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मनचाही संतान प्राप्ति का प्राचीन तरीका - Santan Prapti part #3

नमस्कार दोस्तों आज की इस POST में हम आपके लिए पुत्र या पुत्री अर्थात मनचाही संतान प्राप्ति के लिए एक प्राचीन तरीका आपके सामने लेकर आए हैं अगर आप अपने धर्म शास्त्र और दर्शनशास्त्र पर यकीन रखते हैं तो यह तरीका आपको जरूर पसंद आयेगा दोस्तों इसके पीछे कोई वैज्ञानिक तर्क नहीं है लेकिन इसका वर्णन हमारे शास्त्रों में जरूर मिलता है, आप किसी भी ज्ञानी पंडित से इस तरीके के बारे में जान सकते हैं वह भी इसका व्याख्यान करते हैं.

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आइए चर्चा करते हैं मनचाही संतान प्राप्ति को किस प्रकार से सुनिश्चित करें
इस तरीके को मैंने नेट पर भी देखा है काफी लोगों ने इसके बारे में बताया है और काफी सारी कन्फ्यूजन इसको लेकर सामने आई है तो इस प्रकार की कन्फ्यूजन आपको ना आए इसके लिए मैं आपको थोड़े से प्वाइंट्स क्लियर करने की कोशिश करता हूं.

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पहला कन्फ्यूजन महिला के पीरियड्स के दिन को लेकर होता है किस दिन पीरियड का पहला दिन होता है.

जब हम तरीका धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ले रहे हैं तो दिन रात की कैलकुलेशन हुई भारतीय धर्म शास्त्र के अनुसार ही होनी चाहिए भारतीय धर्म शास्त्र के अनुसार सूरज के निकलते समय दिन शुरू होता है अर्थात जिस समय सूरज निकलता है उस वक्त से वह दिन शुरू माना जाता है तो हम कह सकते हैं कि सुबह के नंबर में भारतीय धर्म शास्त्र के अनुसार दिन की शुरुआत मानी जाती है जबकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार रात के 12:00 बजे से दिन की शुरुआत मानी जाती है तो आप समझ गए होंगे कि दिन कैसे कैलकुलेट करना है.

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समय को लेकर एक कन्फ्यूजन और होता है जैसे कि पीरियड्स रात को 12:25 pm पर शुरू होते हैं तो कुछ लोगों को लगता है कि अगले रात 12:25 pm पर ही एक दिन होगा लेकिन ऐसा नहीं है सुबह से लेकर अगली सुबह तक जिस भी वक्त पीरियड शुरू होता है वह दिन पहला दिन माना जाएगा अगर सूरज निकलने से 2 घंटे पहले भी पीरियड शुरू होता है,  सूरज निकलने के बाद दूसरा दिन माना जाएगा यह प्वाइंट आपको क्लियर हो जाना चाहिए.

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 अब पीरियड्स समाप्त होने के बाद कौन सा दिन दूसरा है कौन सा दिन तीसरा है कौन सा दिन चौथा है इस पर बड़ा कन्फ्यूजन होता है.
संतान प्राप्ति का प्राचीन तरीका वही है जो आपने 100 से ज्यादा POST में NET पर देखा होगा की पीरियड्स के बाद 10वीं 12वीं 14 वीं 16वीं रात्रि को प्रयास करने से पुत्र की प्राप्ति होती है और  11वीं 13 वीं 15वीं और 17वीं रात्रि को को प्रयास से पुत्री प्राप्त होती है.

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दोस्तों पांचवी छठवीं सातवीं आठवीं और नवी रात्रि के गर्भाधान से भी पुत्र और पुत्री की प्राप्ति होती है लेकिन संतान इन रात्रि को प्रयाग से जन्म लेने वाले संतान अल्पायु, शरीर से कमजोर, मस्तिष्क से कमजोर और भाग्य हीन होती है तो इन रात्रि का हम जिक्र ही नहीं कर रहे हैं.

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प्वाइंट यह है कि 10वीं 12वीं 14वीं 16वीं रात्रि बैठेगी कब क्योंकि किसी महिला को पीरियड 3 दिन आते हैं किसी को 7 दिन आते हैं किसी को 5 दिन भी आते हैं तो ऐसे में डेट आगे पीछे हो जाती है.
पहली बात तो यह है कि आप को पीरियड कितने भी दिन आते हो इस प्रयोग में इसका कोई भी रोल नहीं है.

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जिस दिन आप के पीरियड शुरू हुए हैं वह दिन पहला है चाहे आप को सुबह 8:00 बजे शुरू हुए हो चाहे रात को 3:00 बजे शुरू हुए हो वह आपका पहला दिन है और उसकी रात्रि आपकी पहली रात्रि है उसके बाद आप दसवां दिन निकालने उस दिन से आप शुरू कर सकते हैं प्रयास पुत्र और पुत्री दोनों की प्राप्ति के मुझे उम्मीद है कि आप को सारी बात क्लियर हो गई होगी.

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 कुछ प्राचीन बुक्स में यह डेट्स शुक्ल पक्ष के साथ भी बताई गई है प्रयास की रात्रि को
 शुक्ल पक्ष भी होना चाहिए क्योंकि अलग-अलग ऋषि-मुनियों ने यह एक प्रकार से कह सकते हैं कि प्राचीन साइंटिस्ट है तो ऋषि-मुनियों ने अपने रिसर्च के अनुसार अपनी बुक्स में अलग अलग तरीके बताएं हैं.


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