प्रेगनेंसी में गुस्सा कंट्रोल करने के 14 तरीके | 14 tips to control anger in pregnancy

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 प्रेगनेंसी के दौरान महिला किस प्रकार से अपने गुस्से को नियंत्रण में रख सकती है क्योंकि प्रग्नैंसी के दौरान गुस्सा करना बच्चे की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक माना जाता है. चर्चा करते हैं प्रेगनेंसी के दौरान गुस्से को किन-किन तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है.

दोस्तों प्रेगनेंसी के दौरान गुस्सा करना किसी भी गर्भवती महिला को अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि यह महिला और बच्चे दोनों के लिए काफी नुकसानदायक माना जाता है. कुछ कार्य हैं, जिन्हें करके या जिनका ध्यान रखें महिला अपने गुस्से को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकती है.

प्रेगनेंसी में गुस्सा कंट्रोल करने के 14 तरीके | 14 tips to control anger in pregnancy

मुख्य रूप से गुस्सा तभी आता है, जब व्यक्ति के पास सोचने के लिए काफी समय होता है. उसके पास करने के लिए कुछ भी नहीं होता है, या फिर वह जो कार्य करना चाह रहा है. वह पूरा नहीं हो पा रहा होता है.

हालांकि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आराम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इस दौरान महिला को अपने आप को पूर्ण रूप से व्यस्त रखना काफी आवश्यक होता है. यह व्यस्त रहने का मतलब यह नहीं है, कि आपको मेहनत कश होने की आवश्यकता है.

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  • आप अपनी दिनचर्या को इस प्रकार से व्यवस्थित करें कि आपका समय सही तरीके से बीत जाए. आप कुछ क्रिएटिव भी कर पाए और आपको भरपूर आराम भी मिले.

  • महिला अपने गुस्से को शांत रखने के लिए कुछ कार्यों में अपना समय दे सकती है.

  • महिला को सुबह के समय उठकर कुछ समय Yoga के लिए अवश्य देना. चाहिए इससे शरीर के अंदर स्फूर्ति बनी रहती है और आप पूरे दिन एक्टिव रह सकती है.

  • कोशिश करें कि महिला अकेली ना रहे. अकेला रहने से गुस्सा और चिड़चिड़ापन आ ही जाता है. इसलिए घर पर कोई ना कोई व्यक्ति महिला के साथ अवश्य रहना चाहिए, और यह महिला की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी जरूरी होता है.

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कब्ज अपच गैस और एसिडिटी की समस्या नजर आती है. महिला को अपना ध्यान रखना चाहिए. अपने भोजन का ध्यान रखना चाहिए. यह चीजें जितनी कम होंगी, महिला उतनी ही प्रसन्न रहेगी.

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को भरपूर नींद लेनी चाहिए, और उचित मात्रा में आराम भी करना चाहिए. यह महिला के मूड को फ्रेश रखता है, चिड़चिड़ापन और क्रोध कम होने लगता है.

  • गर्भवती महिला को अपनी पसंद का सॉफ्ट म्यूजिक प्रेगनेंसी के दौरान आराम करते वक्त सुनना चाहिए. इससे मूड फ्रेश रहता है. इधर-उधर की बातों में मन नहीं लगता है.

  • महिला को धार्मिक पुस्तकें पढ़ना भी लाभदायक रहता है, यह महिला को एक उम्मीद देता है, जिससे आने वाली कठिनाइयों को लेकर तनाव होना या गुस्से की समस्या पर काबू पाया जा सकता है.
  • महिला कुकिंग से संबंधित या प्रेगनेंसी से संबंधित पुस्तकों का भी अध्ययन कर सकती है. इससे उसे अपनी प्रेगनेंसी को और अधिक संभालने का ज्ञान मिलता है, जो काम भी आता है, और महिला व्यस्त रहती है.

  • महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ऐसे कार्य करने में अपना समय देना चाहिए जिससे महिला मेहनत भी नहीं करनी पड़े. आराम भी भरपूर मात्रा में प्राप्त होता रहे, और समय भी निकल जाए.  इसके लिए दो चीजें तो हम बताएं चुके हैं जैसे कि पुस्तकें पढ़ना, म्यूजिक सुनना.  इसके अलावा महिला फिल्में देख सकती है, चित्रकारी कर सकती है, या अपने आने वाले बच्चे के लिए अपने हाथों से कपड़े भी बना सकती है. घर को थोड़ा बहुत सजा भी सकती है. और भी दूसरे कार्य हो सकते हैं जो महिला की पसंद के हो सकते हैं या महिला छोटे बच्चों को पढ़ाती सकती हैं.  कुल मिलाकर अपने आप को व्यस्त रखना है ताकि मस्तिष्क इधर-उधर नहीं भटके और प्रसन्न रहें, व्यस्त रहें.


  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ध्यान रखना है कि वह किसी भी व्यक्ति से बहस नहीं करें, क्योंकि इस दौरान वह दूसरे व्यक्ति की तुलना में कमजोरी की स्थिति में होती है. कुछ ही दिनों की बात है, अपने आप को शांत रखें. बहस करने से बिना वजह तनाव की स्थिति बनती है क्रोध आता है और यह बच्चे के लिए नुकसानदायक है.
  • अगर प्रेगनेंसी के दौरान महिला मैडिटेशन करती है तो यह है उसके मन को शांत रखने में काफी ज्यादा मदद करता है.
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला किसी एक्सपर्ट के द्वारा अपनी मालिश भी करवा सकती है यह भी काफी फायदेमंद है.

कुल मिलाकर हमारा उद्देश्य यही है कि आपको किसी से बहुत ज्यादा उम्मीद रखने की आवश्यकता नहीं है.  बहुत ज्यादा किसी दूसरे के बारे में या आगे के समय के बारे में सोचने की आवश्यकता नहीं है.  बस आप इतना ध्यान रखें कि आप जो भी कर रही है, अपने आने वाले भविष्य के लिए, अपने बच्चे के लिए कर रही है. उसके लिए जो कदम उचित है आपको कदम उठाने हैं और गुस्सा नहीं करना उसमें शामिल है.

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