यशद भस्म क्या है आयुर्वेद में इसके क्या फायदे हैं

0
266

यशद भस्म दो शब्दों से मिलकर बना है, यशद+भस्म.
यशद को जस्ता भी कहा जाता है, जिसे इंग्लिश में जिंक (Znic) नाम से जाना जाता है. जिंक मनुष्य के शरीर के लिए एक आवश्यक तत्व है इसकी कमी से शरीर में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है मुख्य रूप से यह पुरुष प्रजनन तंत्र के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक होता है.

भस्म का अर्थ होता है राख अर्थात जलने के बाद जो पदार्थ प्राप्त होता है उसे राख कहा जाता है.
यशद भस्म का अर्थ है जिंक की राख.

जिंक को कई आयुर्वेदिक विधियों से गुजारने के बाद और एक निश्चित तापमान पर गर्म करके जस्ते को स्वास्थ्यवर्धक भस्म में परिवर्तित किया जाता है. जिसे हम यशद भस्म के नाम से जानते हैं.
यशद भस्म का रासायनिक नाम जिंक ऑक्साइड है.

लैब में तैयार की गई जिंक ऑक्साइड और प्राचीन आयुर्वेदिक विधियों द्वारा तैयार किया गया जिंक ऑक्साइड अर्थात यशद भस्म, दोनों के गुणों में काफी अंतर होता है.

यशद भस्म को आयुर्वेदिक तरीके से तैयार करने के लिए गोमूत्र, गो दुग्ध, विशेष प्रकार की मिट्टियां और नीम इत्यादि की आवश्यकता पड़ती है. तब जाकर यह अपने औषधीय गुण प्रकट करती है. हालांकि आज के समय यशद भस्म को तैयार करने की कई सारी विधियां मौजूद है, इन विधियों से तैयार की गई  यशद भस्म कई प्रकार के औषधीय गुण रखती हैं.

यशद भस्म के फायदे

  • यशद भस्म की तासीर ठंडी होती है, और यह पित्त नाशक मानी जाती है. यह शरीर की गर्मी को शांत करने का कार्य करती है.
  • यशद भस्म वीर्य वर्धक मानी जाती है.
  • मस्तिष्क को शांत करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है.
  • यह शारीरिक बल को बढ़ाने के लिए बहुत कारगर है.
  • यह पांडु रोग (पीलिया) को दूर करती है.
  • रात को बहुत अधिक पसीना आने की समस्या में यह बहुत कारगर है.
  • यह मूत्र संबंधी रोगों में काफी लाभदायक मानी जाती है.
  • यह पुराने से पुराने बुखार को समाप्त करने का कार्य करती है.
  • यह बात शामक मानी जाती है वायु का शमन करती है
  • टीवी की प्रारंभिक अवस्था में, गले की ग्रंथि की सूजन में या गले की पुरानी सूजन में यह बहुत लाभदायक होती है.
  • मल मूत्र और प्रजनन अंगों से संबंधित समस्याओं में काफी लाभदायक है.
  • दस्त की विभिन्न अवस्थाओं में यह काफी लाभदायक है.
  • स्पर्म की कमी में यह लाभदायक है
  • घाव नहीं भर पाने की समस्या में इसका प्रयोग किया जाता है
  • शीतपित्त में यह लाभदायक है
  • मुंह में जलन, स्वाद का बदल जाना, भूख नहीं लगना इत्यादि समस्या में अच्छा रिजल्ट देती है.
  • प्रोटेस्ट की सूजन, प्रोटेस्ट का बढ़ जाना इसमें यह लाभदायक है.
  • स्तंभन दोष दूर करती है.
  • नपुंसकता दूर करती है.
  • कमजोरी को दूर करती है.
  • बार बार जुकाम हो जाने पर इसका प्रयोग किया जाता है.
  • यह कफ एवं पित्त शामक है.

———
यशद भस्म को अकेले और दूसरी जड़ी बूटियों के संयोजन के साथ भी लिया जाता है, और भी कई दूसरे प्रकार की शारीरिक समस्याओं में यशद भस्म को दूसरी जड़ी बूटियों के साथ भी मिलाकर प्रयोग किया जाता है, और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जाता है.
जैसे कि —

  •  नेत्र की कमजोरी में पुराने घी के साथ इसका सेवन किया जाता है.
  • टीवी रोग में प्रवाल पिष्टी के साथ इसे लेना लाभ कर होता है.
  • दालचीनी के साथ लेने पर त्रिदोष समाप्त होता है.
  • यौन समस्याओं में कौंच के बीज के साथ इसका प्रयोग किया जाता है.
  • गले की खराश और सूजन में इसका प्रयोग प्रवाल पिष्टी सितोपलादि चूर्ण या तुलसी इत्यादि के साथ किया जाता है.
  • पेट में जलन हो तो इसके लिए जामुन की गुठली का चूर्ण और शहद के साथ इसका प्रयोग करते हैं.
  • मूत्र विकारों में गोखरू चूर्ण के साथ इसका प्रयोग लाभदायक रहता है.
  • ऐसे ही अनगिनत समस्याओं में अनगिनत जड़ी बूटियों के साथ इसका सेवन करते हैं.
यशद भस्म क्या है आयुर्वेद में इसके क्या फायदे हैं

यशद भस्म लेने की विधि और मात्रा

आप यशद भस्म रोजाना एक चम्मच शहद में मिलाकर ले सकते हैं .
सामान्य अवस्था में यशद भस्म को 40 मिलीग्राम प्रतिदिन से अधिक नहीं लेना चाहिए. 40 मिलीग्राम यशद भस्म को दो हिस्सों में बांट कर सुबह और शाम खाना खाने के 40 मिनट के बाद आप ले सकते हैं. यह आपके लिए सबसे उचित समय और मात्रा होती है.

आपके स्वास्थ्य समस्या अनुसार डॉक्टर की सलाह पर आप 1 दिन में 60 मिलीग्राम से लेकर 250 मिलीग्राम तक यशद भस्म अपनी खुराक में रोजाना शामिल कर सकते हैं.

40 मिलीग्राम रोजाना आप 21 दिन तक शहद में मिलाकर ले सकते हैं. उसके बाद आप एक हफ्ता छोड़कर फिर 21 दिन इसका प्रयोग करें . अगर आपको स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो जाता है तो उसके बाद इसे आप बीच में भी लेना छोड़ सकते हैं.
ध्यान रहे 1 ग्राम में 1000 मिलीग्राम होते हैं.

FEATURED

30+नेचुरल स्पर्म बूस्टर
(टेस्टोस्टरॉन)

  • आयुर्वेदिक
  • जड़ी बूटियों से निर्मित
  • ब्रांडेड
  • कस्टमर रिव्यूज
  • बजट में (नो एक्स्ट्रा कॉस्ट)

यशद भस्म के साइड इफेक्ट

यशद भस्म के स्वास्थ्य लाभ अनगिनत होते हैं. लेकिन यह अनियमित तरीके से लेने पर आपको काफी नुकसान भी पहुंचा सकती है.
यशद भस्म अधिक समय तक लगातार लेना भी काफी नुकसानदायक होता है. इसलिए अधिक मात्रा और अधिक दिनों तक लगातार लेने से पहले आयुर्वेदाचार्य से सलाह अवश्य करें.
इस औषधि को बच्चों की पहुंच से काफी दूर रखना चाहिए
बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसे नहीं देना चाहिए डॉक्टर की देखरेख में ही इसका प्रयोग करना उचित रहता है.
अधिक मात्रा में लेने पर या लंबे समय तक इसे लेने पर इसके सारे फायदे नुकसान में बदल सकते हैं, जैसे कि —

  • शरीर में खून की कमी हो सकती है
  • ब्लड में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो सकती है
  • इनफिनिटी की समस्या सकती है
  • शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है
  • थकावट की समस्या नजर आ सकती है
  • प्रोटेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है
  • शरीर में कॉपर की कमी हो जाती है.
  • जी मिचलाना
  • मुंह के स्वाद का बदल
  • जाना पेट में दर्द होना
  • किडनी पर प्रभाव आ जाना.

इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं.

निष्कर्ष

यशद भस्म एक तत्वों से निर्मित औषधि है. जिसके अनगिनत फायदे होते हैं, लेकिन इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अत्यधिक आवश्यक होता है.

किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही इसका प्रयोग करना उचित रहता है. स्वयं की सलाह पर इसे 21 दिन से अधिक नहीं लें और इसकी मात्रा 40 मिलीग्राम से अधिक 1 दिन में नहीं होनी चाहिए.

स्वयं की सलाह पर अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से और अधिक दिनों तक लगातार इसका प्रयोग करना नुकसानदायक हो सकता है. फायदे की जगह आपको नुकसान हो सकता है.

 

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें