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रविवार, 18 अगस्त 2019

जानें क्यों प्रेगनेंसी में सौंफ खाने से किया जाता है मना

हम चर्चा करने वाले हैं कि हमें प्रेग्नेंसी के समय सौंफ खानी चाहिए कि नहीं खानी चाहिए
खाना खाने के बाद भारतीय समाज में भोजन को पचाने के लिए सौंफ खाने का चलन है इससे यह सिद्ध होता है कि सौंफ एक औषधि है,
लेकिन क्या प्रेगनेंसी में भी सौंफ खाना फायदेमंद होता है इस विषय पर आज हम अपने इस वीडियो के माध्यम से चर्चा करने वाले हैं क्योंकि कभी-कभी क्या होता है कि किसी खाद्य पदार्थ का जो गुण हमें बिना प्रेगनेंसी के बहुत फायदेमंद लगता है कभी-कभी वह  प्रेगनेंसी में बहुत ज्यादा हानिकारक भी हो जाता है, सौंफ के साथ भी कुछ ऐसा ही है आज तो चर्चा करते हैं --
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लेकिन अक्सर एक सवाल उठता है कि क्या प्रेगनेंसी में सौंफ का सेवन करना चाहिए?
सौंफ एक हर्ब औेंर मसाले के तौर पर हमारे भारतीय भोजन में इस्तेमाल होती है। बहुत से लोग खाना खाने के बाद सौंफ चबाते हैं। इसकी वजह है सौंफ के पाचक गुण। दरअसल सौंफ पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद करती है। पेट फूलने और गैस जैसी समस्याओं से राहत पाने में भी सौंफ मदद करती है। लेकिन
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अक्सर एक सवाल उठता है कि क्या  प्रेगनेंसी में सौंफ का सेवन करना चाहिए?
प्रेगनेंसी में महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या  का सामना करना पड़ता है और इसीलिए वो सौंफ चबाती हैं। राहत मिलने पर कई महिलाओं को पूरी प्रेगनेंसी तक सौंफ खाने की आदत पड़ जाती है, लेकिन प्रेगनेंसी में सौंफ का सेवन संभल कर करना चाहिए। बहुत अधिक मात्रा में  सौंफ खाने से आपके अजन्मे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा स्पॉटिंग और ब्लीडिंग जैसी समस्याएं भी होने की शिकायत बहुत-से लोग करते हैं। बहुत गंभीर मामलों में गर्भपात का भी खतरा होता है।

 हम आपको बता दें कि जब महिला के पीरियड अनियमित हो जाते हैं तो आयुर्वेद कहता है कि आप नियमित तौर पर सौंफ का सेवन करें इससे आपके पीरियड्स नियमित हो जाएंगे और अगर वह रुक रुक के आ रहे हैं वह शीघ्र आ जाएंगे | लेकिन अगर आप प्रेग्नेंट है तो आपकी पीरियड होना आपके लिए गर्भपात का संकेत होते हैं।
और प्रेग्नेंसी के समय सारी कोशिश इसी बात की होती है कि गर्भपात ना हो और पीरियड्स ना आए।
तो ऐसी अवस्था में मॉर्निंग सिकनेस या पेट में कब्ज होने जैसी समस्याओं को ठीक करने वाली सौंफ का सेवन करना उचित नहीं है।
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चूंकि सौंफ एसिडिटी, गैस और मॉर्निंग सिकनेस जैसी समस्याओं से आराम दिलाती है इसीलिए अपने डॉक्टर से बात करें और पता करें कि कितनी मात्रा में सौंफ का सेवन आपके लिए सुरक्षित है।
अगर आप प्रेग्नेंट नहीं है तो आयुर्वेद के अनुसार सौंफ सेहत के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होती है। इसलिए खाने के बाद हर हाल में सौंफ अवश्य लेना चाहिए। यह शरीर में वजन को नियंत्रित करने में बहुत मददगार होता है। अगर आंख की समस्या है तो सौंफ के साथ मिश्री लेने से बहुत अधिक फायदेमंद है। सौंफ में विटामिन सी, पोटेशियम, मैंगनीज, लोहा, फोलेट और फाइबर शामिल है।
इसमें जीवाणुरोधी और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पीड़ादायक मसूड़ों को शांत करने में सहायक होता है। इससे मुंह की बदबू दूर होती है। सौंफ के बीज में अपच, सूजन और पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से पेट में दर्द और पेट के अंदर सूजन से राहत मिलती है। इससे पेशाब की रुकावट भी दूर होती है। इसलिए सौंप की चाय पीने से पेशाब के रास्ते की समस्या दूर होती है। साथ ही आंखों की सूजन भी कम करता है।
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- पेट की बीमारियों के लिए यह बहुत प्रभावी दवा है जैसे मरोड़, दर्द और गैस्ट्रिक डिस्ऑर्डर के लिए।
- सौंफ आपकी याददाश्त बढ़ाती है। 
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 - सौंफ का नियमित सेवन दृष्टि को तेज करता है। 5-6 ग्राम सौंफ रोज लेने से लीवर और आंखों की ज्योति ठीक रहती है।
- सिंकी हुई सौंफ मिश्री के साथ खाने से आवाज तो मधुर होती ही है यह खांसी भी भगाती है।
यह भूख को कम करता है। सौंफ का ताजा बीज प्राकृतिक वसा नाशक के रूप में कार्य करता है। इसलिए इसके इस्तेमाल से वजन घटता है। सर्दी-खांसी, फ्लू और साइनस से श्वसन तंत्र के संक्रमण से राहत दिलाने में भी यह मददगार साबित होता है।यह पोटेशियम का अच्छा स्त्रोत है। यह बीपी को कम करता है। विटामिन सी एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है। यह ह्दय रोग से बचाता है।
मासिक चक्र को नियमित बनाने के लिए सौंफ को गुड़ के साथ खाएं।
- अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिंकी हुई सौंफ और बिना सिंकी सौंफ को मिलाकर लेने से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है।
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- दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है।
   

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