प्रेगनेंसी के 25 वें सप्ताह | 25th week of pregnancy

 प्रेगनेंसी के 25 वें सप्ताह में हम शिशु के विकास और माता के शरीर में परिवर्तन

शिशु का विकास

प्रेगनेंसी के 25 हफ्ते तक शिशु का वजन 660 ग्राम हो जाता है, और उसकी लंबाई सिर से लेकर एंड तक अगर उसे नापा जाए तो 13.6 इंच उसकी माप होती है. अब उसका शरीर पतला दुबला और लंबा नजर आता है, और वह धीरे धीरे गोल मटोल होना शुरू हो जाता है.

क्योंकि अभी उसके शरीर में सलवटे हैं. धीरे-धीरे जब उसका मांस बढ़ेगा तो उसकी त्वचा में खिंचाव आना शुरू होगा . उसकी त्वचा के नीचे चर्बी आना शुरू हो जाएगी, तो वह उसके शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में उसकी काफी मदद करेगी.



शिशु की जो सिर की त्वचा है, उस पर बाल आपको नजर आएंगे. यह बाल झड़ते रहते हैं, और दोबारा आते रहते हैं. धीरे-धीरे इन कारण प्राकृतिक होता जा रहा है, अर्थात उसके बाल अब काले रंग के होने लगे हैं.

शिशु की ज्ञानेंद्रियों का निर्माण हो चुका है. अब वह धीरे-धीरे और विकसित हो रही है. अब तक आते-आते बच्चा अपने ज्ञानेंद्रियों को इतना ज्यादा विकसित कर लेता है, कि टॉर्च की रोशनी मारने पर वह प्रतिक्रिया दे सकता है. वह किसी तेज आवाज पर भी प्रतिक्रिया दे सकता है.

जैसे जैसे बच्चे की ज्ञानेंद्र विकसित होती जाएंगी वैसे वैसे माता और बच्चे के संबंध में प्रगाढ़ता बढ़ती जाएगी.

अब तक आते-आते  आपके शिशु की नासिका छिद्र पूरी तरह से खुल जाते हैं.

प्रेगनेंसी के 25 हफ्ते के दौरान महिला के लक्षण लगभग वही रहते हैं जो लक्षण 24 वें सप्ताह में महिला को नजर आ रहे थे.

साथ ही साथ महिला को थकावट की मात्रा में बढ़ोतरी नजर आएगी. क्योंकि बच्चा बढ़ रहा है. उसके लिए अधिक एनर्जी की आवश्यकता होती है, तो आपको थकावट नजर आ सकती है.

महिला के शरीर ने बच्चे को दूध पिलाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है. अब महिला के स्तन अपेक्षाकृत थोड़े बड़े होने लगेंगे. आपको हल्के-फुल्के व्यायाम और चहल कदमी करना इस दौरान काफी सही रहता है, और आपको अब सोने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए आप दिन में भी आराम करने की कोशिश करें सोने की कोशिश करें.

अब आपको मुलायम कपड़ों से या तकिए के माध्यम से अपने पेट को सहारा देने की आवश्यकता नजर आने लगती है.

सॉफ़्ट चीज़,  अनपाश्चुराइज्ड दूध, स्लाइस्ड कोल्ड मीट, शुशी और कच्चे मीट में लिस्टीरिया मौजूद रहता है, इसलिए इन चीज़ों को खाने से बचना और समझदारी से खाना बेहतर होगा .

सीने में जलन
जैसे–जैसे बच्चा बढ़ता है, वह पाचन तंत्र पर दबाव डालने लगता है, जिसकी वजह से अम्ल का स्तर ग्रासनली तक बढ़ने लगता है, जिससे छाती और गले में जलन महसूस होती है.

तले हुए और मसालेदार भोजन से परहेज, विशेष रूप से रात के खाने में, इस समस्या से बचने और छाती की जलन को दूर रखने में आपकी मदद कर सकता हैं.

कब्ज़ और बवासीर
यह एक आम स्थिति है जिससे अब आप परेशान होंगी, इसलिए कब्ज़ से बचने और अपने पाचन तंत्र को सही रखने हेतु पर्याप्त पानी पिएं, व्यायाम करें, और आहार मे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें. चूंकि शिशु पाचन तंत्र पर दबाव डालता है इसलिए दूसरी तिमाही के दौरान बवासीर काफी आम है.

25वें सप्ताह में, भ्रूण की हलचल अधिक स्पष्ट हो जाती है. आपका बच्चा जब पैर नही मारता है तो इसका मतलब वह सो रहा है इसलिए इसके बारे में चिंता न करें. यदि आप आश्वस्त होना चाहती हैं कि अंदर सब ठीक है, तो संगीत सुनें या हल्की मालिश करा लें, और देखते ही देखते आपको बच्चे का पैर मारना महसूस होने लगेगा.


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