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पल्स विधि द्वारा जेंडर प्रिडिक्शन - Gender prediction pregnancy Symptoms pulse Method

हम आपसे यह पल्स विधि के बारे में चर्चा करने वाले हैं, जो काफी हद तक वैलिड मानी जाती है. इसकी सहायता से हम आने वाले बच्चे के जेंडर को  जान सकते हैं . दोस्तों खासकर हिंदुस्तान के अंदर जब कोई नया मेहमान घर आने वाला होता है. तो हम उसके जेंडर को लेकर बहुत ही ज्यादा उत्सुक होते हैं. इसी कड़ी में हम आपको पल्स विधि द्वारा कैसे जेंडर जाना जाए इस संबंध में चर्चा करेंगे.



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दोस्तो जब एक नन्हा मेहमान महिला के गर्भ में आता है तो महिला के शरीर पर एक नई जिम्मेदारी आ जाती है उसे अपने साथ-साथ उस बच्चे का भी पालन करना होता है, जब शरीर पर एक नई जिम्मेदारी आ जाती है.
 
गर्भधारण के बाद कार्डियोवैस्कुलर प्रणाली में बहुत सारे बदलाव होते हैं. गर्भावस्था के कारण बॉडी को अधिक एनर्जी की आवश्यकता होती है. महिला को अधिक खाना पड़ता है, अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जिसके कारण रक्त परिसंचरण की गति बढ़ जाती है.

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यह काफी प्राचीन तरीका है, और चाइना में से काफी सटीक माना जाता है. जब महिला का गर्भ 3 महीने का हो जाता है, तो उसके बाद महिला के दोनों हाथों की  पल्स चेक की जाती है.अगर बाएं हाथ की पल्स बहुत ज्यादा फिसल रही हो और साथ में तेज गति से फुदक भी रही है, साथ ही साथ  दाहिने हाथ की नब्ज नॉर्मल हो तो यह माना जाता है कि महिला को लड़का पैदा होगा.



 अगर दाहिने हाथ की पल्स बहुत ज्यादा फिसल रही हो और तेज गति से फुदक भी रही है, साथ ही साथ  बाएं हाथ की नब्ज नॉर्मल हो तो यह माना जाता है कि महिला को लड़की पैदा होगी |

Note : बस ध्यान रखें कि किसी बीमारी की वजह से महिला की पल्स तेज ना हो




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