Pregnancy & Care

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रविवार, 17 नवंबर 2019

क्या प्रेगनेंसी में दूध पीना चाहिए या नहीं पीना चाहिए - Milk during Pregnancy

थायराइड में किस प्रकार का भोजन नहीं करें

आज के इस POST के माध्यम से हम थायराइड को लेकर फिर से चर्चा करने वाले हैं.
अब तक हमने अपने POSTस में चर्चा की है कि
थायराइड क्या है
थायराइड की क्या आवश्यकता होती है प्रेगनेंसी में
क्या कारण है
क्या लक्षण है
क्या खाना चाहिए
आज हो अपनी इस POST के माध्यम से चर्चा करने वाले हैं कि प्रेग्नेंट महिला को थायराइड की समस्या होती है तो उसे किस प्रकार के भोजन से बचना चाहिए आज इस पर चर्चा करेंगे.  चर्चा करते हैं

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दोस्तों जो हम आपको बता रहे हैं यह हमने आपको पुराने POSTस में भी बताया है कि थायराइड दो प्रकार का होता है हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड जब थायराइड कम होता है तो उसे हाइपो थायराइड कहते हैं जब थायराइड आवश्यकता से अधिक हो जाता है तो उसे हाइपर थायराइड कहते हैं तो दोनों प्रकार के थायराइड में अलग-अलग प्रकार का भोजन अवॉइड करना चाहिए.
अगर आपको हाइपो थायराइड की समस्या सामने आ रही है और आप गर्भवती हैं तो आपको जो हम बता रहे हैं इस प्रकार के भोजन से बचना है.

जंक फूड 
किसी भी गर्भवती महिला को जंग फूड वैसे भी नहीं खाना चाहिए चाहे वह स्वस्थ ही क्यों ना हो अगर आपको हाइपो थायराइड की समस्या है तो जंक फूड तो बिल्कुल भी नहीं लेना है जंक फूड के अंदर किसी भी प्रकार का पोषक तत्व नहीं पाया जाता है हां कुछ नुकसान दायक तक तो अवश्य होते हैं.

सोया पदार्थ
सोयाबीन और सोया युक्त खाद्य पदार्थों में फाइट्रोएस्ट्रोजन पाया जाता है। यह थायराइड हार्मोंस के निर्माण में बाधा पहुंचाता है, क्योंकि आपको हाइपो थायराइड की समस्या है, अर्थात आपके शरीर में आवश्यकता से कम थायराइड हार्मोन उत्पादित हो रहा है तो आपको सोया पदार्थ खाने से बचना है. इसलिए, टोफू व सोया दूध जैसे दूसरे प्रकार के खाद्य पदार्थों को नहीं खाना है.
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ग्लूटेन 
अगर आपको हाइपो थायराइड की समस्या है तो ग्लूटेन आप को नुकसान पहुंचाता है इसलिए आपको ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थों को खाने से बचना है जैसे कि ड, पास्ता व बियर आदि.
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पेय पदार्थ 
आपको कुछ पेय पदार्थों से भी दूरी बनाकर रखनी है जैसे कि  कॉफी, ग्रीन-टी व शराब इत्यादि.
कुछ फल व सब्जियां : ब्रोकली, पालक, गोभी, आड़ू व नाशपाती आदि का सेवन न करें.
अगर आपको हाइपर थायराइड की समस्या है तो आपको कुछ मुझे पदार्थ नहीं खाने हैं जिसकी हम अब आप से चर्चा करने वाले हैं
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अधिक आयोडीन
इस अवस्था में अधिक आयोडीन लेने से समस्या और बढ़ सकती है. सीफूड में आयोडीन भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही डेयरी उत्पादों व अंडे के पीले हिस्से को भी आयोडीन का मुख्य स्रोत माना गया है.

ग्लूटेन  
यह एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो हाइपर थायराइड की समस्या में भी फायदा बिल्कुल नहीं करता है तो इस अवस्था में भी आपको यह इस प्रकार के भोजन नहीं खाने हैं जिनमें ग्लूटेन अधिक पाया जाता है.

प्रोसेस्ड फूड व शुगर 
जैम, जेली, कुकीज व पैस्ट्री जैसे प्रोसेस्ड फूड व शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों से दूर ही रहें.

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जंक फूड 
हाइपोथायरायडिज्म हो या हाइपरथायरायडिज्म जंक फूड न ही खाएं तो बेहतर होगा.
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दोस्तों जैसे आयोडीन है हाइपर थायराइड में नहीं खाना चाहिए लेकिन अगर हाइपो थायराइड की समस्या है तो आपको आयोडीन युक्त नमक या दूसरी चीजें खानी चाहिए इसी प्रकार से कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो किसी भी प्रकार का थायराइड हो दोनों में नुकसान देते हैं जैसे ग्लूटेन

शादीशुदा होने के लाजवाब फायदे

नमस्कार दोस्तों इस POST के माध्यम से हम चर्चा करने वाले हैं इस शादी को लेकर शादी के फायदों को लेकर दोस्तों हम सभी जानते हैं शादीशुदा जिंदगी पर बहुत सारे जोक्स बनते हैं जिसमें शादी जैसे रिश्ते की मजाक बनाई जाती है. आज वह अपने इस POST के माध्यम से आपको बताने जा रहे हैं पूरे के पूरे 20 फायदे वह भी शादीशुदा होने के चर्चा करते हैं


औरत और मर्द दोनों ही ज़िंदगी की एक गाड़ी के दो पहिए है और दोनों के बगैर जीवन की गाड़ी नहीं चल सकती.औरत और मर्द दोनों एक-दूसरे के बिना बिल्कुल अधूरे हैं और शादी ही एकमात्र वो ज़रिया है जो दो लोगों को एक पवित्र बंधन में बांध देता है.
कहते हैं शादी का लड्डू जो नहीं खाता है वो पछताता है और जो खाता है वो भी पछताता है. इस लड्डू नहीं खाने से कहीं ज्यादा बेहतर है कि इसे खाकर ही पछताया जाए.
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फायदे : 

दोस्तों आज के समाज में उस व्यक्ति को जिम्मेदार माना जाता है जो शादीशुदा होता है.

दोस्तों शादीशुदा हो ना ज़िम्मेदारी की तरफ पहला कदम बढ़ाने जैसा होता है शादीशुदा होने पर आपकी विश्वसनीयता बढ़ जाती है
प्राइवेट सेक्टर की कई अच्छी कंपनियों में शादीशुदा व्यक्ति को यह समझा जाता है कि यह लंबे समय तक रुक कर कार्य करेगा उसे वरीयता दी जाती है.


आपको हमेशा इस बात की संतुष्टि रहती है कि आपकी चिंता और आपका ख्याल रखने वाला साथी हमेशा आपके पास मौजूद है.

चाहे वह लड़का हो या लड़की हो जब तक वह शादीशुदा नहीं हो जाते हैं तब तक उनसे यही प्रश्न रहता है-- उन्होंने अभी तक शादी क्यों नहीं की, इस प्रश्न से छुटकारा मिल जाता है.

शादीशुदा होने पर एक लड़की और एक लड़की को सामाजिक तौर पर और कानूनी तौर पर साथ रहने की मान्यता मिलती है.
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शादी किसी भी इंसान के जीवन में घटने वाली एक सुखद घटना है जिसे ज़िंदगी भर कोई नहीं भूल सकता.
अगर शादी से पहले लड़का और लड़की साथ घूमते हुए देखे जाने पर अच्छा नहीं समझा जाता है,  जबकि शादी हो जाने के बाद साथ घूमने पर देखा जाना ही अच्छा समझा जाता है. अकेले घूमने पर समाज में पूछा जाता है अकेले क्यों घूम रहे हो.

शादी के बाद आप अपने पार्टनर से अपने सीक्रेट बांट सकते हैं और इस बात की उम्मीद भी कर सकते हैं कि वह उसी तक सीमित रहेंगे.

शादी के बाद आपके जीवन में एक ऐसा साथी होता है जिससे आप अपने गम और खुशी दोनों बिना झिझक बांट सकते हैं.

आपके दुखों को अपना दुख समझने वाला आपके साथ कोई होता है.

दुख और विपत्ति के समय सिर्फ वही एक ऐसा पार्टनर आपके पास होता है जो मजबूती से आपके साथ खड़ा रहता है. वरना तो अच्छे-अच्छे साथ छोड़ जाते हैं.

दुख और विपत्ति के समय सिर्फ वही एक ऐसा पार्टनर आपके पास होता है जो मजबूती से आपके साथ खड़ा रहता है वरना तो अच्छे-अच्छे साथ छोड़ जाते हैं.

आपके पास ऐसा साथी होता है जो न सिर्फ आपके दिल के करीब होता है बल्कि उसका मिलन आपकी आत्मा से होता है.

घर की जिम्मेदारी एक व्यक्ति और एक व्यक्ति आर्थिक जिम्मेदारी उठाता है और मिल बांटकर जिम्मेदारी उठाते हैं जिससे सब कुछ बड़ा आसान हो जाता है.

शादी ही एक ऐसा बंधन है जो आपको एक बेहतर इंसान बनाती है.

शादी के बाद ही आपको आपके साथी के साथ शारीरिक संबंधों को मान्यता मिलती है और आप अपनी सेक्स लाइफ का आनंद ले पाते हैं.

शादी के बंधन में बंधने के बाद ही आपको मां-बाप बनने का सौभाग्य मिलता है. आप कानूनी तौर पर माता-पिता बन सकते हैं.
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शादी के बाद प्यार की तलाश में आपको यहां-वहां भटकना नहीं पड़ता है क्योंकि आप जिससे प्यार करते हैं वो साथी हरदम आपके साथ ही होता है.


शादी के बाद आपका तनाव कम होने लगता है इतना ही नहीं शादीशुदा होने से कई बिमारियों के खतरे से खुद को बचाने में आपको मदद मिलती है.

आप शादी करते हैं तो इससे सबसे ज्यादा खुशी आपके माता-पिता को मिलती है और वो आपकी शादी कराकर अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करते हैं.

शादीशुदा होने के बाद आपको पता ही नहीं चलेगा कि आपका टाइम कैसे बीत जाता है.
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शादीशुदा होने के बाद आप की गलतियों को रोकने वाला कोई होता है. शादीशुदा होने के बाद व्यक्ति को गलतियां करने से डर लगता है.

शादीशुदा होने के बाद व्यक्ति को समाज की असली पहचान होती है और समाज की कुछ बुराइयां जो उसे शादी से पहले अच्छी लगती थी अब बुरी लगने लगती हैं. व्यक्ति को सही और गलत का भेद समझ आने लगता है.

गौरतलब है कि शादी के बाद आप बहुत से नए रिश्तों से जुड़ते हैं जिन्हें निभाने का अपना अलग ही मज़ा होता है और हमे यकीन है कि शादी के इतने सारे फायदे जानने के बाद आप भी शादी का लड्डू एक बार खाना ज़रूर चाहेंगे.

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

प्रेगनेंसी के दौरान कैसे सोए किस प्रकार की पोजीशन रखें

नमस्कार दोस्तों आज के इस POST के माध्यम से हम चर्चा करने वाले हैं कि किसी भी गर्भवती स्त्री को प्रेग्नेंसी के समय सोते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किस प्रकार से सोना चाहिए.
दोस्तों इस टॉपिक पर हम से काफी बार पूछा जाता है. आज हम अपनी इस टॉपिक में आपसे क्रमवार तरीके से इस संबंध में चर्चा करेंगे ताकि आपको सब कुछ बड़े अच्छे से क्लियर हो पाए आइए चर्चा करते हैं POST शुरू करते हैं

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दोस्तों किसी भी गर्भवती महिला को डॉक्टर पीठ के बल और पेट के बल सोने से मना करते हैं क्योंकि यह दोनों स्थितियां गर्भस्थ शिशु के लिए ठीक नहीं होती हैं. हम यहां आपको कुछ अवस्थाएं बता बता रहे हैं. किस प्रकार से सोना है यह आपको पहली दूसरी और तीसरी तिमाही में काफी फायदा करेंगी.
आइए चर्चा करते हैं किस प्रकार से सोना काफी फायदेमंद रहता है ---
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किसी भी गर्भवती महिलाओं को पेट के बल या पीठ के बल लेटने से यही ज्यादा बेहतर रहता है कि वह करवट लेकर सोए.  डॉक्टर्स के अनुसार बाई तरफ करवट लेकर सोना सबसे ज्यादा बेहतर रहता है क्योंकि दाईं तरफ करवट लेकर अगर आप सोएंगे तो गर्भाशय का भार  आपके लीवर पर पड़ता है जो ठीक नहीं है.

बाई और करवट लेकर सोने से एक फायदा और यह होता है, कि शिशु को प्लेसेंटा के जरिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते रहते हैं, और रक्त का प्रभाव भी बच्चे के लिए सामान्य रहता है जो मां और शिशु दोनों के लिए अच्छा है. क्योंकि सोते समय ही बच्चे को सबसे ज्यादा पोषण मिलता है इस अवस्था में सही पोजीशन में सोना बहुत ज्यादा जरूरी है.

हम यह बात जानते हैं कि एक ही करवट सोना वह भी लंबे समय तक काफी मुश्किल होता है आप समय-समय पर दाहिनी करवट लेते रहिए. लेकिन आपको कुछ ही समय के लिए सिर्फ शरीर के बाएं अंगों को राहत देने के लिए आराम देने के लिए दाहिनी करवट लेनी है. आपको बाइक करवट सोना ही फायदेमंद है. कोशिश करें कि ज्यादातर बाईं ओर करवट लेकर ही सोएं। साथ ही घुटनों को मोड़कर सोएं और दोनों घुटनों के नीचे तकिया रख सकते हैं.
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अगर आप पीठ के बल लेटना भी चाहते हैं तो आप आधे बैठे वाली मुद्रा में लेटे जाने की अपनी कमर के ऊपरी हिस्से के नीचे आप तकियों  को रखें एक से ज्यादा तकिए रखने हैं.  इससे क्या होगा कि आपके सीने में जो जलन होती है उससे बचा जा सकता है ध्यान रहे अगर आप पहली तिमाही में ही बाई करवट सोने की आदत डाल लेते हैं तो आगे चलकर आपको समस्या नहीं होगी.
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इस मुद्रा से करें परहेज

प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में आप पीठ के बल लेट सकती हैं लेकिन ध्यान रहे फिर भी आप ज्यादा समय ना लेटे इस आदत को छोड़ें.
पीठ के बल ज्यादा देर तक लेटने से गर्भाशय का दबाव पीठ की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डियों व रक्त नलियों पर पड़ सकता है। इससे शिशु तक रक्त का संचार ठीक तरह से नहीं हो पाता.
अगर आप सही तरीके से नहीं लेटते हैं तो मांसपेशियों में दर्द व सूजन का सामना करना पड़ सकता है और रक्षा भी कम हो सकता है. आप का ब्लड प्रेशर कम हो सकता है और आप को सही तरीके से नींद न आने की समस्या का सामना करना पड़ता है.

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गर्भावस्था के दौरान अच्छी और गहरी नींद के लिए टिप्स

गर्भवती महिलाओं की रिक्वायरमेंट को देखते हुए मार्केट में महिलाओं के लिए स्पेशल तकिए आते हैं इन C आकार के तकिए कहा जाता है आप गर्भावस्था में सोने के लिए इन तकियों का इस्तेमाल कर सकती हैं. एक ही तकिया आपकी सभी परेशानियों को दूर कर देगा आपको एक से ज्यादा तकिया रखने की आवश्यकता नहीं होगी.
C आकार तकिया नहीं है तो,  सोते समय एक से अधिक तकियों का इस्तेमाल करें। एक तकिया अपने घुटनों के बीच, तो एक अपने पेट के नीचे रखें। इससे आपको आराम मिलेगा और अच्छी नींद आएगी
रात्रि समय अगर आपको अच्छी नींद लेनी है तो आप को भरपेट भोजन रात के समय नहीं करना चाहिए अपने भोजन में आपको तला भुना फास्ट फूड इत्यादि भी नहीं लेना चाहिए आप शुद्ध पोस्टिक हल्का-फुल्का भोजन ले और कोशिश करें भोजन आप सूर्यास्त के समय ही खा ले नहीं तो आप नहीं तो आप भोजन सोने से दो ढाई घंटा पहले खा ले. अच्छी नींद के लिए यह बहुत जरूरी है.
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प्रेग्नेंसी के समय महिला की पाचन शक्ति थोड़ा कमजोर रहती है तो इस वजह से जल्दी खाना खाना है ताकि सोने से पहले ही आपका भोजन पच जाए.

सुबह के समय योग व हल्के-फुल्के व्यायाम करने से भी रात को अच्छी नींद आ सकती है
जिस कमरे और बेड पर आप सोएं वह साफ-सुथरा और माहौल शांत होना चाहिए. साथ ही साथ आपका कमरा हवादार भी होना चाहिए जिसमें वायु का प्रवाह बना रहे.

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अगर आपके पास सुविधा है तो आप हाथ पैर गर्दन अपनी मांसपेशियों की मालिश करवा सकती है जहां आपको थोड़ा सा भारीपन महसूस होता है यह आपको रात्रि समय सोने में काफी मदद करेगी. क्योंकि मालिश करने से शरीर को आराम मिलता है.
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गहरी और लंबी सांसें लेने से भी मांसपेशियों में आए तनाव से राहत मिलती है और ह्रदय की गति सामान्य होती है, जिस कारण नींद आने में समस्या नहीं होती.

आप इस बात का विशेष ध्यान रखें रात्रि समय घर में किसी भी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए ऐसी अवस्था में भी नींद नहीं आती है.

प्रेगनेंसी में नींद पर्याप्त सोना क्यों जरूरी है

नमस्कार दोस्तों आज के इस POST के माध्यम से हम चर्चा करने वाले हैं प्रेग्नेंसी के समय महिला को किस प्रकार सोना चाहिए इस संबंध में हम अपने इस POST के माध्यम से चर्चा करेंगे कि
गर्भावस्था में सोना क्यों मुश्किल होता है
गर्भावस्था के दौरान कितनी नींद हमें लेनी चाहिए
क्या कम नींद प्रेगनेंसी में नुकसान पहुंचा सकती है
गर्भावस्था में नींद ना आने से क्या समस्याएं होती हैं

इन सब विषयों पर अपने इस POST के माध्यम से चर्चा करने वाले आइए चर्चा करते हैं

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दोस्त प्रेग्नेंसी के समय नींद बहुत ही महत्वपूर्ण होती है जब महिला सोती है तो उसमें बच्चे का विकास बहुत अच्छे से होता है क्योंकि उस वक्त शरीर को सिर्फ और सिर्फ एक कार्य रहता है वह होता है बच्चे की देखभाल तो आज मैं अपनी इस POST के माध्यम से नींद को लेकर चर्चा करने वाले हैं—
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गर्भावस्था में सोना क्यों मुश्किल होता है
प्रेगनेंसी के दौरान महिला के भूल का आकार बढ़ता जाता है महिला के स्तनों का आकार भी बढ़ता है. महिला को भारीपन महसूस होता. रात को बार बार पेशाब जाना पड़ता है, पेशाब जैसा महसूस होता है कई बार सांस लेने में भी दिक्कत आ जाती है. और डॉक्टर पेट के बल सोने की सलाह देते हैं. हिला के शरीर में हार्मोन काफी तेजी से बदलते रहते हैं जिसकी वजह से महिला का मन भी खराब रहता है. इस वजह से प्रेगनेंसी के दौरान सोने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है.


गर्भावस्था के दौरान कितनी नींद हमें लेनी चाहिए
डॉक्टर्स के अनुसार 18 से 64 वर्ष तक की आयु के लोगों को 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए. लेकिन भाई अगर गर्भवती महिला की बात करें तो उसे थोड़ा सा ज्यादा सोना चाहिए और साथ ही साथ दिन में भी कुछ घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए.

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क्या कम नींद प्रेगनेंसी में नुकसान पहुंचा सकती है
महिला के गर्भ में पल रहे शिशु को ऑक्सीजन और पोषक तत्व की जरूरत होती है. कई बार महिला के जागते समय बच्चे की आवश्यक जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं. भ्रूण की हृदय गति कम हो जाती है, उसे खून की कमी हो सकती है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब गर्भवती महिला सो रही होती है, तो उस वक्त भ्रूण तक रक्त का संचार, ऑक्सीजन का प्रवाह तेज गति से होता है क्योंकि शरीर को केवल एक ही कार्य होता है बच्चे की देखभाल और इस वक्त शरीर में हारमोंस का निर्माण भी नहीं हो रहा होता है तो बच्चे के विकास में अगर कुछ कमी रह गई होती है या पोषण में कमी रह गई होती है तो वह सोते समय पूरी हो जाती है.

गर्भावस्था में नींद ना आने से क्या समस्याएं होती हैं
प्रेग्नेंसी के दौरान रात को अच्छी तरह न सोने से गर्भवती को उच्च रक्तचाप व गर्भावधि मधुमेह जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है.  इतना ही नहीं स्लिप एप्निया, अधिक वजन, अनियंत्रित ग्लूकोज का स्तर व भूख बढ़ने जैसी समस्या भी हो सकती है. इन सबके साथ साथ में गर्भस्थ शिशु में ब्लड की सप्लाई और ऑक्सीजन का प्रवाह, उसका संचार सही प्रकार से नहीं होता है. जिसके कारण गर्भ शिशु के विकास और रुकने का अंदेशा बना रहता है और कभी-कभी समय से पहले भी डिलीवरी की समस्या देखने में आती है.
और भी दूसरे प्रकार की समस्याएं नजर आती हैं जो इस प्रकार से हैं.

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इम्यून सिस्टम प्रभावित हो सकता है।
सिजेरियन डिलीवरी की आशंका बढ़ सकती है।
गर्भवती महिला को तनाव तक का सामना करना पड़ सकता है।
गर्भवती महिला को दिनभर ज्यादा थकावट महसूस हो सकती है।
जन्म के दौरान शिशु का वजन कम हो सकता है।
त्वचा पर झाइयां नजर आ सकती हैं।
किसी भी काम को करने में एकाग्रता कम हो सकती है।

शनिवार, 2 नवंबर 2019

गर्भावस्था के दौरान मिठाई खाने की लालसा

नमस्कार दोस्तों आज के इस POST के माध्यम से हम चर्चा करने वाले हैं गर्भावस्था में मिठाई की इच्छा को लेकर कभी-कभी क्या होता है कि शरीर के अंदर हार्मोन परिवर्तन की वजह से महिला को कुछ चीजें खाने की इच्छा बहुत ज्यादा होती है कुछ चीजें खाने की इच्छा बिल्कुल नहीं होती है महिलाओं को कभी कभी ऐसा भी होता है कि उसे अनएक्सपेक्टेड चीज खाने का मन करने लगता है ऐसे ही अगर प्रेग्नेंसी के समय महिला को मीठा खाने की इच्छा बहुत ज्यादा हो तो उसे क्या करना चाहिए क्या मीठा खाना उसके लिए फायदेमंद है इस विषय पर आज हम चर्चा करेंगे.

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प्रेग्नेंसी के समय महिला के शरीर में हार्मोन के परिवर्तन बहुत ज्यादा होते हैं इस वजह से महिला के लिए बहुत सी चीजें बदल जाती हैं कभी-कभी महिला को मीठा खाने का बहुत ज्यादा मन करने लगता है मीठा ना मिलने पर वह परेशान भी हो जाती है क्या ज्यादा मीठा खाना प्रेगनेंसी में फायदेमंद है या नुकसानदायक है इस बात पर हम अपने इस POST के माध्यम से चर्चा करने वाले हैं.

प्रेगनेंसी में मीठा खाने की इच्छा क्यों होती है
प्रेग्नेंसी के समय महिला का इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर रहता है आंतों में गुड बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और यीस्ट और फंगल बढ़ जाने की वजह से मीठा खाने के प्रति ज्यादा इच्छा हो सकती है.
अगर हम किसी कारणवश अपने शरीर में प्रोटीन को पर्याप्त मात्रा में नहीं ले रहे होते हैं तो शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बिगड़ जाता है फिर माइंड ऐसे केमिकल रिलीज करता है जो मीठे की इच्छा को बढ़ाते हैं.
थायराइड की समस्या के कारण भी गर्भवती महिला को थकावट और कमजोरी महसूस होती है. जिससे ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है. और मीठा खाने की इच्छा होने लगती है.
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अगर प्रेगनेंसी में किसी महिला को तनाव होने लगता है तो इसके कारण एड्रीनालीन और कार्टिलेज नामक हार्मोन उत्तेजित हो जाते हैं, जिसकी वजह से मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है,
दोस्तों जैसे किसी सरकार को चलाने के लिए नेता मुखौटाहोते हैं और असली कार्य उसके पीछे आईएएस अधिकारी करते हैं वैसे ही हमारे शरीर को चलाने में असली संचलन हमारे शरीर में उपस्थित हारमोंस करते हैं.
प्रेग्नेंसी के समय महिला के शरीर में काफी ज्यादा हार्मोन अल उथल-पुथल होती है जिसकी वजह से कुछ हारमोंस अधिक उत्पादित होते हैं या कम उत्पादित होते हैं इन हारमोंस में आई डिसबैलेंस की वजह से भी कभी-कभी प्रेग्नेंट महिला की मीठे के प्रति काफी इच्छा बढ़ जाती है.

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मीठा खाने के कुछ फायदे भी हैं 
एक तो अगर आप मीठा खाने की इच्छा होती है आपको तो आपको संतुष्टि प्राप्त होती है.
मीठे में काफी ज्यादा कैलोरी पाई जाती है जिसकी वजह से आपको काफी एनर्जी प्राप्त होती है.
मीठा खाने से आपको रक्तचाप की समस्या में थोड़ी सी राहत मिल सकती है रक्तचाप हल्का कंट्रोल में रहता है.
एक रिसर्च के अनुसार अगर जो व्यक्ति थोड़ा ज्यादा मीठा खाता है उसे स्ट्रोक आने का खतरा कम हो जाता है.
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दोस्तों मीठा खाने के फायदे से ज्यादा नुकसान होते हैं अब हम आपको बताते हैं कि यह आपको प्रेगनेंसी में क्यों नहीं खाना चाहिए यह कितना नुकसान दे सकता है.

दोस्तो हमारे शरीर में मीठे को पचाने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है आप जितना ज्यादा मीठा खाओगे उतना ज्यादा कैल्शियम मीठे को पचाने में खर्च हो जाएगा और प्रेग्नेंसी के समय महिला को कैल्शियम की आवश्यकता बहुत ज्यादा होती है क्योंकि कैल्शियम महिला के साथ साथ बच्चे की हड्डियों के विकास के लिए बहुत ज्यादा जरूरी होता है अगर ऐसे में आप मीठा ज्यादा खाएंगे तो बच्चे के लिए कैल्शियम कम पड़ जाएगा और बच्चे का विकास ठीक ढंग से नहीं हो पाएगा इसलिए आपको प्रेग्नेंसी के समय मीठे से बचना चाहिए खासकर चीनी और चीनी से बने.

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दोस्तों मीठे के अंदर कैलोरी बहुत ज्यादा होती है और हमारे शरीर को सिर्फ इतनी ही कैलोरी की आवश्यकता होती है जितनी कैलोरी हम 1 दिन में खपत कर पाए अगर हम ज्यादा कैलोरी इंटेक करते हैं या लेते हैं तो वह हमारे शरीर में चर्बी के रूप में एकत्र होने लगती है जिसका प्रयोग हम भविष्य में कैलोरी ना मिलने पर करेंगे पर ऐसा कभी जल्दी से होता नहीं है. यह कैलोरी हमें मोटापे का शिकार बना देती है प्रेग्नेंसी के समय महिला का वजन तो बढ़ना चाहिए लेकिन नियमित और संयमित तरीके से ही बढ़ना चाहिए ज्यादा मीठा खाना अनियमित तरीके से वजन को बढ़ा सकता है जो काफी नुकसानदायक है.
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मीठा खाने से हमारे शरीर की इम्यून पावर कमजोर होती जाती है जिसके कारण हमें छोटे-मोटे रोग वायरल संक्रमण बहुत जल्दी प्रभावित करते हैं तो इसलिए भी हमें मीठा खाने से बचना चाहिए.

ग्नेंसी के समय कुछ केसेस के अंदर Gestational diabetes होने का खतरा रहता है ऐसे में अगर हम ज्यादा मीठा खाना पसंद करेंगे तो यह प्रेगनेंसी में Gestational diabetes की तरफ एक कदम और बढ़ाने जैसा होगा.

जैसा कि हमने बताया कि मीठा खाने से शरीर का कैल्शियम उसे पचाने के लिए खर्च होता है अगर हम मीठा ज्यादा खाते हैं तो इससे हमारे दांत का कैल्शियम भी आपके द्वारा खाए जाने वाले मीठे की भेंट चढ़ने लगता है दांत कमजोर होने लगते हैं और हम सभी जानते हैं कि दांत एक बार गिरने के बाद दोबारा नहीं आते हैं.

गर्भावस्था में प्रसव के संकेत

दोस्तों आज के इस POST में हम आपसे बात करने वाले हैं डिलीवरी के समय को लेकर हम किस प्रकार से पता लगाएं की डिलीवरी का समय नजदीक आ गया है. डिलीवरी पेन होने वाले हैं.
दोस्तों इस चीज को लेकर महिलाएं बहुत ज्यादा आशंकित रहती हैं, डरी हुई होती है, डिलीवरी पेन को लेकर उनके मन में तरह-तरह की शंकाएं होती हैं. कई बार तो लेबर पेन से जुड़ी सही जानकारी के अभाव में गर्भवती महिलाएं गंभीर रूप से मानसिक तनाव का शिकार हो जाती हैं. हम बस यही बताना चाहते हैं कि Delivery pain तो होता ही है लेकिन इतना भी ज्यादा परेशानी नहीं होती है, जितनी परेशानी महिला को सोच सोच कर होती है.
आज हम आपसे लेबर पेन शुरू होने के समय को कैसे जाने उसके क्या-क्या लक्षण होते हैं इस संबंध में चर्चा करने वाले हैं.

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महिला की डिलीवरी पेन का सीधा संबंध महिला के डिलीवरी डेट से होता है. डिलीवरी डेट को निकालने का बड़ा ही सीधा तरीका है जिस दिन महिला के लास्ट पीरियड शुरू हुए थे, उस दिन से ठीक 40वें हफ्ते का आखरी दिन जो होता है उस दिन डिलीवरी डेट मान ली जाती है.
अब ऐसा भी नहीं है कि जो डेट निकल कर आई है उसी दिन डिलीवरी प्रिंट शुरू हो जाए उससे दो-चार दिन आगे या पीछे कभी-कभी दस से 12 दिन आगे पीछे भी लेबर पेन शुरू हो सकते हैं.

जब भी किसी महिला को लेबर पेन या डिलीवरी पेन शुरू होते हैं उसके कुछ लक्षण नजर आने लगते हैं जिनको जानकर आप बड़ी आसानी से अपनी डिलीवरी डेट का पता लगा पाएंगे.

दोस्तों हम जो लक्षण आपको यहां बता रहे हैं जरूरी नहीं कि यह सभी के सभी लक्षण एक ही महिला को नजर आए इनमें से कुछ लक्षण किसी एक महिला को नजर आ सकते हैं और दूसरे कुछ लक्षण किसी दूसरी महिला को नजर आ सकते हैं.
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महिला का पेट खराब होना
जैसे-जैसे महिला की डिलीवरी पेन का समय नजदीक आता जाता है वैसे वैसे महिला का पेट खराब हो सकता है या तो महिला को कब्ज की शिकायत हो जाती है या फिर डायरिया वगैरह हो जाता है.

ग्रीवा का आकार बदलना
जैसे-जैसे डिलीवरी का समय नजदीक आता जाता है वैसे वैसे महिला की ग्रीवा पतली होकर फैलने लगती है यह 10 सेंटीमीटर तक फैल सकती है इस लक्षण के आधार पर यह पहचाना जा सकता है कि डिलीवरी पेन में कुछ ही समय बचा है.


जोड़ों और मांसपेशियों में खिंचाव 
जैसे-जैसे डिलीवरी का समय नजदीक आता जाता है कुछ महिलाओं के जोड़ों और मांसपेशियों में खिंचाव सा महसूस होने लगता है यह डिलीवरी पेन का संकेत हो सकता है.

नींद का अधिक आना
प्रसव का समय पास आने पर गर्भवती महिलाओं को बहुत नींद आ सकती है। उन्हें कमज़ोरी भी महसूस हो सकती है. इस दौरान गर्भवती महिलाएं बार-बार सोने की कोशिश करती हैं, लेकिन बेचैनी के कारण उन्हें सोने में परेशानी होती है. ये प्रसव के साथ-साथ लेबर पेन शुरू होने के समय के करीब आने का लक्षण हो सकता है.
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शिशु का नीचे की ओर आना
प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में शिशु धीरे-धीरे नीचे की ओर सरकना शुरू हो जाता है पेट का ऊपरी हिस्सा खाली खाली सा महसूस होने लगता है समझ लीजिए आपके डिलीवरी का समय नजदीक आ गया है लेबर पेन होने में कुछ ही समय बाकी है.

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म्यूकस के साथ खून का आना
गर्भावस्था के पहले महीने में म्यूकस के साथ खून का आना प्रसव प्रक्रिया की शुरुआत होने का लक्षण हो सकता है. जब गर्भाशय ग्रीवा प्रसव के लिए तैयार होने के लिए परिपक्व होना शुरू करती है, तो म्यूकस प्लग बाहर निकलने लगता है, और इसके साथ रक्त भी आ सकता है.
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महिला की एनर्जी का बढ़ना 
महिला की एलर्जी का बढ़ना एनर्जी कभी-कभी प्रेग्नेंसी के अंतिम समय में यह भी देखा गया है, कि महिलाओं की एनर्जी एकाएक बढ़ जाती है. और वह अपने आप को काफी एक्टिव महसूस करने लगती हैं यह डिलीवरी से पहले का समय होता है जब आपको डिलीवरी की तैयारी करनी होती है.

त्वरित भावनात्मक परिवर्तन
प्रेगनेंसी के अंतिम समय में कुछ महिलाओं के साथ ऐसा होता है कि उनका जो भावनात्मक स्तर है उसमें काफी उतार-चढ़ाव आने लगता है कभी-कभी वह बहुत ज्यादा भावुक हो जाती है कभी-कभी चिड़चिड़ी भी हो जाती हैं. यह सब हारमोंस में तेजी से आने वाले परिवर्तन की वजह से होता है समझ जाइए कि लेबर पेन शुरू होने वाले हैं.
अगर आपको प्रेगनेंसी के अंतिम दिनों में इन सब में से कुछ लक्षण नजर आने वाले होते हैं तो समझ जाइए कि आपको डिलीवरी पेन शुरू होने वाले हैं.