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तीसरे महीने प्रेगनेंसी चेक अप - Third month pregnancy check up

प्रेगनेंसी की कुछ खास बातों पर हम आपसे चर्चा करेंगे कि --
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में डॉक्टर के साथ मीटिंग में क्या-क्या हो सकता है
आपको कौन-कौन से टेस्ट डॉक्टर कराने के लिए कह सकते हैं


तीसरे महीने प्रेगनेंसी चेक अप


दोस्तों प्रेगनेंसी का तीसरा महीना चल रहा है आपको इस दौरान अपना खानपान इसका ध्यान रखना है. नियमित व्यायाम भी आप एक शिक्षक के सानिध्य में करते रहे और गर्भावस्था की नियमित रूप से डॉक्टरी जांच भी आपको कराना जरूरी है. इस संबंध में हमने आपसे पहले भी चर्चाएं की है.

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डॉक्टर के साथ मीटिंग में क्या-क्या हो सकता है

जब तीसरे महीने में आपसे डॉक्टर के मीटिंग होगी तो सबसे पहले तो –
आपका वजन अकाउंट किया जाएगा उसके बाद आप का रक्तचाप अर्थात ब्लड प्रेशर भी जाना जाएगा,उसे नापा जाएगा.


गर्भावस्था के आकार का पता लगाने के लिए आपके पेट की माप भी ली जा सकती है.
इस महीने आप अपने शिशु की धड़कन को सुन पाएंगे. इसके लिए डॉक्टर डॉपलर की मदद से आपको वह धड़कन सुनवा दे या किसी दूसरे तरीके से भी आपको इसका एहसास करवाया जा सकता है.

इस महीने कुछ लैब टेस्ट भी आपके आवश्यकता पड़ने पर करवाए जा सकते हैं आवश्यकता हुई तो शुगर और प्रोटीन के स्तर की जांच के लिए आपका यूरिन टेस्ट हो सकता है.

रक्त में आरएच फैक्टर की जांच के लिए आपके रक्त का नमूना लिया जा सकता है इससे आपके खून में प्रोटीन की मात्रा का पता लगाया जाएगा इसका एनालिसिस करके , जांच करके आगे के लिए आपको सजेशन दिए जा सकते हैं.

आपके हाथ पैरों में अगर सूजन की समस्या है तो उसके लिए फ्लूट रिटेंशन टेस्ट किया जाता है ताकि इस समस्या से निजात मिल सके.

 Third month pregnancy check up


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तीसरे महीने में  कौन-कौन से लैब टेस्ट

तीसरे महीने में कुछ स्कैन आपके साथ किए जा सकते हैं इसमें सबसे पहले आता है

अल्ट्रासाउंड :  इस दौरान अल्ट्रासाउंड करके इस बात को जानने की कोशिश की जाती है कि गर्भाशय में प्लेसेंटा की स्थिति कैसी है एमनीओटिक (एम्नियोटिक  )द्रव का पता लगाने में मदद मिलती है और यह जानने की कोशिश की जाती है कि गर्भावस्था ठीक ढंग से चल रही है कि नहीं चल रही है

कोरियॉनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) :  महिला द्वारा बताए गए कुछ लक्षणों से अथवा अल्ट्रासाउंड के द्वारा अगर किसी प्रकार की परेशानी डॉक्टर को नजर आती है तो वह इस टेस्ट को करने का सजेशन देते हैं जिससे इस बात का पता लगाया जा सके कि किसी गर्भस्थ शिशु को अनुवांशिक बीमारी तो नहीं है.



मैटरनल सीरम टेस्ट : प्रेगनेंसी में इस टेस्ट को 11 हफ्ते से 13 हफ्ते के बीच में किया जाता है तीसरे महीने में भी कर सकते हैं इसमें हृयूमन कोरियॉनिक गोनडोट्रोपिन  अर्थात एचसीजी हार्मोन या कह सकते हैं सरल भाषा में प्रेगनेंसी हार्मोन का स्तर महिला के शरीर में क्या है यह जानने की कोशिश की जाती है साथ में दूसरे तत्वों को भी जानने की कोशिश की जाती है जो प्रेगनेंसी के लिए जरूरी होते हैं.
एनटी स्कैन :  आवश्यकता पड़ने पर यह स्कैन भी किया जाता है जिससे यह जानने की कोशिश की जाती है कि कहीं बच्चे का विकास बाधित तो नहीं हो रहा है यह सभी तभी होते हैं जब डॉक्टर स्कोर अल्ट्रासाउंड के बाद बच्चे का विकास नजर नहीं आता है या किसी वजह से शिशु की धड़कन कम या उसे सुनाई ना पड़े कम इन सब चीजों की स्थिति बनती है.


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