Pregnancy & Care

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सोमवार, 27 जनवरी 2020

दूसरे महीने गर्भावस्था का ध्यान कैसे रखें – Two months pregnant care

नमस्कार दोस्तों हमने इससे भी पहले एक ARTICLE दिया था जिसमें हमने आपको दूसरे महीने में किन-किन बातों को जानना चाहिए उस संबंध में जानकारी दी थी आगे की जानकारी हम आपको इस ARTICLE के माध्यम से देने जा रहे हैं
इस ARTICLE के माध्यम से हम चर्चा करेंगे कि
आपकी डॉक्टर से मीटिंग
कौन-कौन से टेस्ट इस महीने डॉक्टर आपसे करा सकते हैं
गर्भावस्था में क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए क्या करें क्या नहीं
करें गर्भावस्था के दूसरे महीने होने वाली समस्याएं क्या-क्या है
पिता के लिए कुछ टिप्स और
अन्य कुछ बातें हम आपसे इस ARTICLE के माध्यम से चर्चा करेंगे

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आपकी डॉक्टर से मीटिंग - Doctor se meeting 

दूसरा महीना लगते ही आपको पता चल जाता है कि आप गर्भवती हैं तो आपको अपने डॉक्टर से कंसल्ट करने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. उससे अपनी मीटिंग फिक्स कीजिए. आप डॉक्टर के पास जाकर अपने मन में आने वाले बहुत सारे प्रश्नों के जवाब उनसे पूछ सकती हैं. जो आपकी और आपके बच्चे के स्वास्थ्य से संबंधित होंगे और आप दोनों के स्वस्थ रखने के लिए काफी कारगर भी होंगे.  डॉक्टर इस वक्त आपको आपका चेकअप करके आपके लिए कुछ फूड सप्लीमेंट वगैरा आपको खाने के लिए दे सकते हैं, या आपको सजेस्ट कर सकते हैं. जिसमें मुख्यत आयरन और फोलिक एसिड के साथ-साथ कैल्शियम की पूर्ति के लिए कुछ होगा.

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प्रेगनेंसी के दूसरे महीने के टेस्ट - Pregnancy Second Month Suggested Tests

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में महिला के शरीर की स्थिति को जानने के लिए या उसके द्वारा अपने बारे में दिए गए ब्यौरे को परखने के बाद डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट सजेस्ट कर सकते हैं –
आपको संक्रमण की आशंका के चलते डॉक्टर आपको यूरिन टेस्ट बता सकते हैं
आपके शरीर में शुगर के स्तर को जानने के लिए डॉक्टर शुगर टेस्ट भी करवा सकते हैं
आपके शरीर में उच्च रक्तचाप  की समस्या व किडनी की स्थिति को जानने के लिए प्रोटीन टेस्ट भी डॉक्टर से जिस कर सकते हैं
आपके रक्त की जांच भी हो सकती है जिसमें हिमोग्लोबिन और आयरन के स्तर को जांचा जाएगा हिमोग्लोबिन अकाउंट किया जाएगा
ब्लड के द्वारा भी, संक्रमण तो नहीं है इसकी जांच की जा सकती है
चिकन पॉक्स और रूबेला की जांच भी हो सकती है
साथ ही महिला के वजन को भी जांचा जाएगा
अगर डॉक्टर्स को आशंका भी तो आपका थायराइड टेस्ट भी कराया जाएगा
किसी विशेष परिस्थिति में या किसी बीमारी के चलते बच्चे की सुरक्षा के दृष्टिकोण से और दूसरे प्रकार के बहुत सारे टेस्ट भी कराए जा सकते हैं लेकिन यह वह टेस्ट बड़े ही स्पेसिफिक होते हैं विशेष परिस्थितियों में कराए जाते हैं
जो अभी हमने बताएं नॉर्मल यह टेस्ट करवाए जाते हैं आजकल एड्स का टेस्ट भी बहुत कॉमन हो गया है इसको भी स्टैंडर्ड मानकर कराया जाता है यह पति और पत्नी दोनों का होता है.

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प्रेगनेंसी के दूसरे महीने की सावधानियां - pregnancy ke doosre Month ki Savdhaniya

दूसरा महीना शुरू हो गया है महिला को कुछ विशेष प्रकार के ध्यान भी अपनी लाइफ स्टाइल में रखने होंगे
इस महीने स्तनों में भारीपन आना शुरू हो जाता है तो इसलिए महिला को सपोर्ट इनरवियर पहनना शुरू करना चाहिए
भोजन को एक बार करने की जगह दिन में थोड़ा थोड़ा कई बार खाएं. इससे एक पचने में आसानी होती है. क्योंकि प्रेगनेंसी हारमोंस के चलते पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है.
आप डॉक्टर की सलाह पर फोलिक एसिड या अन्य अनुपूरक ले सकते हैं.
आपको खूब सारा पानी पीना चाहिए जूस पीना चाहिए खुद को हाइड्रेट रखना चाहिए.
आप जो भी सब्जियां फल खाते हैं या सब्जियां बनाते हैं उन्हें पहले अच्छी तरह से धो लीजिए ताकि किसी भी संक्रमण का आपके शरीर तक पहुंचना मुश्किल हो जाए और उनका छिलका हटाकर ही खाएं
आपको ज्यादा से ज्यादा आराम करना है यह दोनों मां और गर्भ शिशु दोनों के लिए फायदेमंद है.
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अब आप गर्भवती हैं तो आपको कुछ चीजें बिलकुल छोड़नहीं होंगी
आप कोई भी दवा डॉक्टर से बिना पूछे बिल्कुल भी ना लें यह बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
कभी भी खाली पेट ना रहे इससे आपको जी मिचलाने की समस्या बढ़ सकती है.
आप जंक फूड, फास्ट फूड और तला, भुना, चिकना पदार्थ खाने से परहेज करें अब आपको स्वाद के लिए खाना नहीं खाना है.
अगर आप धूम्रपान करती हैं वैसे तो भारतीय महिलाएं यह सब ना के बराबर करती हैं अगर आप करती हैं, शराब लेते हैं या तंबाकू का सेवन करते हैं तो इसे तुरंत छोड़ दें.
गर्भावस्था के दूसरे महीने होने वाली समस्याएं - 2nd Month pregnancy issue 

दूसरे महीने आपको कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि आपके सीने में जलन हो सकती है हार्टबर्न की समस्या कही जाती है. और आप का पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है यह दोनों समस्याएं शरीर की मांसपेशियों के शिथिल पड़ने की वजह से होता है और प्रेगनेंसी हार्मोन इन्हें शिथिल कर देता है तो यह दिक्कत तो आएंगी.
कुछ महिलाओं को लगता है कि प्रेगनेंसी में नसें उभरकर नजर आ रही हैं उनमें उस नीली नीली नजर आती हैं तो यह बड़ी ही सामान्य बात है अगर आप की नसें उभरकर नजर आ रही है तो समझ लीजिए कि आपके शरीर में पानी की कमी नहीं है यह नसें सामान्य अवस्था में भी उभरकर दिखाई पढ़नी चाहिए इसका अर्थ यह होता है कि आपके शरीर में पानी की कमी नहीं है जिनके शरीर में पानी की कमी होती है उनकी नसें नहीं दिखाई पड़ती है तो यह नुकसानदायक बात है  .
आपको स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है साथ ही साथ मॉर्निंग सिकनेस की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है आपको चाहिए कि आप सुबह उठते ही कुछ थोड़ा सा हेल्थी खा ले मॉर्निंग सिकनेस की समस्या कंट्रोल करने में यह मदद करेगा आप बिस्तर पर से उठने के बाद थोड़ा घूमे यह भी फायदेमंद होगा.

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पिता के लिए टिप्स - Peeta ke lia Tips

होने वाले पिता के बच्चे को चाहिए कि वह गर्भवती महिला की खास देखभाल करें उनके लिए समय बढ़ाएं उन्हें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए इस बात का ध्यान रखें कि पत्नी ठीक से खाये. उसकी नींद पूरी हो.
आप सही डॉक्टर का पता लगाइए किस अस्पताल में डिलीवरी करानी है इसकी जानकारी निकालिए.


आपकी पत्नी का जो खाने का दिल करे वह ला कर दे. वह भोजन उसे आप उपलब्ध कराएं लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आपको केवल और केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा भोजन ही उपलब्ध कराना है सब कुछ नहीं.

शनिवार, 25 जनवरी 2020

प्रेगनेंसी के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए - Pregnancy Tips Part #15

नमस्कार दोस्तों दोस्तों परिवार में प्रेगनेंसी की खबर आते ही खुशियों की लहर दौड़ जाती है लेकिन महिला के लिए वही काफी जिम्मेदारी आ जाती है. आज के इस Article के माध्यम से हम प्रेगनेंसी में ध्यान रखने योग्य कुछ बातें आपको बताने जा रहे हैं दोस्तों से भी पहले हमने काफी कुछ आपको इस संबंध में बताया है इस Article  में हम आपको फिर से 5 और नई टिप्स देंगे जो प्रेगनेंसी में आपके काफी काम आ सकती हैं आइए चर्चा करते हैं Article शुरू करते हैं

दोस्तों प्रेगनेंसी वह समय होता है जिसमें अगर आप जितना अच्छा ध्यान रख लो इन फ्यूचर में आपको उतनी ही कम परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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सुबह शाम घूमने जाएं - Pregnancy me Evening Walk
प्रेग्नेंसी के समय जितना आराम करना जरूरी होता है उतना सुबह शाम वाकिंग करना भी आवश्यक होता है हमें प्रेग्नेंसी के समय अपनी दिनचर्या में लाइफस्टाइल में बैलेंस बनाकर रखना होता है इसके लिए आराम भी उतना ही जरूरी है और शरीर की आवश्यक एक्टिविटी भी उतनी ही जरूरी है बस ध्यान इतना रखना है कि प्रेगनेंसी में एफर्टलेस एक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान देना है जिसमें ज्यादा मेहनत की आवश्यकता नहीं होती है इसके लिए घूमने जाना एक बड़ा ही अच्छा ऑप्शन है महिला सुबह शाम मॉर्निंग ओर इवनिंग वॉक पर जा सकती हैं यह उनके स्वास्थ्य को अच्छा रखने में मदद करेगा.

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टाइमपास के लिए टीवी का आश्रय कम-से-कम ले - Pregnancy me TV kam he Dekhe
अब जैसे ही खबर लगती है तो महिला जिस गति से अपने कार्य कर रही होती है उतनी ही गति से उसे उन सब कार्यों से रोक दिया जाता है आराम करने की सलाह दी जाती है अब व्यक्ति आराम भी कितना करेगा क्योंकि हमारा दिमाग चल रहा है तो हमें कुछ ना कुछ तो करना ही होता है इसके लिए महिलाएं कभी-कभी टीवी का सहारा ले लेती हैं वैसे ही है बुरा आईडिया नहीं है लेकिन थोड़ा बहुत टीवी ही देखना चाहिए क्योंकि टीवी से निकलने वाली रेडिएशन हार्मफुल होती है जैसा कि आपको पता ही है कि कोई व्यक्ति ज्यादा टीवी देखता है तो उसको चश्मा लगने का उतना ही ज्यादा चांस होता है इसका मतलब उसमें से खतरनाक रेडिशन तो निकलती है तो यह आपके अत्यधिक कोमल गर्भस्थ शिशु के लिए भी खतरनाक है तो इसलिए टीवी कम से कम देखने की कोशिश करें दूसरे एफर्टलेस कार्य में अपना मन लगाएं
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पहचाने आपको किस भोजन से एलर्जी है - Nuksandayak Bhojan ko pahachane

अगर व्यक्ति यह पहचानने में अपना थोड़ा सा समय लगाए कि उसे कौन सी चीज खाने में नुकसान देती है कौन सी चीज फायदा देती है तो उसके लिए बहुत ज्यादा आसान हो जाता है वह बीमार कम पड़ता है कम शारीरिक नुकसान उठाता है प्रेग्नेंसी के समय यह सब चीजें बहुत ज्यादा जरूरी हो जाती है जैसे कि आप जानते हैं कि अगर आप दही खाते हैं और किसी भी मौसम में दही खाते हैं आपका गला बैठ जाता है जुखाम हो जाता है लेकिन आपको दही खाना बहुत पसंद है उसके बाद भी आप खाते हैं अगर इसी प्रकार की कोई सी भी सिचुएशन आपके सामने प्रेग्नेंसी के समय आती है तो आप ऐसी चीजें बिल्कुल भी ना खाए जो आपको पसंद है और आपको एलर्जी कर सकती हैं या किसी भी प्रकार का रोग दे सकती हैं खासकर प्रेग्नेंसी के समय आप इन सब चीजों को अवॉइड करें इनसे दूर रहे.

खुली चीजें ना खाएं - Road side Khula Bhojan na khaye

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को अक्सर थकावट और काम ना करने की इच्छा बहुत ज्यादा होती है यह सब प्रेगनेंसी हार्मोन की वजह से हो सकता है. इस वजह से महिला कभी-कभी बाहर से भोजन खाना पसंद करने लगती हैं. हम मानते हैं प्रेगनेंसी में आराम के अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन अगर आप बाहर खाना खाने जा रहे हैं तो अपने भोजन का विशेष ध्यान रखें. आप इस प्रकार का भोजन बिल्कुल भी ना खाए, जो सड़क किनारे या किसी होटल में खुले में रखा गया हो. इस प्रकार का भोजन संक्रमित हो सकता है क्योंकि प्रेग्नेंसी के समय महिला की इम्यूनिटी शक्ति, पावर थोड़ा कमजोर होती है. तो वह जल्दी इनफेक्शन पकड़ लेती है, अर्थात संक्रमण जल्दी हो जाता है. तो आपको इस प्रकार का भोजन बिल्कुल भी नहीं खाना है जो खुले में हो रखा हो जैसे कि समोसे, टिक्की, बर्गर, पाव भाजी या अन्य किसी प्रकार का भोजन.

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भोजन की स्वच्छता - Bhojan ki Safai 
अगर महिला घर पर ही भोजन तैयार करती है या घर की और कोई सदस्य भोजन तैयार करता है तो वह भोजन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखता है लेकिन अगर आप एकल परिवार में रह रहे हैं तो कभी-कभी ऐसी स्थिति आ जाती है कि बाहर से खाना पैक करवा कर मंगाने की आवश्यकता पड़ जाती है तो कोशिश करें कि आप किसी ब्रांडेड जगह से ही खाना मंगवाए जहां आपको इस बात की गारंटी हो कि आने वाला खाना शुद्ध और साफ होगा अगर आप स्वयं जाकर खाना लेकर आ रहे हैं तो इस बात को जरूर देखें कि जो खाना आपको पैक करके दिया जा रहा है या जहां से आप खाना ले रहे हैं वहां पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता हो.

प्रेगनेंसी के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए - Pregnancy Tips Part #14

नमस्कार दोस्तों आज के इस POST के माध्यम से हम आपके सामने फिर से एक बार कुछ प्रेगनेंसी टिप्स लेकर आपके सामने हाजिर हुए हैं तो हमने पहले भी बहुत सारे POSTस में बहुत सारी प्रेगनेंसी टिप्स आपको दी है हमें उम्मीद है कि आपने वह भी तो जरूर देखे होंगे और आपको मैं POST पसंद भी आए होंगे इसी कड़ी में हम आपके लिए एक और POST लेकर आए हैं जिसके अंदर हम आपको पांच टिप्स pregnancy को लेकर देने वाले हैं हमें उम्मीद है कि आप उनसे जरूर फायदा उठाएंगे आइए चर्चा करते हैं

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1. रात्रि में देर से ना सोए - Pregnancy me Raat ko Jaldi Sona hai

अगर आपको प्रेगनेंसी भी ना हो तो आयुर्वेद कहता है कि रात को जल्दी सोना चाहिए और सुबह को जल्दी उठना चाहिए. क्योंकि हमारा शरीर प्रकृति से ही प्रेरणा लेकर बना हुआ है और वह इसी प्रकृति के अनुसार कार्य भी करता है .  अगर आप प्रकृति के अनुसार नहीं चलेंगे तो कहीं ना कहीं शरीर कमजोर होता है. शरीर रोगी बनता है. इसलिए खासकर प्रेग्नेंसी के समय जब शरीर पर अतिरिक्त कार्यभार होता है तो हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम प्रकृति के अनुसार ही चलें. ताकि शरीर को प्रकृति के विरुद्ध जाकर अपना कार्य ना करना पड़े क्योंकि इससे अतिरिक्त ऊर्जा समाप्त होती है. इसलिए हमें शाम का खाना सूर्यास्त के समय खा लेना चाहिए और रात को 10:00 बजे से पहले सो जाना चाहिए और सुबह को सूर्योदय से पहले उठ भी जाना चाहिए. यह जीवन चर्या आप को स्वस्थ रखने में आप का बहुत योगदान करेगी.

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2. संयमित जीवन जिए  - Sayamit jeevan jeena hai

हमने प्रेगनेंसी को लेकर इतने सारे टिप्स अब तक अपने POSTस के माध्यम से दे दिए हैं कि इस point  का कोई सेंस नहीं बनता है क्योंकि अगर आप उन सब टिप्स को मान लेते हैं तो आपका जीवन स्वयं ही संयमित हो जाएगा लेकिन यहां संयमित जीवन से मतलब है कि आपको संयम अपने मन पर रखना है. आप मन से खुश होकर संयमित जीवन अपनाएं इससे आपके मन में बिल्कुल भी द्वंद नहीं रहेगा और मस्तिष्क को अतिरिक्त ऊर्जा सोचने में खर्च नहीं करनी पड़ेगी. हम आपको बता दें हमारा मस्तिष्क सबसे ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है हमें लगता है कि हम आराम से बैठे हैं इनर्जी हमारी बच रही होगी, लेकिन जब आप सोचते हैं तो बहुत ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है, इसलिए आपने जो संयम प्रेगनेंसी के दौरान रखा हुआ है उसको लेकर बिल्कुल भी चिंतित ना हो वरना आप को संयमित जीवन जीने का 100% लाभ नहीं मिलेगा.

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3. संबंध से परहेज बनाएं - Pregnancy me Avoid Relation with Partner

खासकर प्रेगनेंसी के शुरू के 3 महीने में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस समय बरुण सबसे ज्यादा नाजुक स्थिति में होता है और वह अपने आप को ताकतवर बना रहा होता है ऐसे में उसे किसी भी प्रकार का झटका नहीं आना चाहिए हम आपको बता दें सबसे ज्यादा मिसकैरेज प्रेगनेंसी के शुरू के 3 महीने में ही होते हैं इस दौरान आपको बहुत ज्यादा सावधानी रखने की आवश्यकता होती है

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4. मोबाइल का कम से कम प्रयोग करें - Pregnancy me Mobile ka kam use karee

यह पॉइंट बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है हमारे पास ऐसे प्रश्न आए हैं कि गर्भवती महिलाएं कहती है कि हम तो दिन भर आराम करते हैं लेकिन हमारे घर वाले हमें मोबाइल से दूर रहने के लिए कहते हैं, और अब बताइए इसमें क्या प्रॉब्लम है हम केवल मोबाइल ही तो प्रयोग कर रहे हैं. वैसे सीधा सीधा देखा जाए तो महिला को टाइम पास भी तो करना होता है. लेकिन हम आपको बता दें मोबाइल इसके लिए अच्छा ऑप्शन नहीं है. अगर आप एक्सपर्ट्स की राय माने तो मोबाइल का ज्यादा यूज करने से कई प्रकार की बीमारियां इंसान को हो जाती है. अब आप सोचिए इसका रेडिएशन कितना खतरनाक होता है और आप यह भी सोचिए कि एक गर्भस्थ शिशु जो कि अभी अत्यधिक नाजुक स्थिति में है, उसके लिए यह कितना खतरनाक होगा तो हमारा सजेशन आपको यही है कि जब बहुत ज्यादा जरूरी हो तभी आप मोबाइल का यूज करें, और एक बात का और विशेष ध्यान रखें कि मोबाइल आपके शरीर के आसपास भी नहीं होना चाहिए उसे अपने से दूर रखें. क्योंकि जब मोबाइल बंद रखा हुआ होता है उस वक्त भी उससे खतरनाक रेडिएशन निकल रही होती हैं.


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5. योगा करें - Pregnancy me Yoga 

जिसे प्रेगनेंसी के अंतिम समय में किसी प्रकार की परेशानी ना आए इसके लिए डॉक्टर से महिलाओं को कुछ विशेष प्रकार के योगा करने की सलाह देते हैं लेकिन प्रेगनेंसी में किसी भी प्रकार के व्यायाम प्रकार का व्यायाम या योगा हमेशा किसी एक्सपर्ट की सलाह पर और उसके सानिध्य में ही करना उचित होता है कभी भी अपनी सलाह पर या इंटरनेट की सलाह पर या किसी भी पुस्तक की इस सलाह पर आप स्वयं कोई भी योगा प्रेग्नेंसी के समय अप्लाई ना करें यह आपके लिए हानिकारक हो सकता है योगा फायदेमंद तो बहुत है लेकिन किसी एक्सपर्ट की राय के बिना ठीक नहीं क्योंकि वह आप की शारीरिक स्थिति को देखते हुए आपको योगा करने की विधि बताएंगे.

रविवार, 19 जनवरी 2020

गर्भावस्था के दूसरे महीने क्या खाएं क्या नहीं खाएं- 2nd month pregnancy diet

नमस्कार दोस्तों इस POST के माध्यम से हम सेकंड मंथ प्रेगनेंसी डाइट को लेकर चर्चा करने जा रहे हैं हमें प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में किस प्रकार के भोज्य पदार्थ अपने भोजन में शामिल करने चाहिए तथा हमें किस प्रकार के भोज्य पदार्थ को अपने भोजन में शामिल नहीं करना चाहिए इस विषय पर चर्चा करेंगे आईए चर्चा करते हैं
दोस्तों में सबसे पहले यह पता होना चाहिए कि हमें किस प्रकार के पोषक तत्व अपने शरीर में बच्चे की परवरिश के लिए चाहिए होते हैं उसी प्रकार से हमें अपने भोजन को तय करना चाहिए.
प्रेग्नेंसी के समय आप इस बात को बिल्कुल भी ना बोले कि आप अपने लिए ही नहीं बल्कि 2 लोगों के लिए खा रही है इसका मतलब यह नहीं है कि आप को दुगुना भोजन खाना शुरू कर देना है बल्कि आपको अपने भोजन में ऐसे भोज्य पदार्थ शामिल करने हैं जिनका पोषण अधिक हो अब आपको केवल स्वाद के लिए खाना नहीं खाना है --

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भोजन में प्रोटीन का ध्यान रखें - Bhojan me Protein ka dhyan Rakhe
जिन खाद्य पदार्थों में उच्चं मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है उन्हें अपनी डायट में शामिल करना ना भूलें. दालें, दूध व अंडे जैसी चीजों में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है साथ ही डायट में जूसी फलों का सेवन करना भी जरूरी है. आपके लिए पानी पीना जरूरी हैं. अब आप 8-10 गिलास तो पानी पिएं ही इससे ज्या दा भी पी सकती हैं.
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कैल्शियम युक्त भोजन - Calcium wala Bhojan 
किसी भी चीज के निर्माण में उसका आधार मजबूत होना चाहिए बच्चे के लिए उसका आधार उसकी हड्डियां होती है और हड्डियों के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है इसलिए हमें अपने भोजन में ऐसे भोज्य पदार्थों को खास तौर पर शामिल करना है जिनके अंदर कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है इस दौरान महिलाएं हर दिन 1000 मिग्रा कैल्शियम की मात्रा लेती हैं, तो भविष्य में कभी भी भ्रूण को ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना नहीं रहेगी। गर्भावस्था के दूसरे महीने में महिलाओं को रोजाना बादाम और अखरोट खाने चाहिए। हर एक बादाम में 70-80 ग्राम कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों के लिए खासतौर से बहुत फायदेमंद है.अगर आप किसी डॉक्टर की निगरानी में शुरू से ही है तो वह आपको कैल्शियम की टेबलेट भी खाने को बता सकती हैं. इसके लिए आप डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर आदि का सेवन कर सकती हैं.
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आयरन युक्त भोजन - Iron Wala Bjojan 
आयरन बच्चे के विकास में सीधे तौर पर और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से भूमिका निभाता है आयरन ब्लड में रेड सेल्स को बढ़ाने में मदद करता है और यही रेड सेल्स बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करती है. अगर शरीर में आयरन की कमी होती है तो रेड सेल्स की भी कमी हो जाती है इस कारण से बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषण भरपूर मात्रा में नहीं पहुंच पाता है. महिला एनीमिया की रोगी भी हो जाती है. तो प्रेगनेंसी के शुरुआती समय से ही महिला को अपने शरीर में आयरन की कमी नहीं होने देनी है डॉक्टर इसके लिए आयरन की टेबलेट भी बताते हैं आप ऐसा भोजन कीजिए जिसमें आयरन भरपूर मात्रा में हो जैसे कि सेब, पालक व हरी पत्तेदार सब्जियां खा सकती हैं.

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फोलेट से भरपूर खाद्य पदार्थ - Folat se Bharpoor Bhojan 
फोलेट एक ऐसा पोषक तत्व है जो बच्चे के संपूर्ण विकास में काफी महत्वपूर्ण रोल अदा करता .है सबसे अच्छा तो यह होता है कि जब आप प्रेगनेंसी के लिए सोच रहे हो तो 2 या 3 महीने पहले से ही फोलेट से भरपूर डाइट आपको लेनी शुरू कर देनी चाहिए या डॉक्टर की सलाह पर आप इसके कैप्सूल भी ले सकती हैं. फोलेट यानी फोलिक एसिड विटामिन-बी का एक प्रकार है, जो गर्भावस्था के शुरुआती चरण में लेना जरूरी है.  यह शिशु की रीढ़ की हड्डी और दिमागी विकास के लिए जरूरी है. इसके लिए आप पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, बींस, चिकन, मांस व साबुत अनाज का सेवन कर सकती हैं.
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गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या नहीं खाना चाहिए - Pregnancy ke Doosre mahene Kya nahi Khana 
ऐसे बहुत सारे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें प्रेगनेंसी में खाने से बचना चाहिए और दूसरा महीना प्रेगनेंसी के शुरुआत माना जाता है तो इसमें भी इन सब खाद्य पदार्थों को लेने से बचना है और आपको पता होना चाहिए कि यह खाद्य पदार्थ कौन कौन से हैं—

जैसे ही आप की प्रेगनेंसी शुरू होती है आपको कच्चे मांस को खाने से बचना चाहिए इसमें लिस्टएरिया नामक बैक्टीरिया होने का खतरा होता है जो बच्चे के विकास को बाधित कर सकता है.

प्रेगनेंसी में अंडा खाना काफी अच्छा समझा जाता है, पौष्टिक होता है. कई प्रकार के पोषक तत्व एक साथ आपको मिल जाते हैं, लेकिन कच्चा अंडा बिल्कुल बिना खाए. अंडे को अच्छे से उबालकर ही खाएं इसमें साल्मोनेला  नामक बैक्टीरिया का खतरा होता है इस वजह से गर्भवती महिला को उल्टी और दस्त लग सकते हैं.

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दूसरे महीने में सॉफ्ट चीज़ खाने से बचें, इससे बच्चे और मां दोनों को नुकसान हो सकता है.
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बहुत सारी ऐसी मछलियां होती हैं जिनमें मरकरी उच्च मात्रा में पाया जाता है गर्भवती स्त्री के लिए उच्च मरकरी खाद्य पदार्थ एक प्रकार से कह सकते हैं कि हल्के जहर का कार्य करते हैं. इस प्रकार के खाद्य पदार्थ बच्चे के विकास को बाधित कर सकते हैं. जिससे कई प्रकार की समस्याएं देखने में आ सकते हैं. आपको ऐसी मछलियों को पहचानना है जिसमें मरकरी उच्च मात्रा में होता है. आप ऐसी मछलियां ना खाएं अगर आप नहीं जानते तो तब तक मछलियां खाने से परहेज रखें जब तक आप ऐसी मछलियों के बारे में ना जान ले जिनमें मरकरी उच्च मात्रा में पाया जाता है. स्पेनिशमैकेरेल, मार्लिनयाशार्क, किंगमैकेरेल औरटाइलफिशजैसी मछलियोंमें मर्करी का स्तर ज़्यादा होता है.

आप प्रेगनेंसी कैसे में कच्चा दूध पीने से परहेज करें दूध को पीने से पहले उसे अच्छे से उबाल ले तभी प्रयोग करें.

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

दूसरे महीने गर्भावस्था का ध्यान कैसे रखें - Two months pregnant

नमस्कार दोस्तों आज के इस POST के माध्यम से हम चर्चा करने वाले हैं प्रेगनेंसी के दूसरे महीने को लेकर इस महीने में हमें क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए. इन सब विषय पर चर्चा करेंगे
जिन बातों पर चर्चा करने वाले हैं वह इस प्रकार से हैं ---

जब महिलाओं को दूसरा महीना होता है तो कौन से लक्षण नजर आते हैं.
प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में शरीर में कौन-कौन से बदलाव आपको नजर आ सकते हैं.
गर्भावस्था के दौरान दूसरे महीने में बच्चे का विकास उसका आकार क्या होता है.
कौन-कौन से व्यायाम हम कर सकते हैं
आदि विषय पर चर्चा करेंगे

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गर्भावस्था के दूसरे महीने में लक्षण - Garbhavastha ke Dusre mahine Mein Lakshan

प्रेगनेंसी के पहले महीने में एक बार तो महिला को पता नहीं चलता है कि वह प्रेग्नेंट है खासकर उन महिलाओं को जो पहली बार मां बन रही है लेकिन दूसरे महीने में उन्हें बहुत सारे ऐसे लक्षण नजर आने लगते हैं जिनसे यह स्पष्ट होने लगता है कि वह गर्भवती है.

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में शरीर के अंदर हार्मोनअल बदलाव काफी ज्यादा होते हैं इस वजह से महिला का अपर इनरवेयर टाइट होने लगता है इसमें घबराने की आवश्यकता बिल्कुल भी नहीं होती है, क्योंकि ऐसा प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन नाम की जो हार्मोन है जब वह शरीर में बढ़ते हैं तो उस कारण से स्तन का आकार बढ़ने लगता है तो ऐसा हो सकता है.

महिला का भोजन हजम नहीं होता है काफी परेशानी होती है.

पहले महीने की तरह बार-बार बाथरूम जाने की इच्छा भी काफी ज्यादा होती है.

शरीर में कई प्रकार के हार्मोन अल बदलाव की वजह से महिला के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है.
इसी दौरान महिला को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या जी मिचलाना उल्टी चक्कर आने जैसा महसूस होता है जिसे हम प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण मानते हैं.


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इस दौरान महिला के शरीर में कुछ अलग प्रकार के बदलाव भी नजर आते हैं जो महिलाएं पहली बार मां बन रही है उनके लिए थोड़ा सा अजीब हो सकता है --

इस दौरान थोड़ी थोड़ी देर बाद कुछ ना कुछ खाने का मन करने लगता है.

हल्का सा रक्तस्राव होता है, जिसे हम स्पॉटिंग भी कहते हैं दर्द और खुजलाहट की समस्या भी आ सकती है.
महिला का वजन बढ़ने लगता है.

शारीरिक बदलाव होने के कारण कभी-कभी कुछ महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है.

हार्मोन में बदलाव काफी बड़ी मात्रा में होते हैं इस दौरान महिला को कोई सी गंध पसंद आ सकती है और किसी दिन से बहुत ज्यादा परेशानी भी हो सकती है स्वाद बदल सकता है.

पेट खराब रहता है इस वजह से सीने में जलन की समस्या भी देखने में आ सकती है

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गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के बारे में जानना बेहद सुखद अनुभव है। हर मां अपने होने वाले बच्चे के विकास को महसूस करती है और उसे समझती है। जानिए गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है और उसका आकार कितना होता है.

गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास - Dusre mahine Garbhavastha mein bacche ka Vikas

दूसरे महीने में बच्चे का आकार लगभग 1 इंच के आस पास हो जाता है और उसका वजन भी 14 ग्राम तक हो सकता है इस दौरान बच्चे के नाक, आंख, लीवर और कान इत्यादि बनना शुरू हो जाते हैं और इसी महीने दांत बनने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है.

दूसरे महीने के अंत तक भ्रूण का हृदय काम करना शुरू कर देता है और दिमाग का विकास भी शुरू हो जाता है.

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में ध्यान रखें - Garbhavastha ke Dusre mahine Me Care

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में पता ही नहीं चलता है कि प्रेगनेंसी है या नहीं है बस आपको कुछ लक्षण और शरीर में थोड़ा सा अलग सा महसूस होता है बाकी कुछ और शारीरिक परेशानी नहीं होती है इस दौरान भ्रूण काफी नाजुक होता है और काफी ज्यादा ध्यान रखने की आवश्यकता होती है. इस बात का ध्यान रखें कि --
आपके गर्भस्थ शिशु को किसी भी प्रकार का झटका ना लगे.

सीढ़ियों से आराम से चढ़े उतरे.

यात्रा करते समय आप को झटका ना लगे इस बात का ध्यान रखें.

आपको इस बात का भी ध्यान रखना कि आपको किसी प्रकार का संक्रमण नहीं होना चाहिए कोई बीमारी नहीं लगनी चाहिए. आप बागवानी करने के बाद या अपने जानवरों से खेलने के बाद या किसी भी प्रकार की सफाई करने के बाद अपने हाथ और पैरों को अच्छी तरह से जरूर साफ करें.

भारी वजन ना उठाएं इन सब छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें.

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प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में व्यायाम - Preganensee ke Doosare Maheene me Vyaayaam

आगे चलकर आपकी प्रेगनेंसी स्वस्थ रहे इसलिए महिला को व्यायाम करना काफी जरूरी होता है खासकर दूसरे महीने में आपको लगभग हल्के-फुल्के व्यायाम करने चाहिए और 30 मिनट तक व्यायाम करने चाहिए हम आपको बता दें आप जो भी अब व्यायाम करें आप किसी एक्सपर्ट की निगरानी में ही करें अपने आप से, अपने मन से, इंटरनेट से पढ़कर व्यायाम ना करें.

आपको तकरीबन 20 मिनट रोजाना सर करने की कोशिश करनी चाहिए उसके लिए टाइम निकालें.
आप कुछ समय के लिए तैराकी भी कर सकती हैं क्योंकि अभी दूसरा ही महीना चल रहा है लेकिन आराम से करनी चाहिए.

 इसके अलावा अनुलोम विलोम ध्यान लगाने जैसे योगा भी कर सकती हैं आपको काफी फायदा होगा.
ध्यान रहे कि कमर के बल मुड़ने  वाले और पेट को मुड़ने  वाले व्यायाम करने से बचें जैसा कि हमने कहा कि किसी चिकित्सक की निगरानी में ही व्यायाम करें.

सोमवार, 13 जनवरी 2020

प्रेगनेंसी के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए - Pregnancy Tips Part #13

दोस्तों प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जिसमें महिलाओं को बहुत ज्यादा ध्यान रखने की आवश्यकता होती है. इसके लिए महिलाओं को पता होना चाहिए कि उन्हें किस प्रकार से अपनी लाइफ स्टाइल को बनाकर रखना है, ताकि गर्भस्थ शिशु और माता दोनों स्वस्थ रह पाए. दोस्तों हम आपको इस POST के माध्यम से कुछ टिप्स देने जा रहे हैं, जो आपको प्रेगनेंसी में आपका अपना ध्यान रखने में शिशु का ध्यान रखने में कुछ मदद अवश्य करेंगे चर्चा करते हैं.


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फुटवियर पर ध्यान दें - Footwear during pregnancy
आज का युग प्रेजेंटेशन का युग है खासकर महिलाओं की प्रेजेंटेशन पर बहुत ज्यादा फोकस किया जाता है. इसी कारण उसे महिलाओं की ड्रेस और जूते चप्पलों में भी बहुत ज्यादा फैशन आ गया है. इसके चलते तरह-तरह के जूते चप्पल
अलग-अलग डिजाइन के
अलग-अलग मटेरियल से बने
अलग-अलग लुक एंड फील के
आपको नजर आएंगे. फैशन के चलते इनमें कंफर्ट हो इसका बहुत ज्यादा ध्यान कंपनीज नहीं रख पाती हैं, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को ऐसे जूते चप्पल पहनने चाहिए जो पहनने में बहुत ज्यादा आरामदायक हों. साथ ही साथ वह जल्दी से ना फिसले और जूते चप्पलों का मटेरियल भी इस प्रकार का होना चाहिए, जो किसी भी प्रकार की एलर्जी पैदा ना करें. इस दौरान महिलाओं को ऊंची हील के जूते चप्पल नहीं पहने चाहिए. प्लेन और फ्लैट फुटवेयर को प्राथमिकता देनी चाहिए.

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प्रश्न करें  - Ask question to your doctor
प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी गर्भवती महिलाओं को प्रश्न करने से बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाना चाहिए. जो भी उनके मन में प्रश्न अपनी प्रेगनेंसी को लेकर होता है, वह प्रश्न वह अपने घर की बड़ी महिलाओं से और डॉक्टर से कर सकती हैं. जिससे उनके ज्ञान में बढ़ोतरी होगी और वह अपनी प्रेगनेंसी को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में सफल हो पाएंगी. क्योंकि किसी भी चीज को किसी भी कार्य को आप जब तक सही तरह से नहीं कर पाते हैं, जब तक कि आप को उसके विषय में नॉलेज ना हो. अगर आपको प्रेग्नेंसी के विषय में ज्ञान कम है, तो आप उसे जानने की कोशिश करें. इसमें बिल्कुल बिना शर्माए. शर्माना आपको भारी पड़ सकता है.
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धार्मिक पुस्तक - Read religious books during pregnancy
प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को किसी भी प्रकार का काम करने की सलाह नहीं दी जाती है. इस वजह से महिला काफी समय खाली बैठकर और सोच कर टाइम पास करती है. खाली रहने से तरह-तरह की बातें मन में आने लगती है. और कभी-कभी महिला डिप्रेशन और तनाव का शिकार हो जाती है. महिलाओं को चाहिए कि अगर उनके पास वक्त है, तो उसमें वह बिजी रहे. इसके लिए सबसे अच्छी बात यह है, कि उन्हें धार्मिक किताबों को पढ़ने में इंटरेस्ट लेना चाहिए. क्योंकि धार्मिक पुस्तकें इस प्रकार की पुस्तकें होती है, जिन पर जिनके अंदर हमेशा आपको उम्मीद करना सिखाया जाता है, और हमेशा अच्छा ही होगा इस बात का भरोसा भी दिलाया जाता है. जो कि किसी भी गर्भवती स्त्री के लिए बहुत ज्यादा जरूरी बातें हो सकती हैं इसलिए धार्मिक पुस्तकें पढ़ने में रुचि दिखाएं.
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संगीत सुनें - Good music during pregnancy
गर्भवती महिलाओं को टाइम पास करने के लिए या अपने खाली समय में किसी भी बात को सोचने से बचने के लिए संगीत सुनना भी एक बहुत अच्छा ऑप्शन होता है. अब आप हमेशा धार्मिक पुस्तके तो नहीं पढ़ सकती हैं, जैसा कि हमने बताया है, तो उसके लिए दूसरा ऑप्शन भी होना चाहिए. दूसरा ऑप्शन आपके लिए संगीत सुनना हो सकता है. आप अपने मनपसंद गानों को हल्की आवाज में सुन सकते हैं. जिससे आपका मन काफी प्रसन्न रहेगा. आपके शरीर की एनर्जी पॉजिटिव बनी रहेगी जो गर्भ शिशु के लिए काफी अच्छी बात है. साथ ही साथ आप धार्मिक संगीत भी सुन सकती हैं. जो आपको उम्मीद और साहस बढ़ाने का कार्य करेगा यह भी आपके लिए काफी अच्छा ऑप्शन है.

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नृत्य और खेल से बचे - Svoid dance and play during pregnancy
वैसे तो महिलाएं काफी समझदार होती हैं. उन्हें प्रेगनेंसी का मतलब समझ में आता है. वहां खेल कूद और नाचने जैसे कार्य प्रेग्नेंसी के समय बिल्कुल भी नहीं करती हैं. लेकिन प्रेगनेंसी के पहले महीने में महिलाओं को इस बात का एहसास नहीं होता है, कि वह प्रेग्नेंट है, तो इस वक्त गर्व को नुकसान होने का खतरा काफी ज्यादा होता है. हर स्त्री को पता होता है, कि वह बच्चा प्लान कर रहे हैं, या 1 या 2 महीनों में बच्चा प्लेन करने वाले हैं, तो उस दौरान उन्हें प्रेगनेंसी के पहले से ही अगर वह नृत्य करने का शौक रखती है तो नृत्य करना छोड़ देना चाहिए. कुछ विराम देना चाहिए. और बच्चों के साथ खेलकूद या अगर वह एथलीट है, तो इस कार्य को भी स्थगित रखना चाहिए.

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

प्रेगनेंसी के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए - Pregnancy Tips Part #12

नमस्कार दोस्तो आज के इस POST के माध्यम से हम आपके लिए फिर से कुछ टिप्स लेकर आए हैं वह भी प्रेग्नेंसी को लेकर प्रेगनेंसी में आपको किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस संबंध में कुछ बातें हम आपसे इस POST के माध्यम से फिर से करने वाले हैं तो चर्चा करते हैं.

दोस्तों प्रेगनेंसी एक बड़ा ही क्रिटिकल समय होता है आज के समय हम फास्ट लाइफ जीते हैं जिसकी वजह से हमें छोटी-छोटी बातों को समझने का मौका ही नहीं मिलता है.

यह POST हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं. इसमें भी हम आपके सामने 5 पॉइंट्स लेकर आए हैं. जिन पर हम चर्चा करेंगे...

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आवश्यक टेस्ट कराएं - Pregnancy me Aavashyak Test 
दोस्तो आज के समय की है विडंबना है कि जल्दी से किसी भी व्यक्ति का शरीर स्वस्थ नहीं होता है उसमें किसी ना किसी प्रकार के पोषक तत्व की कमी अवश्य पाई जाती है अगर आप प्रेगनेंसी धारण करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपको एक बार डॉक्टर से चेकअप जरूर करा लेना चाहिए कि आपके शरीर में सभी आवश्यक तत्व की मात्रा उपलब्ध है या नहीं है अगर आपको पता होगा तो आप अपने शरीर को अच्छे से स्वस्थ रख पाएंगे साथ ही साथ प्रेग्नेंसी के समय भी काफी सारे टेस्ट डॉक्टर्स करना बताते हैं जो गर्भ शिशु की देखभाल और स्वास्थ्य के संबंध में होते हैं.  आप इन आवश्यकता लैब टेस्ट को भी डॉक्टर की सलाह अनुसार कराते रहिए.

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ऊंचे स्थानों पर खड़े ना रहे - Oonche sthaanon par khade na rahe
महिला को कभी भी ऐसे स्थान पर खड़े होने से बचना चाहिए जो ऊंचा हो तथा खड़ा होने में वहां पर किसी भी प्रकार की कठिनाई महसूस होती हो कभी महिलाएं सफाई करने के लिए ऊंचे स्थानों पर चढ़ जाती है. जहां पर उनका बैलेंस बनना मुश्किल होता है किसी भी अप्रिय घटना को निमंत्रण मिल सकता है
साथ ही साथ जिन महिलाओं को ऊंचे स्थान से डर लगता है उन्हें ऊंचे स्थान पर जाने से बचना चाहिए, क्योंकि शरीर में काफी ज्यादा हार्मोनल उत्तल पुथल होती है, जिसकी वजह से उन्हें चक्कर आने का खतरा रहता है.

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सही वस्त्र पहने - Sahee Vastr Pahane

महिलाओं को प्रेग्नेंसी के समय अपने वस्त्रों को चुनने में काफी सावधानी रखने की आवश्यकता होती है प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को चाहिए कि वह अपने अपनी इच्छाओं को थोड़ा सा अलग रखें फैशन की तरफ कम ध्यान दें और ऐसे कपड़े पहने जिसमें उसे आराम महसूस हो ज्यादा टाइट और कसे हुए कपड़े पहनने से कभी-कभी प्रेगनेंसी में परेशानी होने का डर रहता है. कभी-कभी ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से महिलाओं को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.
 साथ ही महिला इस प्रकार के कपड़े पहने जो नेचुरल धागे से बने हुए हो सिंथेटिक और स्टाइलिश कपड़े महिला की त्वचा पर एलर्जी या संक्रमण का कारण बन सकते हैं क्योंकि प्रेगनेंसी में वैसे भी महिला की त्वचा पर काफी परेशानियां देखने में आती है.

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शोक सभाओं में ना जाएं - Shok sabhaon mein na jaye

खासकर प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को दुनियादारी से थोड़ा दूर रहना चाहिए और उन्हें शोक सभाओं में जाने से बचना चाहिए शोक सभाओं में एक प्रकार का निगेटिव माहौल रहता है दुख का माहौल रहता है जिसमें महिलाओं को अनावश्यक तनाव हो सकता है. कभी-कभी यह तनाव कई दिन तक चल सकता है जिसमें
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अपने दैनिक कार्य में मन ना लगना
नींद कम आना
और भी दूसरे की समस्याएं हो सकती हैं जो गर्भावस्था में नुकसानदायक है.

साथ ही साथ किसी मृत्यु सभा में जाने से वहां पर निगेटिव एनर्जी का इफेक्ट भी काफी ज्यादा रहता है जो गर्भ शिशु को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है.

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घर में पार्टी का अरेंजमेंट ना करें - Ghar mein Party ka arrangement na kare

गर्भावस्था के दौरान किसी भी महिला को अपने घर में अपनी जिम्मेदारी के ऊपर पार्टी अरेंज नहीं करनी चाहिए क्योंकि पार्टी अरेंज करने में बहुत ज्यादा मेहनत करनी होती है आपको बहुत ज्यादा हार्ड वर्क और शारीरिक मेहनत की आवश्यकता होती है जबकि प्रेग्नेंसी के समय महिला को ज्यादा से ज्यादा आराम करने का की सलाह दी जाती है
अगर आपके घर में पार्टी अरेंज भी होती है तो आप पहले ही बता दे कि वह इस संबंध में किसी भी प्रकार से सहायता नहीं कर पाएंगे आपको सामाजिक जिम्मेदारी निभाने से पहले अपने शिशु के प्रति जिम्मेदारी पहले निभानी होगी.
पार्टी में कभी-कभी फास्ट म्यूजिक डांस और गॉसिप वगैरह काफी ज्यादा होती है जिसकी वजह से कभी-कभी महिला को बहुत ज्यादा परेशानी, अनकंफरटेबल महसूस हो सकता है.