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बच्चे के रंग को साफ करने के लिए कुछ घरेलू उपाय

 बच्चे के रंग को साफ करने के लिए कुछ घरेलू उपाय के विषय में हम यहां चर्चा करने जा रहे हैं. कुछ ऐसे उबटन जिनका प्रयोग बच्चे की त्वचा पर किया जाए तो बच्चे की त्वचा को साफ किया जा सकता है. जिससे आपको अपने बच्चे के गोरे होने का अहसास हो सके, आपको आपका बच्चा गोरा लगे. उसके पीछे एक छोटा सा लॉजिक और भी है जिसकी चर्चा हम करेंगे.

बच्चे के रंग को साफ करने के लिए कुछ घरेलू उपाय



आपने देखा होगा कि कोई भी व्यक्ति अगर उसे आप थोड़ी सी कम रोशनी वाली जगह पर देखते हैं, तो उसका रंग थोड़ा सांवला नजर आता है, और वही अगर आप उसे अधिक रोशनी वाली जगह पर देखते हैं तो उसका रंग ज्यादा साफ नजर आता है.  ऐसा क्यों होता है क्योंकि रंग तो उसका जो है, वह है.  उस में अंतर क्यों नजर आता है. 


अगर आप इस बात को समझते हैं, तो आप रंग को थोड़ा सा साफ करने का जो लॉजिक है वह समझ जाएंगे. वैसे हम आपको यह बता दें कि जो कुदरत की तरफ से बच्चों को रंग मिला है वह तो नहीं बदल सकता, लेकिन तुलनात्मक दृष्टि से उसे थोड़ा साफ किया जा सकता है, जैसा कहा कि आप को रंग साफ होने का एहसास कराया जा सकता है.

असल में सारी कहानी, रंग साफ लगना आपकी त्वचा से जितनी ज्यादा रोशनी परावर्तित होगी अर्थात टकराकर सामने वाले की आंख पर ज्यादा जाएगी उसको आपकी त्वचा उतनी ज्यादा चमकदार और साफ नजर आती है.

अगर आपकी त्वचा अपने आप पर पड़ने वाली रोशनी को सोख लेती है तो वह डार्क नजर आएगी.

इसलिए कहा जाता है कि जो स्किन का ओरिजिनल कलर है उसको तो एकदम से परिवर्तित नहीं किया जा सकता है, हां उसमें चमक लाई जा सकती है उसे थोड़ा सा गोरा किया जा सकता है, और उसी के लिए सब कुछ उपाय किए जाते हैं

आपने कई बार देखा होगा कि बच्चा शुरू में सांवले रंग का होता है, लेकिन जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है 15, 16 साल से ज्यादा उम्र का होता है तो उसका रंग साफ हो जाता है.

और कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चा शुरू में तो गोरे रंग का होता है लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता जाता है 15 साल से अधिक उम्र का होता है तो उसका रंग अपेक्षाकृत सांवला हो जाता है.

बच्चे की त्वचा सूरज की पराबैंगनी किरणों अर्थात अल्ट्रावायलेट किरणों के प्रति जितनी ज्यादा संवेदनशील होती है, तो उतना ज्यादा  मेलेनिन त्वचा अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा के लिए बनाती है, और त्वचा काले रंग की नजर आती है.

जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है

उसके शरीर में आने वाले हार्मोनअल परिवर्तन की वजह से,
बच्चे की खानपान की आदतों की वजह से,
बच्चे की लाइफस्टाइल की वजह से त्वचा की सूरज की पराबैंगनी किरणों के प्रति संवेदनशीलता बदलती रहती है.


 अगर वह कम हो जाती है तो बच्चा गोरा होने लगता है, क्योंकि त्वचा को अब उतने ज्यादा मेलेनिन उत्पादन की आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि वह मजबूत हो चुकी है.

अगर त्वचा सूरज की पराबैंगनी किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है, तो त्वचा और ज्यादा मेलेनिन का उत्पादन शुरू कर देती है. बच्चा काले रंग का हो जाता है.

यह तो एक लोंग टर्म प्रोसेस हो जाता है, इसमें वास्तव में समय भी लगता है. लेकिन त्वचा पर डार्क स्पॉट गंदगी और डेड स्किन जमा रहती है. तब भी त्वचा लाइट की किरणों को अवशोषित करती है. वह डार्क रंग की नजर आती है. अगर त्वचा लाइट की किरणों को परावर्तित अधिक करें तो वह गोरी नजर आएगी.
 
तो तुरंत अगर आपको स्किन में चमक चाहिए. हल्का सा गोरापन बढ़ा हुआ चाहिए, तो उसके लिए कुछ घरेलू उपाय किए जा सकते हैं. यह खासकर हम छोटे बच्चे की त्वचा को साफ करने के घरेलू उपायओ के संबंध में चर्चा कर रहे हैं.

बेबी के लिए बेसन और दूध उबटन

बच्चे की त्वचा को साफ करने के लिए बेसन और दूध का पैक बनाकर लगाया जाता है. यह उबटन नवजात शिशु के लिए तैयार किया जाता है, क्योंकि इससे उनकी त्वचा को कोई भी नुकसान नहीं होता है.  रंग में फर्क भी नजर आता है.

इसके लिए आप बेसन, पानी, दूध और बेबी ऑयल को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें, और इसका प्रयोग बच्चे के शरीर पर करें हल्के हाथ से बच्चे की त्वचा पर मालिश करें. कुछ देर बाद हल्के गुनगुने पानी से साफ कर दें.

पानी और दूध से नहलाएं

नवजात शिशु को आप दूध और पानी से स्नान कराइए. सबसे पहले एक कप कच्चे दूध को शिशु के पूरे शरीर पर हल्के हाथों से मालिश करें . उसके बाद उसे गुनगुने पानी से नहला दे. इससे डेड स्किन निकलने लगेंगे लगेंगी और शिशु की त्वचा चमकदार, साफ और गोरी लगने लगेगी.

 ध्यान रखें पानी गुनगुना ही होना चाहिए. ना तो पानी गर्म होना चाहिए और ना ही पानी ठंडा होना चाहिए यह दोनों की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

गुनगुने नारियल तेल से मालिश

अगर आपको लगता है कि आपके शिशु का रंग अपेक्षाकृत थोड़ा सा दबा हुआ है, तो आप शिशु की गुनगुने नारियल के तेल से मालिश करें. यह त्वचा को निखारने में मदद करता है, और बच्चे के शरीर को किसी भी प्रकार के इंफेक्शन का खतरा भी नहीं होता है. नाजुक त्वचा के लिए लाभदायक है.

बच्चे की त्वचा पर साबुन के इस्तेमाल से बचें . यह त्वचा को रूखा सूखा बनाता है. डेड स्किन को बढ़ाता है

निकलते हुए सूरज की धूप भी बच्चे को दिखाने चाहिए. यह भी बच्चे के रंग को निखारने में मदद करती है, लेकिन ध्यान रहे तेज धूप बच्चे की त्वचा को नुकसान हो जाती है.

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