प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए प्रोटीन पाउडर | प्रोटीन पाउडर के फायदे और नुकसान

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गर्भावस्था में कम और ज्यादा प्रोटीन से क्या क्या नुकसान होते हैं
हम प्रेगनेंसी के दौरान प्रोटीन की आवश्यकता पर चर्चा करने जा रहे हैं.
आज हम हमारे वीडियो के टॉपिक हैं —

गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन इतना महत्वपूर्ण क्यों है. एक गर्भवती महिला को कितना प्रोटीन आना चाहिए.
प्रोटीन की कमी से क्या समस्या आ सकती है. प्रोटीन खाने के स्वास्थ्य लाभ कौन-कौन से हैं. प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ कौन कौन से हैं. अधिक प्रोटीन के क्या-क्या नुकसान होते हैं.

इन सब विषयों पर हम आज चर्चा करेंगे—

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गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन इतना महत्वपूर्ण क्यों है

प्रोटीन किसी भी व्यक्ति के लिए काफी आवश्यक पोषक तत्व होता है. यह गर्भवती स्त्री या बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि हर एक इंसान के लिए काफी जरूरी होता है. प्रोटीन की आवश्यकता हमारे शरीर में
हड्डियों के लिए,
शरीर को ऊर्जा देने के लिए,
मांसपेशियों त्वचा के निर्माण के लिए होती है.

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए प्रोटीन की मात्रा सुनिश्चित करना आवश्यक है, क्योंकि है शिशु के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करता है.
एक गर्भवती स्त्री को प्रोटीन की कितनी आवश्यकता होती है. उससे पहले हम उसकी कमी से क्या क्या नुकसान होता है, और इसके क्या क्या फायदे हैं. उन पर चर्चा कर लेते हैं.

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गर्भवती स्त्री को प्रोटीन की कमी से नुकसान

किसी भी गर्भवती स्त्री के शरीर में अगर प्रोटीन की कमी हो जाती है तो उसे कुछ विशेष प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि—

  • बालों का पतला होकर जाना भी प्रोटीन की कमी से होता है.
  • सबसे बड़ी बात बच्चे और मां का विकास सही तरीके से नहीं हो पाता है.
  • महिला की मांसपेशियों में कमजोरी नजर आने लगती है.
  • एल्बुमिन एक प्रकार का प्रोटीन होता है जिसकी कमी से एडिमा होने का खतरा रहता है.
  • यूरिया और अल्फा अमीनो नाइट्रोजन लेवल कम हो जाता है.
  • प्रोटीन की कमी के कारण होने वाले बच्चे का वजन जन्म के बाद कम रहता है.
  • नवजात बच्चे के हृदय के विकास में बाधा आती है.
  • महिला और बच्चे दोनों का इम्यून सिस्टम कमजोर रहता है.
  • वसा और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है.
  • प्रोटीन की कमी से होने वाले नवजात का बड़े होने तक ब्लड प्रेशर नार्मल नहीं रहता है. उसे गुर्दे और किडनी की समस्या भी नजर आती है.

गर्भवती महिलाओं के लिए प्रोटीन पाउडर के फायदे

  • अगर शरीर में आवश्यक मात्रा में प्रोटीन होती है तो गर्भवती स्त्री गर्भावधि मधुमेह के खतरे से बची रहती है.
  • अगर शरीर में आवश्यक मात्रा में प्रोटीन होती है तो गर्भवती स्त्री गर्भावधि मधुमेह के खतरे से बची रहती है अगर महिला के शरीर में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध रहती है तो यह शिशु के मांसपेशियों के विकास में मदद करती है साथ ही साथ टिशू को रिपेयर करने में भी मदद करती है और यही कार्य यह है गर्भवती स्त्री के लिए भी करती है उसकी मांसपेशियों और टिशू के लिए भी है जरूरी है.
  • प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ गर्भ में भ्रूण के विकास को सुनिश्चित करते हैं.
  • गर्भावस्था के दौरान प्रचुर मात्रा में प्रोटीन लेने से शिशु का वेट भी सही रहता है.
  • अगर महिला के शरीर में प्रोटीन उचित मात्रा में है तो यह शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने में भी काफी मदद करती है 1 ग्राम प्रोटीन से 4 कैलोरी तक ऊर्जा प्राप्त होती है.
  • असल में प्रोटीन हमारे शरीर के कई भागों को निर्माण करने में सहायक होता है जैसे कि त्वचा, बाल, नाखून, हड्डियां, आंतरिक अंग, मांसपेशियां लगभग प्रोटीन शरीर के हर हिस्से में पाया जाता है. इसलिए इसकी आवश्यकता को समझा जा सकता है.

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प्रतिदिन कितने प्रोटीन की आवश्यकता

वैसे तो प्रोटीन की आवश्यकता व्यक्ति के जीवन शैली पर निर्भर करती है, लेकिन फिर भी  70 से 71 ग्राम प्रोटीन रोज एक सामान्य इंसान को चाहिए होती है.

प्रेगनेंसी के दौरान इसकी मात्रा और बढ़ जाती है.

  • पहली तिमाही में रोज की आवश्यक मात्रा से 1 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन चाहिए.
  • दूसरी तिमाही में 8 ग्राम स्थित प्रोटीन की आवश्यकता होती है, और
  • तीसरी तिमाही में 26 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता एक गर्भवती स्त्री को होती है.

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प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत क्या है

प्रेगनेंसी के दौरान अपने खाद्य पदार्थों को सेलेक्ट करने में काफी सावधानी रखनी चाहिए.अगर आपका प्रश्न है कि सबसे ज्यादा प्रोटीन किसमें पाया जाता है, तो  प्रेगनेंसी के नजरिए से प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोत कुछ इस प्रकार से हैं.

आप गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें अपने भोजन में शामिल कर प्रोटीन की मात्रा को संतुलित कर सकती हैं.

प्रोटीन युक्त आहार लिस्ट:
प्रोटीन फूड के अंदर आपको मूंगफली से बना मक्खन, अंडा, मट्ठा काफी फायदेमंद होता है.

अगर आप मांसाहारी हैं, तो आपको मछली और चिकन भी इसके लिए उपयुक्त है. लेकिन इन्हें कच्चा खाने में काफी सावधानी रखी जाती है. चर्चा हमने पहले भी अपने की है.

प्रोटीन फूड्स के रूप में आप आप बींस अर्थात फलियां, मटर, सोया प्रोटीन का प्रयोग कर सकती हैं. सभी प्रकार की बींस इत्यादि भी काफी फायदेमंद होती है. इसके लिए आप खासकर सर्दियों के मौसम में ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल कर सकती हैं.

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क्या प्रेगनेंसी में प्रोटीन के लिए प्रोटीन पाउडर ले

प्रेग्नेंसी के समय कोई सी खाद्य पदार्थ खाने से पहले काफी सोचना और समझना पड़ता है. प्रोटीन के लिए कोई भी प्रोटीन पाउडर, कैप्सूल या टेबलेट अपनी मर्जी से प्रेग्नेंसी के समय नहीं लेना है. यह नुकसानदायक हो सकता है.

डॉक्टर हमेशा प्रोटीन के लिए महिला को उसके अपने भोजन पर ही निर्भर रहने की सलाह देते हैं, और गर्भवती स्त्री को भी यह कोशिश करनी चाहिए, कि वह प्रोटीन से संबंधित कोई भी फूड सप्लीमेंट के स्थान पर अपने भोजन द्वारा प्रोटीन की कमी को पूरा करें. यह सबसे अच्छा ऑप्शन रहता है.

क्योंकि इसके कुछ साइड इफेक्ट नजर आ सकते हैं. सप्लीमेंट का सेवन करने से गर्भ शिशु का वजन कम हो सकता है. और 37 हफ्ते के दौरान कुछ बाधाएं पैदा हो सकती हैं.

अगर आपको प्रोटीन की कमी हो रही है तो इसके लिए आप डॉक्टर से पूछ कर ही प्रोटीन पाउडर, कैप्सूल या टेबलेट का प्रयोग करें.

आजकल प्रेगनेंसी को ध्यान में रखते हुए कुछ कंपनियां स्पेशल प्रेगनेंसी प्रोटीन पाउडर, कैप्सूल या टेबलेट बना रही है जो प्रेगनेंसी को बहुत सपोर्ट करते हैं.{alertInfo}

कौन सा प्रोटीन पाउडर सबसे अच्छा है

गर्भवती स्त्री को सामान्यता प्रेगनेंसी के दौरान प्रोटीन की कमी के लिए सप्लीमेंट देने की सलाह नहीं दी जाती है. लेकिन प्रश्न है प्रोटीन की कमी कैसे पूरी करें, अगर इसकी आवश्यकता पड़ती है, तो आप अपने डॉक्टर से पूछ कर ही प्रोटीन पाउडर का सेवन करें.

प्राकृतिक चीजों से बने प्रोटीन पाउडर अर्थात सप्लीमेंट जैसे कि मूंग की दाल से बना, मटर से बना प्रोटीन सप्लीमेंट बाजार में उपलब्ध होते हैं. जो nature चीजों से बने होते हैं. अपनी आवश्यकता के अनुसार आप डॉक्टर की सलाह पर उनका प्रयोग कर सकते हैं.

प्रोटीन पाउडर के नुकसान

जहां प्रोटीन की कमी से काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है वही प्रोटीन की अधिकता से भी गर्भावस्था के दौरान काफी समस्या हो सकती है जैसे कि –

शिशु का वजन अधिक प्रोटीन खाने से भी कम हो जाता है और कम प्रोटीन से भी कम होता है.
अधिक प्रोटीन अगर शरीर में होता है तो समय से पूर्व प्रसव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है
जन्म के दौरान शिशु की लंबाई भी कम रह जाती है, और
जो शिशु पैदा होता है. उसका विकास भी धीमी गति से होता है. इसलिए प्रोटीन की निश्चित मात्रा ही शरीर के लिए आवश्यक होती है.

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