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20 हफ्ते की प्रेगनेंसी | Fetus Development and Lakshan

 हम आपसे प्रेगनेंसी के 20वें हफ्ते को लेकर चर्चा करने जा रहे हैं.
20 हफ्ते में शिशु का विकास कितना हो जाता है, उसकी लंबाई चौड़ाई और वजन कितना होता है, और दूसरे कौन-कौन से परिवर्तन शिशु में होते हैं. महिलाओं को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. महिला के शरीर में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं. इन सब बातों को लेकर चर्चा कर रहे हैं



20 हफ्ते में शिशु का विकास

अब आपने प्रेगनेंसी के 19 सप्ताह सफलतापूर्वक पार कर लिए हैं, और आप 20 सप्ताह की प्रेग्नेंसी में प्रवेश कर गई हैं. आपको जानकर अत्यधिक खुशी होगी कि आपने प्रेगनेंसी का आधा सफर सफलतापूर्वक पार कर लिया है. बल्कि कहे तो आपने आगे से थोड़ा सा ज्यादा सफर पार कर लिया है.

अब तक आप के शिशु का वजन 300 ग्राम के आसपास हो गया है. यह एक केले जितना लंबा है, और इसकी लंबाई 10 इंच हो गई है. इसे आप 25.6 सेंटीमीटर लंबा मान सकते हैं.

 


20 हफ्ते में शिशु का शारीरिक परिवर्तन

आपका शिशु काफी बड़ा हो गया है.  वह हिलने डुलने और लात मारने में काफी व्यस्त रहता है. हालांकि कुछ महिलाओं को अभी भी अपनी शिशु की पहली हलचल का इंतजार रहता है. अर्थात हलचल महसूस होने का इंतजार रहता है. क्योंकि शिशु तो कई हफ्तों पहले से ही हलचल शुरू कर देता है.

 आपका शिशु दिन प्रतिदिन काफी क्रियाशील होता जा रहा है. इसलिए उसकी हलचल धीरे-धीरे बढ़ती रहेगी.

आपके एनॉमली स्कैन के दौरान, जो कि 18 से 20 सप्ताह के बीच होगा, अल्ट्रासाउंड में डॉक्टर शिशु की सिर से लेकर नीचे तक की माप लेने की कोशिश करेंगे, लेकिन यह लेना पड़ा मुश्किल होगा क्योंकि शिशु क्रियाशील है और वह सही तरीके से माप लेने ही नहीं देता है.

 लेकिन इस अल्ट्रासाउंड के द्वारा बच्चे के विकास की संपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी और बच्चे के जन्म के समय का अनुमान लगाया जाएगा.  अगर इसमें किसी भी प्रकार की असमानता नजर आएगी तो उसके लिए उपचार किया जाए जाएगा.

 वर्निक्स कैसिओसा नामक चिकने और वसायुक्त तत्व की सफेद परत आपके शिशु को ढकने लगी होगी. यह मॉइस्चराइजर और चिकनाई के तौर पर काम करता है, जो कि एमनियोटिक द्रव में शिशु की नाजुक त्वचा को रुखा होने से बचाने में मदद करता है.

 

प्रेगनेंसी के 20वें हफ्ते में महिला को लक्षण


अब आप एक बात महसूस करने लगेंगे जब आप सीढ़ियां चलेंगे तो आपको सांस फूलने की समस्या नजर आएगी.
स्वसन हीनता प्रेगनेंसी में हो जाना एक सामान्य बात है. क्योंकि गर्भाशय के कारण फेफड़ों को भी फूलने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलता है. इस वजह से इस प्रकार की समस्या नजर आना नॉर्मल है.

आपको ऑक्सीजन की कमी की पूर्ति के लिए गहरी सांस लेने की आवश्यकता पड़ रही है. इसलिए आपको लगता है, स्वसन हीनता की समस्या है.

असल में जो महिलाएं कम लंबाई की होती है उन्हें इस प्रकार की समस्या ज्यादा क्योंकि उनके शरीर के अंदर प्रेगनेंसी का दबाव ज्यादा होता है.

 अब तक महिला का वजन 6 से 7 किलो तक बढ़ जाता है, और हर हफ्ते महिला का वजन आधा किलो बढ़ता जाता है. इसके कारण आपको कुछ समस्याएं बढ़ने भी लगेगी जैसे की बदहजमी ,छाती में जलन, खुजली, मूत्र त्यागने में समस्या, बार-बार मूत्र त्यागना, कब्ज इत्यादि.

 

आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि ----

  • आपका वजन बढ़ने से आपके शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदल रहा है, इस वजह से कभी-कभी बैलेंस बिगड़ सकता है. ध्यान रखें.


  • आपकी कमर और पेट पर लगातार चर्बी बढ़ती जा रही है. ढीले ढाले वस्त्र पहने.


  • नसों में ब्लड प्रवाह अधिक होने के कारण सूजन की समस्या नजर आ सकती है.


  • सूरज की रोशनी में कम ही निकले क्योंकि इस दौरान आपकी त्वचा काफी सेंसिटिव हो गई है.


  • आप अपने पेट को संभालने के लिए बेल्ट का इस्तेमाल कर सकती हैं.


  • आपको अचानक से उठना नहीं है, बैठना नहीं है, चलाना नहीं है चक्कर आने की संभावना रहती है.


  • पीठ में ऐंठन और दर्द की समस्या हो सकती है इसलिए मसाज गुनगुने पानी से नहाना, अपने फिजियोथैरेपिस्ट से कंसल्ट करना जरूरी होता है.


  • अब आपको धीरे-धीरे मल त्यागने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा.

आप अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखें खुश रहें स्वस्थ रहें .

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