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Keep these things in mind during massage after delivery | डिलीवरी के बाद मालिश के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

हम डिलीवरी के बाद मालिश  के संबंध में चर्चा करने जा रहे हैं, कुछ बातों पर बात करेंगे..

डिलीवरी के बाद किन अंगों पर मालिश करना सही रहता है.
डिलीवरी के बाद किस मुद्रा में मालिश कराना के बाद सही होता है.
डिलीवरी के बाद मालिश से होने वाली समस्याएं होती हैं.
किन किन बातों का ध्यान रखना है.
किन परिस्थितियों में मालिश नहीं करनी है और
प्रेगनेंसी के बाद मालिश कितने दिनों तक करनी है

आज के हमारे टॉपिक है.

डिलीवरी के बाद मालिश के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

डिलीवरी के बाद शरीर के किन अंगों पर मालिश करवाएं


अगर किसी भी महिला की डिलीवरी नार्मल होती है, तो वह उन सभी अंगों पर मालिश करा सकती है. जहां पर उसे अकड़न और भारीपन महसूस हो रहा होता है.

लेकिन अगर सिजेरियन स्थिति है, तो उस वक्त मसाज काफी संभलकर करने की आवश्यकता पड़ती है. शरीर के उन अंगों पर मसाज बिल्कुल भी नहीं की जाती, जहां मसाज करने से महिला के शरीर में आए टाकों पर दबाव आता है. हाथ पैरों की पर अगर सूजन की स्थिति है तो हल्के हाथों से मालिश की जा सकती है.

डिलीवरी के बाद किस मुद्रा में मालिश कराना के बाद सही होता है


डिलीवरी के बाद महिलाओं को पेट के बल लेट कर मालिश कराने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. इसलिए महिला किसी एक साइड करवट लेकर मसाज करा सकती है. जिन महिलाओं को लेट कर मालिश कराने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. वह बैठकर भी अपने हाथ पैरों से शरीर की मालिश करवा सकती हैं.

डिलीवरी के बाद मालिश से होने वाली समस्याएं होती हैं


मालिश करते समय कुछ सावधानियां रखने की आवश्यकता होती है. अक्सर सिजेरियन बेबी होने की स्थिति में मसाज के कारण टांके वाली जगह पर संक्रमण होने का खतरा पैदा हो जाता है, जो तेल के कारण हो सकता है.

मालिश कराने का फायदा तो होता है लेकिन कई बार तेल के कारण त्वचा पर एलर्जी उत्पन्न हो सकती है. इस एलर्जी के कारण शरीर पर सूजन और रैशेज रह सकते हैं. इस अवस्था में आपको मसाज नहीं करानी है.

डिलीवरी के बाद मालिश  के दौरान इन बातों का ध्यान रखें


प्रेगनेंसी के बाद मसाज कराते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो काफी अच्छा रहता है.
इसके लिए आप पेट की मालिश कर आते समय साइड करवट लेकर ही लेटे ताकि पेट पर किसी भी प्रकार का जोर ना आए.

सबसे अधिक दिक्कत तब होती है जब सिजेरियन बेबी होता है. उस वक्त काफी ध्यान रखने की आवश्यकता होती है.

  • ऐसे में आपको टांके वाली जगह पर तेल मालिश करने से बचना है.

  • प्रसव के बाद मसाज थेरेपी विशेषज्ञ से ही कराने चाहिए.

  • सिजेरियन डिलीवरी में जब तक टांके अच्छी तरह से ठीक ना हो जाए तब तक पेट की मालिश से बचना है.

  • टांकों पर किसी भी तरह से तेल नहीं आना चाहिए संक्रमण का खतरा रहता है.

  • मसाज के दौरान पेट पर अधिक दबाव नहीं डालना चाहिए और

  • शिशु के स्वास्थ्य के मध्य नजर रखते हुए, स्तनों पर मसाज कराने से बचना चाहिए.


किन परिस्थितियों में मालिश नहीं करनी है

अब ऐसा भी नहीं है कि हर महिलाओं को मालिश लाभदायक ही हो. कई बार महिलाओं को कुछ समस्या होती है. जिनके कारण से मालिश करना ठीक नहीं रहता, जैसे कि

  • अगर त्वचा संबंधी कोई भी समस्या पहले से ही महिलाओं को होती है. तो उस अवस्था में मसाज कराने से बचना चाहिए.


  • अगर आप शिशु को दूध पिला रही हैं. तो आपको स्तनों पर तेल मालिश से बचना चाहिए. इससे शिशु को एलर्जी हो सकती है. या ऐसा भी हो सकता है कि शिशु तेल की गंध के वजह से दूध पीना ही छोड़ दे. यह अपने आप में बड़ी समस्या हो सकती है.


  • हर्निया और उच्च रक्तचाप की स्थिति में भी आपको मालिश नहीं करानी है.


  • अगर शरीर में सूजन अत्यधिक है, तब भी आपको मालिश से दूर रहना है.


  • ऐसा भी हो सकता है, कि जिस तेल का प्रयोग आप कर रही है, उससे आपको एलर्जी हो तो उस स्थिति में तेल बदल कर भी देखा जा सकता है.

    प्रेगनेंसी के बाद मालिश कितने दिनों तक करनी है

    नॉर्मल डिलीवरी के 1 हफ्ते से दूसरे हफ्ते के बाद महिला तेल मालिश कर सकती है, और सिजेरियन बेबी होने की स्थिति में महिला 4 से 5 हफ्ते के बाद मालिश कराना शुरू कर सकती है. 40 से 50 दिन तक मालिश बड़े आराम से करवानी चाहिए.

    महिलाओं का सवाल होता है, कि हमें कौन से तेल का इस्तेमाल करना चाहिए. तो इसके लिए आप बादाम का तेल, सरसों का तेल, नारियल तेल, जैतून तेल और हर्बल तेल का उपयोग कर सकते हैं, बस आपको उस प्रकार का तेल प्रयोग करना है, जिससे आपको एलर्जी नहीं होनी चाहिए.



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