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गर्भावस्था के दौरान प्रीमेच्योर डिलीवरी के कारण | Cause of premature delivery during pregnancy

गर्भावस्था में किसी भी महिला को बहुत बड़ा त्याग करना पड़ता है और ऐसे में अगर प्रीमेच्योर डिलीवरी हो जाती है तो उसकी मेहनत काफी हद तक खराब होने का डर रहता है.

आज हम अपने इस वीडियो के माध्यम से चर्चा करने वाले हैं

प्रीमेच्योर डिलीवरी होने का क्या मतलब होता है.
प्रीमैच्योर डिलीवरी होना कितना आम है.
समय से पहले प्रसव होने के क्या कारण हो सकते हैं.


इस पर भी चर्चा करेंगे

दोस्तों किसी भी गर्भवती स्त्री के लिए गर्भावस्था का समय खुशियों भरा होता है. लेकिन कुछ गर्भवती महिलाओं को जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है. यह जटिलताएं महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव शारीरिक बदलाव उसके मानसिक स्थिति की वजह से हो सकता है. उनमें से ही एक समस्या प्रीमेच्योर डिलीवरी , मतलब समय से पहले प्रसव का होना, बच्चे का जन्म समय से पहले हो जाना. कभी-कभी क्या होता है कि जब बच्चे का जन्म समय से काफी पहले हो जाता है, तो बच्चा पूर्ण रूप से विकसित नहीं होता है और वह अपने आप को इस दुनिया में जीवित रखने के लिए काफी संघर्ष करता है यह काफी कठिन होती है.

किसी भी महिला की गर्भावस्था 40 हफ्तों की होती है. लेकिन शिशु महिला के शरीर में 37 हफ्ते में ही अपने आप को पूर्ण रूप से विकसित कर लेता है. उसके बाद वह कभी भी जन्म ले सकता है. 37 हफ्ते के बाद में अपने आप को मजबूत कर रहा होता है और 40 हफ्ते के आसपास का जन्म हो जाता है. थोड़ा सा ऊपर या नीचे यह नॉर्मल डिलीवरी समय माना जाता है. अगर शिशु 37 हफ्ते से पहले ही जन्म ले लेता है तो इसे प्रीमेच्योर डिलीवरी माना जाता है.

प्रीमेच्योर डिलीवरी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है पहली है

Cause of premature delivery during pregnancy

एक्सट्रीमली प्रीमेच्योर डिलीवरी

मॉडरैटली प्रीमैच्योर डिलीवरी

लेट प्रीमेच्योर डिलीवरी



जब शिशु का जन्म गर्भावस्था में काफी पहले हो जाता है लगभग 23 वें से 28 वें हफ्ते के बीच में तो इसे एक्सट्रीमली प्रीमेच्योर डिलीवरी बोला जाता है.
अगर शिशु का जन्म उसके बाद 29 वें हफ्ते से लेकर के 33 वें हफ्ते के बीच में होता है तो उसे मॉडरेटली प्रीमेच्योर डिलीवरी माना जाता है.
और 34 वें से 37 वें हफ्ते के बीच अगर शिशु का जन्म होता है तो इसे लेट प्रीमेच्योर डिलीवरी बोला जाता है.

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प्रीमेच्योर डिलीवरी कितना सामान्य है


विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सर्वे के अनुसार दुनिया में जितने बच्चे जन्म लेते हैं उनमें से डेढ़ करो बच्चों का जन्म प्रीमेच्योर होता है लगभग 10 में से एक बच्चा बल्कि उससे ज्यादा ही प्रीमेच्योर होते हैं भारत में भी लगभग 3500000 शिशु प्रीमेच्योर होते हैं यह आंकड़ा प्रतिवर्ष का है.

प्रीमेच्योर बर्थ का कारण


कभी सारे कारण हो सकते हैं, जिससे कि प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा रहता है. कुछ तो मेडिकल कारण होते हैं जिनके कारण प्रीमेच्योर डिलीवरी हो सकती है जैसे कि

अगर किसी गर्भवती स्त्री को मधुमेह की समस्या गर्भावस्था के दौरान बढ़ जाती है तो प्रीमेच्योर डिलीवरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

अत्यधिक उच्च रक्तचाप हो जाने पर भी प्रीमेच्योर डिलीवरी हो सकती है.

अगर महिला का भोजन उचित पोषक तत्वों से भरपूर नहीं होता है, जो कि प्रेगनेंसी के दौरान आवश्यक होते हैं. तब भी प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा काफी ज्यादा रहता है. जैसे कि महिला अपने भोजन में कैल्शियम आवश्यक मात्रा में नहीं दे रही है तो शिशु के बेसिक स्ट्रक्चर का निर्माण भी ठीक तरीके से नहीं होगा, तो शरीर ऐसी गर्भ अवस्था को अपने आप ही आगे ले जाना पसंद नहीं करता है क्योंकि बच्चा स्वस्थ नहीं है तो प्रीमेच्योर डिलीवरी होने का खतरा रहता है.

किसी भी महिला के लिए गर्भावस्था का एक आदर्श समय होता  है. जिस वक्त वह गर्भावस्था के लिए तैयार होती है. अगर महिला की उम्र 18 साल से कम या 30, 35 साल से ऊपर हो जाती है तो भी प्रीमेच्योर डिलीवरी होने के चांसेस बढ़ जाते हैं .

अगर महिला के गर्भ में 1 से ज्यादा  भ्रूण पल रहे होते हैं तब भी प्रीमेच्योर डिलीवरी की संभावना काफी ज्यादा होती है.

अगर महिला को गर्भ अवस्था के दौरान किसी प्रकार का संक्रमण या इंफेक्शन हो जाता है उसके कारण भी प्रीमेच्योर डिलीवरी की संभावना काफी ज्यादा होती है जैसे कि यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन इत्यादि.

अगर महिला को किसी कारणवश गर्भपात की समस्या रहती है तो भी काफी ज्यादा चांस होते हैं कि प्रीमेच्योर डिलीवरी हो जाए.

कभी-कभी अनुवांशिकी कारणों से भी प्रीमेच्योर डिलीवरी होने का डर रहता है जैसे कि उसके माता के घर में पहले से ही इस तरह की समस्या देखने में आए.

कुछ गर्भपात महिलाओं को उनकी अपनी जीवनशैली के कारण भी हो सकते हैं जैसे कि ---

महिला अधिक मोटापे का शिकार रहती है तो देखा गया है कि इस प्रकार की महिलाओं को प्रीमेच्योर डिलीवरी की समस्या काफी देखने में आती है

अगर महिला धूम्रपान करती है शराब का सेवन लगातार बंसी के दौरान कर रही है तब भी प्रीमेच्योर डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है

महिला किसी प्रकार की ड्रग्स का इस्तेमाल करती है, उसके कारण भी प्रीमेच्योर डिलीवरी हो सकती है

स्ट्रेस एक ऐसी समस्या है जिसके कारण प्रीमेच्योर डिलीवरी होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है होता क्या है कि स्ट्रेस होने पर हमारा मस्तिष्क बहुत ज्यादा एनर्जी को कंज्यूम करता है, प्रयोग करता है. जब सारी एनर्जी  दिमाग ही खर्च कर लेगा तो बच्चे के विकास के लिए क्या इनर्जी बचेगी.

दूसरी बात दिमाग स्ट्रेस के कारण शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान नहीं दे पाता है जो कि शिशु के लिए अत्यधिक आवश्यक होती है बच्चे का विकास सही तरीके से नहीं हो पाता और प्रीमेच्योर डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है.

अगर महिला अपनी शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान नहीं देती है ,  ऐसे एक्शन करती रहती है, जो कि गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदायक होते हैं तो भी वह प्रीमेच्योर डिलीवरी का शिकार हो सकती है.

अगर महिला का भोजन संतुलित नहीं होता है, महिला ज्यादा तीखा खाती है, फास्ट फूड पर डिपेंड रहती है, समय पर खाना नहीं खाती है, तो भी शरीर को पूर्ण रूप से पोषण नहीं मिल पाता है. फल स्वरुप प्रीमेच्योर डिलीवरी की समस्या हो सकती है.

अगर महिला आवश्यकता से ज्यादा समय खड़ा होकर बिताती है तब भी प्रीमेच्योर डिलीवरी की तरफ वह बढ़ती है.
अगर किसी कारणवश गर्भावस्था के दौरान महिला को अत्यधिक रक्षराब की समस्या हो जाती है, प्रीमेच्योर डिलीवरी हो सकती है.


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