भ शिशु को भी मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने की प्रक्रिया है.

गर्भ संस्कार के अंतर्गत आपको कुछ कार्यों पर फोकस करना है.


  • माता को सॉफ्ट म्यूजिक सुनना चाहिए. खासकर बांसुरी की धुन वीणा इत्यादि अर्थात जो भारतीय शास्त्रीय संगीत में सॉफ्ट म्यूजिक प्रदान करते हैं. उन्हें सुनना श्रेष्ठ कर रहता है. आप चाहे तो हिंदी सिनेमा के गाने भी सुन सकती हैं जो सॉफ्ट म्यूजिक के साथ आते हैं खासकर पुराने गाने.

  • मेडिटेशन करना हमेशा प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है. गर्भस्थ शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है.

  • पॉजिटिव सोच और तनाव मुक्त रहना गर्भस्थ शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है गर्भ संस्कार की पहली शिक्षा ही यही है.

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को हमेशा रचनात्मक कार्यों में ध्यान देना चाहिए.

  • गर्भस्थ शिशु से हमेशा माता को अर्थपूर्ण बातें करनी चाहिए.

  • गर्भ संस्कार के अंदर महिला को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है इससे शिशु का विकास और महिला का स्वास्थ्य दोनों उत्तम रहते हैं.

  • प्रेगनेंसी में किए जाने वाले योगा भी महिला को अवश्य करने चाहिए. यह भी गर्भ संस्कार का एक हिस्सा है. साथ ही साथ महिला को सुबह या शाम के समय टहलने भी जाना चाहिए.


यह कुछ मुख्य बिंदु है जो गर्भ संस्कार के अंतर्गत आते हैं. इनके विषय में डिटेल जानकारी आपको किसी धर्म संस्कार एक्सपर्ट दिया पुस्तक के माध्यम से बड़ी आसानी से प्राप्त हो जाती है.

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गर्भस्थ माता गर्भ संस्कार कैसे करें

गर्भ संस्कार अपने आप में एक पूरा विज्ञान है. इसके अंदर धार्मिक, आध्यात्मिक, आयुर्वेदिक, स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक, भोजन विज्ञान इत्यादि का समावेश होता है.  इसमें कई प्रकार के एक्सपर्ट लोगों की आवश्यकता होती है.

गर्भ संस्कार का चलन भारतीय समाज से विलुप्त हो गया था. लेकिन आधुनिक विज्ञान के रूप में यह दोबारा से वापस आ रहा है. वर्तमान में इसके प्रोफेशनल आसानी से उपलब्ध नहीं है.

कोई भी ब्राह्मण धर्म के अनुसार घर में गर्भ संस्कार पूजा पाठ करता है.
एक मनोवैज्ञानिक अपने अनुसार गर्भ संस्कार को फॉलो करता है.
एक डॉक्टर आपके स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से गर्भ संस्कार को फॉलो करता है.

अगर आपके पास गर्भ संस्कार से संबंधित कोई एक्सपर्ट उपलब्ध है तो आप उनसे राय लेकर गर्भ संस्कार की क्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं.

गर्भ संस्कार विषय पर कई पुस्तकों की जानकारी


अन्यथा इसका एक काफी आसान उपाय यह भी है कि कई सारे एक्सपर्ट द्वारा गर्भ संस्कार की विधि को उस में किए जाने वाले कार्य को संकलित करके पुस्तक का रूप दे दिया गया है.

जिन पुस्तकों को आप अपनी भाषा में किसी भी बुक स्टोर से खरीद सकते हैं.

आप ऑनलाइन भी जाकर इस प्रकार की पुस्तकें खरीद सकते हैं.

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