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बुधवार, 2 अक्तूबर 2019

बच्चों और गर्भवती को किस प्रकार के बर्तन में खाना बनाना और खाना चाहिए

नमस्कार दोस्तों आज की इस POST में हम आपसे चर्चा करने वाले हैं कि हमें किस तरह के बर्तन में भोजन बनाना चाहिए और खाना चाहिए जिससे कि  वह सेहत के लिए अच्छा हो.
हम आपको बताएंगे कि गर्भवती माता के लिए किस प्रकार के बर्तन में खाना पकाना अच्छा होता है ताकि माता को संपूर्ण पोषण मिल सके . दोस्तों संपूर्ण भारत में ही नहीं बल्कि इस संपूर्ण विश्व में कुछ विशेष प्रकार की धातुओं के ही बर्तन प्रयोग में लाए जाते हैं हम आपको बताएंगे किस बर्तन में खाना बनाने से  प्रकार के फायदे मिलते हैं और किस प्रकार के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर को नुकसान होता है .

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मुख्यता प्राचीन काल से अब तक सोना, चांदी, तांबा, पीतल, एलमुनियम, कांच और मिट्टी के बर्तन मुख्य रूप से प्रयोग में लाए जाते हैं, इन सभी प्रकार के पात्रों को भोज्य पदार्थों के लिए  प्रयोग करने में किस प्रकार के लाभ हैं किस प्रकार के हानि है उस पर चर्चा कर लेते हैं ताकि आप गर्भवती महिला के लिए उपयुक्त प्रकार के बर्तनों का चयन कर सकें.

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सोने के बर्तन : दोस्तों सोना एक बहुत ही महंगी धातु है आम जनता इसके बने बर्तन प्रयोग में नहीं ला सकती है मुख्यतः इस प्रकार के बर्तन प्राचीन काल में राजा महाराजाओ के खाने के लिए प्रयोग में लाए जाते थे आज के समय में भी धनी परिवार सोने के बर्तनों का प्रयोग करते हैं,
अगर व्यक्ति सोने के बर्तन का प्रयोग खाने में करता है तो इससे उसकी आंखों की रोशनी अच्छी रहेगी . सोना काम शक्ति को बढ़ाने में भी बहुत ज्यादा सहायक होता है . सोना एक गर्म धातु मानी जाती है , यह शरीर को अत्यधिक बल प्रदान करती है, सोने के बर्तनों का प्रयोग करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते हैं.

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चांदी के बर्तन : चांदी के बर्तन भी सोने के बर्तनों की तरह ही महंगे होते हैं लेकिन इतने महंगे नहीं होते हैं जितना कि सोना होता है, मुख्यतः मध्यम वर्गीय परिवारों में छोटे बच्चों के लिए सोने के बर्तनों का प्रयोग खाना खिलाने के लिए किया जाता है, चांदी के बर्तन सोने के बर्तनों की तुलना में अधिक प्रचलित हैं, चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है. शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आयुर्वेद के अनुसार चांदी के बर्तन सोने के बर्तनों की तुलना में अधिक फायदेमंद माने गए हैं चांदी के बर्तनों में खाना खाने से कफ, वात, पित्त तीनों तरह के लोग शांत रहते हैं, चांदी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है.

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कांसे के बर्तन : कांसे  के बर्तनों को खाना खाने के लिए बहुत ज्यादा उपयुक्त माना जाता है यह आम जन की पहुंच में आने वाली धातु है, कांसे के बर्तन में खाना खाने से भूख बढ़ती है बुद्धि तेज होती है, यह रक्तपित को शांत करता है तथा रक्त की शुद्धता को बनाए रखता है जिसके कारण बहुत से रोग शरीर को छू नहीं पाते हैं इस बर्तन के प्रयोग से मात्र 3 से 4% ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं.
बस इस बात का ध्यान रहे कि कांसे के बर्तन में खट्टी चीजें नहीं  खानी चाहिए क्योंकि कांसे की धातु से रिएक्शन करके खट्टी चीजें विषैला तत्व बनाती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है.

सोने के बर्तन ,चांदी के बर्तन , कांसे के बर्तन ,तांबे के बर्तन , पीतल के बर्तन

तांबे के बर्तन : भारतीय समाज में प्राचीन समय में तांबे के बर्तनों का प्रयोग भी बहुत बड़ी मात्रा में किया जाता था तांबे के बर्तन में मुख्यतः पानी को स्टोर किया जाता है क्योंकि तांबे के बर्तन में पानी रखने से वह शुद्ध हो जाता है उसके भीतर उपस्थित सभी विषाणु समाप्त हो जाते हैं, तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से शरीर निरोगी बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, बस एक बात का ध्यान रखें तांबे के बर्तन का प्रयोग दूध के लिए नहीं किया जाता दूध में विषैले गुण आ जाते हैं,
तांबे का बर्तन भोजन की पौष्टिकता को बनाए रखता है.

पीतल के बर्तन :  पीतल का बर्तन भी भोज्य पदार्थों की पौष्टिकता को बनाए रखता है पीतल का बर्तन केवल 7% पोषक तत्वों को ही नष्ट कर पाता है 93% पोषक तत्व खाद्य पदार्थों में बने रहते हैं, अगर आप पीतल के बर्तन का प्रयोग भोज्य पदार्थों के लिए करते हैं इससे आपको कृमि रोग नहीं होगा साथ ही साथ कफ और वायु जनित रोगों से शरीर की सुरक्षा होगी.

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लोहे के बर्तन : लोहा उष्मा का अच्छा सुचालक होता है जिसकी वजह से बर्तन चारों तरफ से बराबर गर्म होता है भोजन अच्छे से पकता है, लोहा रक्त के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाता है इसके कारण रक्त की शक्ति बढ़ती है, हमारे शरीर को आंतरिक और बाह्य बल मिलता है शरीर की energy भी बहुत अधिक बनी रहती है, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है . लोहा कई रोग को खत्म करता है , पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है.
स्टील के बर्तन : आज के समय में स्टील के बर्तन बहुत ज्यादा प्रयोग में लाए जाते हैं क्योंकि  स्टील एक सस्ता धातु है, ऊष्मा का अच्छा सुचालक है भोजन अच्छे से पकता है, स्टील ना तो भोज्य पदार्थ की पौष्टिकता को बढ़ाता है और ना ही इसकी पौष्टिकता को कम करता है.

लोहे के बर्तन , स्टील के बर्तन ,कांच के बर्तन , एल्युमिनियम के बर्तन , नानस्टिक बर्तन, मिट्टी के बर्तन

कांच के बर्तन : आजकल कांच के बर्तन भी चलन में है, यह उष्मा के कुचालक होते हैं इसलिए खाना पकाने में इनका प्रयोग नहीं किया जाता है बना हुआ खाना रखने और परोसने में इनका प्रयोग होता है, कांच खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले अम्ल, क्षार व लवण आदि से प्रतिक्रिया नहीं करता. कांच के बर्तन महंगे होते हैं और उनके टूटने की संभावना सबसे अधिक होती है.

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एल्युमिनियम के बर्तन : जिन बर्तनों का प्रयोग में खाना बनाने के लिए नहीं करना चाहिए वह है एल्मुनियम के बर्तन, यह एक जहरीला तत्व है जो हमारे भोजन  के 75% से अधिक पोषक तत्वों को नष्ट कर देता है, आयुर्वेद के अनुसार यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है, इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए. एलुमिनियम का बर्तन बहुत सारी बीमारियों का जनक भी है like इससे हड्डियां कमजोर होती है , मानसिक बीमारियाँ होती है, लिवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है. उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है.


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