बच्चे के दिमाग का विकास कैसे करें

 हर एक माता-पिता की इच्छा होती है कि उसका बच्चा तेज दिमाग हो, उसके मस्तिष्क की शक्ति अच्छी होनी चाहिए, ताकि वह अपने जीवन में मजबूती के साथ आगे बढ़ सके. हर एक माता-पिता को ऐसा ही चाहना चाहिए और उसके लिए कार्य भी करना चाहिए.

बच्चे के मस्तिष्क को तेज करने के लिए कुछ घरेलू उपाय हमारे आयुर्वेद के द्वारा दिए गए हैं. जिसमें अपनी घरेलू खाद्य पदार्थों के द्वारा बच्चे के मस्तिष्क की शक्ति को कैसे टारगेट किया जाए. आज हम आपसे कुछ उपायों पर चर्चा कर रहे हैं.



आपका बच्चा अभी बहुत छोटा है, तो इसके लिए आपको कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना है, जो आप के शिशु के मस्तिष्क के विकास का आधार बनेगी. यह बातें देखने में तो बड़ी साधारण सी लगती है, लेकिन इनका बड़ा ही असाधारण प्रभाव पड़ता है.

बच्चे से प्रेम पूर्वक बात करें

हालांकि हर व्यक्ति को हर एक दूसरे व्यक्ति से प्रेम पूर्वक की बातें करनी चाहिए, लेकिन यह बात छोटे बच्चों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है, जो बच्चे 10 साल से छोटे होते हैं और जो बच्चे लगभग 6 महीने के हो चुके होते हैं. इस बीच में तो बच्चों से प्रेम पूर्वक बात करना काफी आवश्यक माना जाता है.

बच्चा रोए लेकिन अधिक नहीं रोए

माना जाता है कि छोटे बच्चे को रोने देना चाहिए इससे उसके फेफड़े मजबूत होते हैं. अगर यह बात काफी हद तक सही भी है तो यह बात भी काफी हद तक सही है कि इससे बच्चे के मस्तिष्क पर काफी दबाव पड़ता है.

बच्चे का रोना बच्चे को अनावश्यक तनाव देता है, और तनाव होना खासकर बहुत छोटे बच्चे को जो की गोद में है उसके मस्तिष्क के विकास में बाधा उत्पन्न करता है.

इसलिए आपको इस बात का ध्यान रखना है कि बच्चा कम से कम रोए आपको बच्चे के साथ बहुत ज्यादा प्यार से बात करनी है. उसे दुलार करना है.

आपका यही स्नेहा बच्चे के मजबूत दिमाग की नीव रखेगा.  हालांकि बच्चे का रोना भी बच्चे के लिए लाभदायक होता है. यह भी बच्चे के विकास का एक हिस्सा है. लेकिन बच्चा अनावश्यक नहीं रोना चाहिए और कोशिश करें कम से कम रोए.

मातृ स्पर्श की शक्ति

हालांकि बहुत छोटा बच्चा बहुत कुछ नहीं समझता है. अभी उसका दिमाग विकसित ही हो रहा होता है. और ऐसे में बच्चा बहुत कुछ बातों को अपने माता-पिता के, अपने परिवार के स्पर्श के द्वारा ही समझता है.

वह आपके प्यार को आपके स्पर्श से ही समझने की शक्ति रखता है. इसलिए आपका प्यार भरा स्पर्श उसके लिए बहुत ज्यादा मायने रखता है.

स्पर्श की शक्ति को असरकारक बनाने का सबसे आसान तरीका है. बच्चे को गोद मे उठाना और बाहों में समेटे रहना. यह कार्य आप तब करते हैं जब बच्चा रोता है लेकिन आपको यह हमेशा ऐसे ही करते रहना है जब बच्चा खुश हो.


स्तनपान

आजकल एक दुष्प्रचार किया जा रहा है कि स्तनपान को महिला की पर्सनैलिटी के लिए नुकसानदायक बताया जा रहा है.

माना जाता है कि इससे महिला का लुक खराब हो सकता है, लेकिन यह कोरा भ्रम है. जबकि यह फायदेमंद होता है. आपको जानकर खुशी होगी कि माता का दूध बच्चे के विकास के लिए उसके मस्तिष्क के विकास के लिए, उसके प्रतिरोधक क्षमता के लिए, उसके शारीरिक क्षमता के लिए अत्यधिक आवश्यक होता है.

माता के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक हर प्रकार का पोषक तत्व पाया जाता है, और माता का दूध बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए अत्यधिक आवश्यक भी होता है. इसलिए माता को चाहिए कि वह शिशु को अपना दूध जरूर पिलाएं.

आवश्यक एक्टिविटी

जब आपका बच्चा लगभग 1 साल का हो जाता है तो उसे छोटी मोटी एक्टिविटी में आपको शामिल करना चाहिए जैसे कि आप उसके सामने ऊंची आवाज में किताबें पढ़ें,  मधुर संगीत उसे सुनाना चाहिए और कलरफुल खिलौने जो कि पजल्स के रूप में होते हैं, अभी से उसे आदत डलवानी शुरू करनी चाहिए. ताकि उसके मस्तिष्क की कसरत होने लगे हालांकि पजल्स के लिए बच्चा अभी बहुत छोटा है, लेकिन उसे इसी प्रकार के खिलौने देने चाहिए.

यह एक्टिविटी जो आप 6 महीने से लेकर 1-1/2 साल तक के बच्चे के साथ कीजिए. यह आपके बच्चे की मस्तिष्क को मजबूत करने में काफी मदद करेंगे.

थकान बहुत जरूरी

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है उसे हमें छोटी-छोटी एक्टिविटी में शामिल करना चाहिए.  बच्चे को खेलने देना चाहिए उसके साथ ऐसी एक्टिविटी में शामिल होना चाहिए., जिससे बच्चा थक जाए.

क्योंकि बच्चे का थकना भी बहुत जरूरी होता है. इससे शरीर की शक्ति बढ़ती है, और आपको जानकर आश्चर्य होगा. यह मस्तिष्क के विकास में भी सहायता करता है. क्योंकि यहां बच्चा थक जाने के बाद अपनी लिमिट से आगे जाने की कोशिश करता है, और इसके लिए दिमाग की कसरत करनी होती है.

और ऐसे में जब शरीर साथ नहीं देता है. तो उसे अपना दिमाग चलाना होता है, कि वह कैसे अपने टारगेट को मिनिमम रिसोर्सेज के साथ पूरा करें. यह सुनने में अलग सा लगेगा लेकिन वास्तविकता है.

कुछ नयापन प्रस्तुत करें

बच्चों के साथ एक से डेढ़ वर्ष के बाद नयापन से मतलब यही है कि बच्चे को जो भी खिलौने खेलने के लिए दिए जाते हैं. वह थोड़ा ट्रिकी होने चाहिए, ताकि वह अपने मस्तिष्क का प्रयोग कर सके, और ऐसा नहीं है, कि आपको हमेशा नए नए खिलौने लाने की आवश्यकता है.

घर की कुछ चीजों को भी आप बच्चे के सामने खिलौने के रूप में रख सकते हैं. उन्हें देखकर भी बच्चे काफी कुछ सीखते हैं. कुल मिलाकर बच्चे के सामने आपको कोशिश करनी है, कि उसे आप कुछ नहीं एक्टिविटी हमेशा देते रहे. यह आप जितना ज्यादा करेंगे ,बच्चे के मस्तिष्क पर इतना ज्यादा पॉजिटिव असर नजर आएगा.

उन्हें सीखने योग्य खेलों में व्यस्त रखें

यहां हम ऐसे खेलों की बात कर रहे हैं जिससे बच्चे की इंद्रियों का विकास अच्छे से हो पाए.  इसके लिए चाहे तो खेल खिलौने या एक्टिविटी प्रयोग में लाने चाहिए जैसे कि
जैसे कि उनकी सुनकर चीजों को पहचानने की क्षमता मजबूत हो.
उनकी स्वाद की क्षमता मजबूत हो. वह चीजों को स्वाद लेकर पहचान सके.
उन्हें देखकर रंग पहचानना आना चाहिए. वस्तु के आकार से वह वस्तु के बारे में जान सकें.
उनके सूंघने की क्षमता में भी विकास होना चाहिए.

कुल मिलाकर बच्चे की इंद्रियों के विकास में भी आपको मदद करनी है यह भी मस्तिष्क के विकास का ही एक हिस्सा है.

बच्चे के दिमाग का विकास कैसे करें

नाटकीय खेलों के लिए प्रोत्साहित करें

यदि आपकी बच्ची गुड़िया की शादी रचा रही है या आपके बच्चे का घोड़ा रेस में भाग ले रहा है,अर्थात वे नाटकीय खेलों में शामिल है. 

ऐसे खेल बच्चों की कल्पना शक्ति को मजबूत बनाते है,भाषा शैली और सामाजिकता के गुण निखारते हैं. घर के छोटे-छोटे काम भी वे इस तरह के खेलों के रूप में लेंगें.

घर के छोटे-मोटे काम करवाएं

हालांकि बच्चों से घर के काम नहीं करवाए जाते हैं, लेकिन उनके विकास के लिए मात्र खेल खेल में घर के छोटे-मोटे काम बच्चों से करवाने चाहिए.  जिससे कि उनके मानसिक विकास सामाजिक विकास और शारीरिक विकास को बल मिल सके.  

स्क्रीन के सामने बच्चे अधिक टाइम नहीं बताएं

स्क्रीन से हमारा यहां तात्पर्य है कंप्यूटर की स्क्रीन लैपटॉप की स्क्रीन या मोबाइल की स्क्रीन इन सब से निकलने वाले रेडिएशन बच्चे को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, और यह बच्चे के मस्तिष्क पर सीधा असर डालते हैं.

आप कोशिश करें आप अपने बच्चे को इनकी आदत नहीं डलवाए, और इनसे बच्चों को बहलाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं करें.

आप एक स्ट्रिक्ट नियम बनाएं कि बच्चा किसी भी प्रकार की स्क्रीन से हमेशा दूर रहेगा. जब बहुत ज्यादा आवश्यक हो तभी बच्चे को इनके संपर्क में आने दे.
 

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