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प्रेगनेंसी में जेंडर प्रेडिक्शन की 5 ट्रिक्स - Gender Prediction Tricks

हम आपके सामने जेंडर प्रेडिक्शन ट्रिक्स लेकर आए हैं. यह तरीके दुनिया भर में प्रयोग में लाए जाते हैं.  इन्हें जेंडर प्रेडिक्शन की funny tricks भी बोला जाता है. 
 
दोस्तों चर्चा करते हैं, कि समाज में कौन-कौन से अजब गजब तरीकों से जेंडर प्रिडिक्शन किया जाता है.




दोस्तों जेंडर प्रेडिक्शन के तरीकों पर चर्चा कर लेते हैं.

महिला के महीने के जन्म से जेंडर प्रिडिक्शन

  • अगर महिला जिस भी महीने जन्मी हो अगर प्रेग्नेंसी भी उसी महीने में हो जाती है, तो महिला के गर्भ में पुत्र होता है. एग्जांपल के लिए आपको बता देते हैं. अगर महिला का जन्म जनवरी महा में हुआ है, और प्रेगनेंसी भी जनवरी माह में हो गई है, तो महिला के गर्भ में बेटा होगा.

महिला की शादी की अंगूठी से जेंडर प्रिडिक्शन

  • अपनी शादी (या किसी अन्य) की अंगूठी को उतारें और इसे स्ट्रिंग या बालों के टुकड़े से बांधें। अपनी पीठ के बल लेटते हुए अपने पेट के ऊपर रिंग को लटकायें और देखें कि यह किस तरह से झूलता है. यदि रिंग आगे और पीछे (पेंडुलम की तरह) घूमती है, तो यह एक लड़का है। यदि रिंग एक गोलाकार गति में घूमती है, तो यह एक लड़की है.

महिला के नैपकिन उठाने के तरीके से जेंडर प्रिडिक्शन

  • खाना खाते समय महिला के सामने एक नैपकिन रखा होना चाहिए महिला अगर नैपकिन को किनारे से पकड़कर उठाती है तो महिला के गर्भ में एक लड़का होगा अगर महिला नैपकिन को बीच में से, ऊपर से पकड़कर उठाती है तो उसे एक लड़की पैदा होगी.

गर्भधारण के समय से जेंडर प्रिडिक्शन

  • संयुक्त राज्य के कुछ हिस्सों में, लोगों का मानना है कि यदि आप आधी रात के बाद गर्भ धारण करते हैं तो यह एक लड़की होगी, जबकि अमावस्या के दौरान प्यार करने का मतलब है कि आपके पास एक लड़का होगा.

गर्भवती महिला और छोटे बच्चे के द्वारा जेंडर प्रिडिक्शन

  • अगर प्रेग्नेंसी के समय घर के आसपास कोई ऐसा बच्चा है या परिवार में कोई ऐसा बच्चा है छोटा सा जो आपको पसंद करता है अगर वह लड़का है तो आपको लड़की अगर वह लड़की है तो आपको लड़का होगा. अगर गर्भवती महिला के पति का वजन बढ़ता है तो गर्भ में बेटा होने की निशानी माना जाता है.



दोस्तों महिला के शरीर में आने वाले लक्षणों को देखकर हम शायद इस बात का पता लगाने की महिला के घर में कौन सी संतान है लेकिन दोस्तों यह भी उतना ही जरूरी है कि हमें उसके स्वास्थ्य का संपूर्ण ध्यान रखना है, उसके पोषण का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है.  


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