काली मूसली के फायदे पुरुषों के लिए

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आयुर्वेद के अंदर यौन शक्तियों को बढ़ाने के लिए बहुत सारे बहुत सारी औषधियों का प्रयोग किया जाता है. उनमें काली मूसली एक प्रमुख औषधि है. सफेद मूसली बहुत ज्यादा प्रचलित है, लेकिन काली मूसली भी इस कार्य के लिए प्रयोग में लाई जाती है.

आयुर्वेद के अनुसार सफेद मूसली यौन समस्याओं के अलावा बहुत सारी समस्याओं में काफी फायदेमंद होती है. लेकिन काली मूसली मुख्य रूप से पुरुष यौन समस्याओं के लिए ही जानी जाती है.
यह मांसपेशियों की दुर्बलता और मूत्र संबंधी समस्याओं में भी बहुत अधिक कारगर होती है.

काली मूसली के फायदे पुरुषों के लिए

काली मूसली क्या है

काली मूसली का वानस्पतिक नाम Curculigo orchioides Gaertn. (कुरकिलिगो ऑर्किओइडिस) है.
इसे कई दूसरे नामों से भी जाना जाता है जैसे कि —

तालमूली, निलधनैका, मूशली,स्याह मूसली,मूसलीस्याह, ब्लैक मूसली इत्यादि.
काली मूसली स्वाद में मीठेपन के साथ कड़वापन लिए होती है. इसके पत्ते ताड़ के पत्तों के समान होते हैं, और इस पर पीले रंग के फूल आते हैं. इसलिए इसे स्वर्ण पुष्पी या हिरणया पुष्पी भी कहा जाता है.

काली मूसली की तासीर काफी गर्म होती है इसलिए इसे आयुर्वेदाचार्य की सलाह पर ही लेना बताया जाता है. गर्म तासीर के बावजूद यह कफ को बढ़ाने वाली मानी जाती है. वात और पित्त  रोगों में यह काफी लाभदायक होती है.
काली मूसली के पत्ते तना और जड़ सभी औषधीय गुण रखते हैं, और विभिन्न प्रकार की समस्या में अलग-अलग प्रकार से इनका प्रयोग होता है.

काली मूसली के फायदे

पुरुषों की यौन समस्याएं सुलझा इस काली मूसली का प्रमुख कार्य है. लेकिन इसके बाद भी यह बहुत सारे दूसरी समस्याओं में भी बहुत अच्छी तरह से कार्य करती है.
आइए चर्चा करते हैं काली मूसली के फायदे (Kali Musli ke Fayde) को लेकर —

काली मूसली के फायदे पुरुषों के लिए

काली मूसली यौन समस्याओं पर ही नहीं अपितु पेशाब से संबंधित दूसरी समस्याओं पर भी कार्य करती है और साथ ही साथ यह मांसपेशियों को मजबूत करने का कार्य करती है.

यौन समस्याएं मांसपेशियों की कमजोरी की वजह से भी हो जाती है, और पेशाब संबंधी दूसरी समस्याओं की वजह से भी यौन क्रियाओं में समस्या आ सकती है. यह यौन समस्याओं के साथ-साथ इन पर भी कार्य करती है. इसलिए यह काफी इफेक्टिव मानी जाती है.

लिंग में तनाव की कमजोरी मांसपेशियों में कमजोरी ही मानी जाती है. इसलिए इस समस्या में काली मूसली काफी कारगर होती है.

पुरुष के यौन अंग और मूत्र तंत्र से संबंधित अंग लगभग एक ही होते हैं. दोनों में अत्यधिक जुड़ाव होता है. इसलिए मूत्र समस्याओं की वजह से यौन समस्याएं पैदा हो जाती हैं. काली मूसली पेशाब से संबंधित समस्याओं में अच्छा कार्य करती है.

पुरुषों की यौन शक्ति को बढ़ाती है. यौन शक्ति का अर्थ अपने आप में काफी व्यापक होता है.

  • यौनशक्ति अर्थात पुरुषों में कामेच्छा सही मात्रा में होना
  • यौनशक्ति अर्थात पुरुषों में शुक्राणुओं का विकास प्रॉपर तरीके से होना
  • यौनशक्ति अर्थात नपुंसकता नहीं होना
  • यौनशक्ति अर्थात स्वप्नदोष जैसी समस्याएं नहीं होना
  • यौनशक्ति अर्थात स्तंभन शक्ति मजबूत होना
  • पुरुषों की यौन शक्ति पुरुषों के शरीर में पुरुष सेक्स हारमोंस टेस्टोस्टेरोन की उचित मात्रा होने पर ही अच्छी होती है.
  • पुरुषों की यौन शक्ति पुरुषों के शरीर में मांसपेशियों की मजबूती से बढ़ती है.
  • यौन अंगों से जुड़े अंग अगर स्वस्थ होंगे तो यौन शक्ति मजबूत होती है.

इन सभी समस्याओं में मूसली अर्थात काली मूसली रामबाण की तरह कार्य करती है. काली मूसली सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की मजबूती और उसकी मात्रा को बढ़ाने के लिए कार्य करती है.

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रक्त शुद्धीकरण गुण

शरीर की बहुत सारी छोटी मोटी और बड़ी समस्याएं रक्त में आई अशुद्धि की वजह से पैदा हो जाती है. काली मूसली में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और दूसरे आवश्यक पोषक तत्व रक्त की अशुद्धि को दूर करने का कार्य करते हैं इस वजह से काफी सारी समस्याएं अपने आप सही होने लगती हैं जैसे कि –

  • अक्सर त्वचा पर कील मुंहासे दाग धब्बे चकत्ते एग्जिमा और बहुत सारी कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है यह सब समस्याएं रक्त में अशुद्धि की वजह से मुख्य रूप से पैदा होती हैं काली मूसली का प्रयोग करने पर यह सब समस्याएं समाप्त हो जाती हैं.
  • रक्त में अशुद्धि की वजह से रक्त के अंदर बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है जो हृदय के लिए बहुत घातक होता है रक्त शुद्धि की वजह से हृदय स्वस्थ रहने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है.
  • रक्त शुद्धि की वजह से लो ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड प्रेशर की समस्याएं कंट्रोल होने लगती हैं.
  • रक्त शुद्धि की वजह से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होने लगता है.
  • रक्त शुद्धि की वजह से रक्त के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है. इस कारण से व्यक्ति हमेशा अपने आप को स्फूर्ति वान महसूस करता है. ताकत महसूस होती है. फ्रेशनेस रहती है. मन प्रसन्न रहता है.

TIP: पुरुषों के समग्र विकास जैसे कि शारीरिक विकास, मानसिक विकास और मर्दाना ताकत के विकास इत्यादि के लिए आयुर्वेद के अंदर काफी सारी जड़ी बूटियां प्रयोग में लाई जाती है जैसे कि –
केसर, सफेदमूसली, शतावरी, अश्वगंधा, शिलाजीत, गोखरू, विदारीकंद, स्वर्ण भस्म, कौंच के बीज, मेथीपाउडर, जिनसेंग, जिंक, सालम पंजा, टोंगकैट अली इत्यादि. इन जड़ी-बूटियों से बने नुस्खे बहुत लाभदायक और शक्तिशाली होते हैं. 

काली मूसली के अन्य फायदे

  • काली मूसली बहरेपन की समस्या में भी काफी लाभदायक होती है.
  • पेशाब में जलन और दूसरी समस्याओं में लाभदायक
  • पेट में एसिडिटी,अपच, पेट दर्द इत्यादि समस्याओं में कारगर होती है. क्योंकि काली मूसली पित्त को कंट्रोल करती है और इस वजह से यह समस्याएं समाप्त होने लगती हैं. यह पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने का कार्य करती है.
  • वात को कंट्रोल करने का गुण होने की वजह से गैस जैसी समस्याएं समस्या नहीं होती है. इस वजह से गैस के कारण शरीर में होने वाले दर्द में यह राहत देती है. वह दर्द जो अपना स्थान बदलते हैं, उसमें राहत देती है.
  • काली मूसली को तुलसी के साथ मिलाकर खाने से किडनी में होने वाले इन्फेक्शन में फायदा होता है.

काली मूसली के नुकसान

काली मूसली के ऐसे कोई नुकसान नहीं होते हैं, जैसे की एलोपैथिक मेडिसिन के होते हैं. अगर काली मूसली की मात्रा को अगर आप अनियमित कर देते हैं तो कुछ नुकसान नजर आ सकते हैं.

काली मूसली का प्रयोग करने से कुछ लोगों को जी मिचलाना, पेट में दर्द दस्त होने जैसी समस्या हो सकती है.

अगर आप गंभीर रूप से इन समस्याओं से ग्रसित है, तो तुरंत डॉक्टर का परामर्श लेना चाहिए.

कुछ लोगों को काली मूसली से एलर्जी हो सकती है. इस वजह से उन्हें समस्याएं हो जाती हैं.

काली मूसली कैसे खाएं

काली मूसली को मुख्य रूप से अकेले प्रयोग में नहीं लाया जाता है. इसे विभिन्न प्रकार की दूसरी आयुर्वेदिक औषधियों के योग के साथ दिया जाता है. इसका प्रभाव अधिक रहता है.

आपको किसी भी प्रकार की हेल्थ समस्या में इसका प्रयोग आयुर्वेदाचार्य की सलाह पर करना चाहिए. आपको आयुर्वेदाचार्य  के अनुभव का फायदा प्राप्त होता है.

आप मूसली के चूर्ण को सुबह शाम 2 से 5 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ ले सकते हैं. इसकी तासीर अधिक गर्म होती है. इसलिए दूध के साथ लेना भी उचित रहता है.

त्वचा संबंधी समस्याओं में इसके पत्तों का रस त्वचा पर लगाया जाता है.

काली मूसली को अलसी के तेल में मिलाकर भी त्वचा पर लगाया जाता है.

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