दूसरी बार मां बनने में आने वाली समस्याएं

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कई बार दंपत्ति पहली बार प्रेगनेंसी के लिए कोशिश करते हैं, तो उन्हें प्रेगनेंसी बड़ी आसानी से हो जाती है. और उसके 3 से 4 साल बाद जब दूसरे बच्चे के लिए कोशिश करते हैं, तो उन्हें प्रेगनेंसी नहीं हो रही होती है.

दंपत्ति जानते हैं कि किसी भी प्रकार की कोई कमी उनके अंदर नहीं है, लेकिन उसके बाद भी प्रेगनेंसी नहीं हो रही है. इस बात को लेकर वह काफी परेशान रहते हैं.

दूसरी बार प्रेगनेंसी नहीं होने के पीछे कुछ सामान्य से कारण हो सकते हैं. आज उन कारणों को लेकर चर्चा कर रहे हैं, ताकि आप उन समस्याओं को दूर करके दोबारा प्रेगनेंसी को हासिल कर सके.
दूसरी प्रेगनेंसी नहीं होने के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार से हैं.

दूसरी बार मां बनने में आने वाली समस्याएं

दंपत्ति की उम्र

आजकल कैरियर बनाने के चक्कर में युवा काफी देर से शादी करते हैं, और 27 से 28 साल की उम्र में शादी होने की वजह से दूसरे बच्चे के लिए उनके पास समय लगभग 35 साल के आसपास मिलता है. ऐसे में महिला और पुरुष दोनों के शरीर प्रेगनेंसी के नजरिए से थोड़ा सा कमजोर माने जाते हैं.

महिला की प्रेगनेंसी की उम्र 20 वर्ष से लेकर 30 वर्ष तक सबसे अच्छी मानी जाती है और जैसे-जैसे पुरुष की उम्र बड़ी होती जाती है ,वैसे वैसे उसके सीमन में शुक्राणुओं की संख्या या स्पर्म काउंट कम होता जाता है.

डॉ. का भी मानना है कि बड़ी उम्र में कंसीव करने में दंपत्ति को समस्या का सामना करना पड़ता है.

इनफर्टिलिटी

महिला की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है. पुरुष की उम्र भी जैसे-जैसे बढ़ती जाती है वैसे वैसे उनकी फर्टिलिटी की कैपेसिटी भी कमजोर होती जाती है, और बड़ी उम्र में कंसीव करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. इसलिए अक्सर दूसरी प्रेगनेंसी में दंपत्ति को काफी संघर्ष करना पड़ता है.

मोटापा

अक्सर देखा जाता है, कि पहली प्रेग्नेंसी के बाद महिलाएं मोटी होने लगती हैं, या फिर अगर पहली प्रेग्नेंसी के दौरान ऑपरेशन हो जाता है, तो उसके बाद महिलाएं वेट गेन कर लेती हैं. अधिक वजन होने की वजह से भी प्रेगनेंसी में दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

हारमोंस का बैलेंस नहीं होना

कई बार दूसरी प्रेगनेंसी इसलिए नहीं हो रही होती है, कि महिलाओं के हारमोंस का बैलेंस बिगड़ जाता है. इस वजह से भी प्रेगनेंसी होने में दिक्कत आती है.

अंडे की क्वालिटी कमजोर  पड़ना

किसी भी महिला को गर्भवती होने के लिए उसके अंडों की क्वालिटी का सही होना अत्यधिक आवश्यक होता है जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है. वैसे वैसे महिला के शरीर में अंडों की कमी भी होने लगती है और अंडे की क्वालिटी भी उम्र के साथ-साथ कमजोर पड़ने लगती है. ऐसे में महिला या तो गर्भवती नहीं हो पाती है और अगर गर्भवती हो भी जाती है तो मिसकैरेज की संभावना बहुत ज्यादा बन जाती है.

पहली प्रेग्नेंसी की वजह से डैमेज

कभी-कभी पहली प्रेग्नेंसी की वजह से अनजाने में ही प्रजनन तंत्र को नुकसान हो जाता है उसके टिशु को नुकसान हो जाता है जिसकी वजह से प्रजनन तंत्र कमजोर हो जाता है और दूसरी प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है.

उम्र के साथ-साथ रोगों का लगना

जैसे-जैसे दंपत्ति की उम्र बढ़ती है. वैसे-वैसे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती जाती है. और बिजी लाइफ स्टाइल की वजह से वह अपने भोजन पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं. अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाते हैं. ऐसे में शरीर रोगी हो जाता है, और प्रेगनेंसी जैसे बड़े कार्य को संपन्न कर पाने में सक्षम नहीं हो पाता है और इस वजह से भी प्रेगनेंसी नहीं होती है अगर वह भी जाती है तो मिसकैरेज हो जाता है.

सेहत का ध्यान नहीं रख पाना

एक बच्चा होने के बाद संपत्ति की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. माता की अपनी अलग जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं. पिता की अपनी अलग जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, बच्चे के ऊपर माता का संपूर्ण फोकस होता है. ऐसे में माता अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाती है.

इधर परिवार की जिम्मेदारी बढ़ जाने की वजह से और ऑफिस में भी या अपने बिजनेस में भी कार्य बढ़ जाने की वजह से पति भी अपनी सेहत की तरफ ध्यान नहीं दे पाते हैं. यह भी एक मुख्य कारण सेकंड प्रेगनेंसी नहीं होने का होता है. इसे हम समझ ही नहीं पाते हैं.

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