Header Ads

प्रीमेच्योर डिलीवरी को कैसे रोके | 12 घरेलू उपाय | Treatment for premature delivery

आज के समय में प्रीमेच्योर डिलीवरी काफी बड़ी समस्या बनती चली जा रही है.

प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचने के लिए कौन-कौन से इलाज किए जाते हैं.
किस प्रकार के घरेलू उपायों द्वारा हम प्रीमेच्योर डिलीवरी को रोक सकते हैं.
डॉक्टर प्रीमेच्योर डिलीवरी कराने की सलाह कब देते हैं.

कुछ जरूरी बातें ……..

अगर आपको किसी कारणवश ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं, जोकि प्रीमेच्योर डिलीवरी की ओर संकेत करते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क में आना चाहिए . 

Treatment for premature delivery

 इन्हें भी पढ़ें : प्रेगनेंसी के दौरान बैठने, खड़े होने और चलने के टिप्स
इन्हें भी पढ़ें : वर्षा ऋतु में गर्भ की देखभाल कैसे करें
इन्हें भी पढ़ें : क्या प्रेगनेंसी में गर्म पानी से नहाना सुरक्षित है
इन्हें भी पढ़ें : प्रेगनेंसी में खून की कमी और उपाय
इन्हें भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी के समय पेट पर काली लाइन, क्या है यह है, क्यों बनती है


डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करना बता सकते हैं.

वह आपके गर्भाशय को मशीनों द्वारा चेक कर सकते हैं.

कुछ विशेष प्रकार के अल्ट्रासाउंड जिसमें आपकी ग्रीवा की लंबाई नापी जा सकती है.

डिलीवरी के लिए जिम्मेदार हारमोंस और दूसरे तत्व के बारे में जानने की कोशिश करेंगे.

आपकी प्रेगनेंसी की एक्चुअल स्थिति को जानने की कोशिश करेंगे.

कुछ ट्रीटमेंट है, जोकि डॉक्टर प्रीमेच्योर डिलीवरी को रोकने के लिए प्रयोग में लाते हैं.

इन सभी ट्रीटमेंट को हमेशा किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर की निगरानी में, उसकी सलाह पर ही, उसके द्वारा ही कराना चाहिए.

प्रीमेच्योर डिलीवरी के लिए इलाज

एंटीबायोटिक

अगर चेक करने के बाद रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर को लगता है, कि प्रीमेच्योर डिलीवरी के लक्षण संक्रमण की वजह से आ रहे हैं, तो वह उसके लिए आपको एंटीबायोटिक सजेस्ट करेंगे. ताकि संक्रमण को समाप्त किया जा सके.

हारमोंस ट्रीटमेंट

एक रिसर्च के द्वारा यह बात सामने आई है, कि 16 हफ्ते से 37 हफ्ते तक महिला के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन इंजेक्ट कराया जाता है. वैसे तो यह हार्मोन महिला के शरीर में बनता है. लेकिन इसकी कमी को पूरा करने के लिए हारमोंस ट्रीटमेंट दिया जाता है. इसके कारण 33% प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा कम हो जाता है.

सर्वाइकल सेरेक्लेज

यह ट्रीटमेंट उन गर्भवती स्त्रियों को दिया जाता है, जिनकी गर्भाशय ग्रीवा धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. और भ्रूण का वजन नहीं संभाल पाती है. इस कारण से सरविक्स जल्दी खुल जाता है. और गर्भपात का खतरा या प्रसव का खतरा बढ़ जाता है. इसमें सर्विस के आसपास एकता का लगा दिया जाता है. और निर्धारित समय पर जब डिलीवरी का सही समय आता है, तो उसे खोल दिया जाता है. 

स्टेरॉइड ट्रीटमेंट

कुछ मामलों में स्टेरॉयड प्रीमेच्योर डिलीवरी को रोकने के लिए स्टेरॉयड भी दिया जाता है.

टोकोलाइसिस

यह एक प्रकार की दवा होती है, जो प्रीमैच्योर डिलीवरी के खतरे से पीड़ित महिलाओं को दी जाती है. माना जाता है कि यह प्रीमैच्योर डिलीवरी को कुछ समय के लिए रोक सकती है.

प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचने के कुछ उपाय

प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचने के कुछ उपाय स्वयं हम भी कर सकते हैं. कुछ सावधानियां रख सकते हैं. जिससे प्रीमेच्योर डिलीवरी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. 


  • सबसे पहले तो यह ध्यान रखना है, कि किशोरावस्था में किसी भी स्त्री को गर्भवती होने से बचना है.


  • गर्भवती स्त्री को शराब और धूम्रपान का सेवन बिलकुल भी नहीं करना है.


  • अधिकतर प्रीमेच्योर डिलीवरी संक्रमण के कारण होती हैं, प्रमुख रूप से यौन संक्रमण के कारण. हमें इस बात का ध्यान रखना है, कि हमें किसी भी प्रकार का संक्रमण ना लगे. अपने स्वस्थ रहने का विशेष ध्यान रखना है.


  • हमें उच्च रक्तचाप की समस्या से बचना है. उसके लिए ध्यान रखना है. 


  • हमें मधुमेह की समस्या से भी बचना है. इसका भी ध्यान रखना है. 


  • हमेशा गर्भधारण एक योजना के साथ करें. किसी भी महिला को 2 गर्भावस्थाओं के बीच में कम से कम 2 से 3 साल का अंतर अवश्य रखना चाहिए. 


  • गर्भवती होने से पहले महिला को इस बात का ध्यान रखना है, कि उसका वजन नियमित रहे. ज्यादा कम या ज्यादा अधिक नहीं होना चाहिए.


  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना चाहिए. महिला को सुबह समय से उठना चाहिए.  रात को समय से सोना चाहिए और समय से खाना भी चाहिए.


  • किसी भी गर्भवती स्त्री को अपने भोजन का भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है. उसे यह ध्यान रखना है, कि उसे आवश्यक पोषण उसके भोजन से प्राप्त होता रहे.


  • महिला को डॉक्टर के सलाह पर नियमित रूप से आवश्यक व्यायाम भी करने चाहिए. 


  • आवश्यकता पड़ने पर महिलाओं को अपने भोजन में सप्लीमेंट का प्रयोग भी करना चाहिए. इसकी सलाह अपने डॉक्टर से जरूर लें. 


  • महिलाओं को प्रेग्नेंसी के समय बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए. यह भी प्रीमेच्योर डिलीवरी का मुख्य कारण है.


प्रीमेच्योर डिलीवरी


इन्हें भी पढ़ें : पल्स विधि द्वारा जेंडर प्रिडिक्शन
इन्हें भी पढ़ें : गर्भ में बेटा या बेटी जानने का मिस्र का तरीका
इन्हें भी पढ़ें : गर्भ में लड़का या लड़की जानने के 7 तरीके
इन्हें भी पढ़ें : साइंस और धर्म विज्ञान दोनों के अनुसार पुत्र प्राप्ति का सटीक उपाय
इन्हें भी पढ़ें : पुपुत्र प्राप्ति का यह वैज्ञानिक तरीका 99% पुत्र देगा


डॉक्टर प्रीमेच्योर डिलीवरी की सलाह कब देते हैं

विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर महिला को इस बात की सलाह दे सकते हैं, कि वह प्रीमेच्योर डिलीवरी के लिए तैयार रहें.

  • जब महिला का रक्तचाप काफी अधिक होता है. अर्थात ब्लड प्रेशर काफी ज्यादा लगातार बना रहता है, तो इस स्थिति में डॉ महिला को प्रीमेच्योर डिलीवरी की सलाह दे सकते हैं.


  • महिला को अगर उच्च मधुमेह की समस्या नजर आ रही है. तब भी प्रीमेच्योर डिलीवरी कराने की सलाह डॉक्टर दे सकता है. 


  • अगर महिला के अंदर खून की अत्यधिक कमी है. एनीमिया के लक्षण काफी ज्यादा नजर आ रहे हैं. तब भी डॉक्टर महिला को प्रीमेच्योर डिलीवरी कराने की सलाह दे सकते हैं. वैसे तो डॉक्टर एनीमिया को दूर करने की कोशिश करते हैं, अगर नहीं हो रही है तब यह सलाह दी जाती है.


  • अगर महिला को किसी संक्रमण ने पकड़ लिया है, और वह काबू में नहीं आ रहा है. और वह महिला और बच्चे दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है. तो डॉक्टर प्रीमेच्योर डिलीवरी कराने की सलाह देते हैं. 


  • अगर महिला किसी कारणवश प्रेगनेंसी बढ़ने के साथ-साथ अत्यधिक कमजोर होती जा रही है, और वह कमजोरी कंट्रोल नहीं हो रही है, तब भी डॉक्टर महिला को प्रीमेच्योर डिलीवरी कराने की सलाह देते हैं.




No comments

Powered by Blogger.