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अनियमित महावारी में प्रेगनेंसी के 5 टिप्स | 5 tips for pregnancy in irregular periods

 दोस्तों आजकल हमारा लाइफ स्टाइल इतना ज्यादा खराब हो चुका है, हमारा खान-पान इतना ज्यादा बिगड़ चुका है कि अब इसकी वजह से हमारे शरीर की कैपेसिटी भी कमजोर होती जा रही है. शरीर की नेचुरल प्रक्रिया अभी अब बाधित होने लगी है ऐसी ही एक नेचुरल प्रक्रिया है महावारी. आजकल देखने में आता है कि कम उम्र से ही महिलाओं में माहवारी अनियमित हो जाती है अनियमित महावारी हो जाने की वजह से प्रेगनेंसी में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है क्योंकि ओव्यूलेशन पीरियड का पता ही नहीं चलता है जब महिला का गर्भवती होने का सबसे अनुकूल दिन होता है.
अगर महिला की अनियमित महावारी की वजह से प्रेगनेंसी नहीं हो रही है तो उसे कुछ बातों का ध्यान रखना होगा आइए चर्चा करते हैं.

Pregnancy in irregular periods in Hindi

 

अनियमित महावारी के कारण - Irregular Periods ke Karan

अनियमित माहवारी के साथ गर्भधारण की बात करने से पहले हम यह जान लेते हैं कि अनियमित माहवारी क्या होती है.
महिलाओं का मासिक चक्र 20 दिन से लेकर 35 दिन के बीच का होता है और हर महिला के लिए यह नियत होता है अगर यह नियत समय पर नहीं आते हैं अर्थात नियत समय के बाद नहीं आते हैं जैसे कि कभी 21 दिन में कभी 35 दिन में कभी 28 दिन में इसी प्रकार से अनियमित तरीके से मासिक चक्र कार्य करता है, तो इसे अनियमित मासिक चक्र कहा जाता है.

नियत मासिक चक्र में महिला की प्रेगनेंसी का दिन भी नियत होता है. और अनियमित मासिक चक्र में महिला की प्रेगनेंसी के सबसे अच्छे दिनों का पता ही नहीं चल पाता है. मुख्यतः इसी वजह से प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है साथ ही साथ अनियमितता का कारण हारमोंस में उतार-चढ़ाव होता है, तो यह भी प्रेगनेंसी ना होने का दूसरा कारण होता है.
अनियमित मासिक चक्र के कुछ सामान्य से कारण होते हैं जिनका निवारण कर लिया जाए तो समस्या में समाधान मिल सकता है.

शारीरिक व्यायाम

अगर महिला बिल्कुल भी शारीरिक व्यायाम नहीं करती है तो उसे योगाचार्य की सलाह पर कुछ योगा शुरू करने चाहिए, जिससे उसके शरीर की मांसपेशियां खुलेंगे और शरीर की सभी रुकी हुई प्रक्रियाएं शुरू हो जाएंगी. ऐसे में हो सकता है, कि उसका मासिक चक्र भी नियमित हो जाए और अनियमित मासिक चक्र के साथ भी गर्भाधान करना संभव हो जाता है. साथ ही साथ इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि अगर महिला हद से ज्यादा व्यायाम करती है, तो ऐसी महिला जल्दी से गर्भवती नहीं हो पाती है. इसलिए महिला अगर अनियमित महावारी की शिकार है, और अत्यधिक व्यायाम करती है, तो उसे अपना व्यायाम कुछ दिनों के लिए बंद कर देना चाहिए. जब तक कि वह गर्भाधान करती है और उसके बाद डॉक्टर की सलाह पर ही व्यायाम करें.

मोटापा

मोटापा किसी भी महिला की सारी गतिविधियों को सुस्त कर सकता है. अधिक खाना खाने से भी मोटापा आने की समस्या हो जाती है. जिसकी वजह से गर्भाधान नहीं हो पाता है, पीरियड्स भी अनियमित हो जाते हैं.  महिला को चाहिए कि वह डाइट एक्सपर्ट से बात करें, और अपनी डाइट को प्लान करें, जिससे कि उसका एक्स्ट्रा वजन कम होने लगे. ऐसा हो सकता है कि उसके पीरियड भी नियमित हो जाएं वरना अनियमित पीरियड्स में भी फिट होकर प्रेगनेंसी प्राप्त की जा सकती है.

मानसिक तनाव

मानसिक तनाव अनियमित पीरियड हो जाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है क्योंकि मानसिक तनाव होने से शरीर में हारमोंस की स्थिति गड़बड़ा जाती है. और हारमोंस की स्थिति गड़बड़ हो जाने की वजह से पीरियड अनियमित हो जाते हैं इसलिए महिलाओं को चाहिए कि वह अपने तनाव को दरकिनार कर खुश रहने की कोशिश करें. इससे उसके पीरियड भी नियमित हो जाएंगे अगर इस वजह से अनियमित हुए हैं तो और शरीर में जो तनाव लेने से अतिरिक्त एनर्जी खर्च होती है उसका खर्चा बचेगा वह शरीर के विकास में सहायता में काम आएगी आपके प्रेगनेंसी में काम आएगी.

योगा   

हमारा लाइफस्टाइल बदल जाने की वजह से या गड़बड़ हो जाने की वजह से हमारे शरीर में तरह तरह के विकार आने लगते हैं. जिसकी वजह से प्रेगनेंसी जैसा बड़ा कार्य शरीर के बस के बाहर हो जाता है . ऐसे में अगर महिला योगा का सहारा लेती है और पुरुष भी प्रेग्नेंसी के लिए बराबर के जिम्मेदार है, वह भी अगर साथ में योगा का सहारा लेते हैं, तो उनका शरीर बहुत जल्दी से स्वस्थ होने लगेगा. और वह एक स्वस्थ प्रेगनेंसी को प्राप्त कर पाएंगे. अगर महिला के पीरियड भी अनियमित है, तो भी प्रेगनेंसी की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है.

प्रेगनेंसी में ओवुलेशन टाइम की आवश्यकता - Pregnancy ke Lia Ovulation Time

ओवुलेशन टाइम -यह वह टाइम होता है समय होता है, जिसमें स्त्री के गर्भवती होने के की संभावना सबसे ज्यादा होती है बल्कि यह कहो कि महिला इसी समय ही प्रेग्नेंट होती है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. अगर महिला अपने इस टाइम को पहचानने लगे जो कि हर मासिक चक्र में एक बार आता है, तो फिर महिला को गर्भवती होने में समय नहीं लगता है क्योंकि ओवुलेशन पीरियड का पता ना होने की वजह से  अनियमित पीरियड होते हैं. प्रेगनेंसी  होने की दिक्कत आती है. 


ओवुलेशन पीरियड जब होता है तो उसके कुछ लक्षण नजर आते हैं जो कि काफी हल्के होते हैं अगर उन्हें गौर किया जाए तभी उन्हें महिला पहचान सकती है.


जब ओवुलेशन पीरियड आता है तो महिला के शरीर का तापमान थोड़ा सा बढ़ जाता है इतना भी नहीं बढ़ता है, कि आप उसे सामान्य अवस्था में देख पाएंगे. इसके लिए आपको पहले से ही अपने शरीर के तापमान को नापना होगा यह काम आपको रोज करना है और जब आपके शरीर का तापमान थोड़ा सा हो जाता है तो वह आपका ओवुलेशन पीरियड हो सकता है अगर और किसी प्रकार की समस्या बुखार इत्यादि आपको ना हो. तापमान 0.1 से 0.2 फॉरेनहाइट ही बढ़ता है.


सर्वाइकल म्यूकस में भी परिवर्तन आता है. इसके परिवर्तन को भी अगर देखना महिला को आ जाए तो भी ओवुलेशन पीरियड का पता चल जाता है यह पतला पारदर्शी और चिकना होता है. 


 कुछ महिलाओं के पेट में दर्द का अनुभव होता है यह दर्द सामान्य और निश्चित जगह पर होता है कुछ और दूसरे लक्षण भी देखने को मिलते हैं.


जैसे कि
स्तनों के आकार में बदलाव आता है
कोमलता बढ़ जाती है इत्यादि
 

अगर आपके पीरियड अनियमित है तो आप अपने ओवुलेशन पीरियड को जानने की कोशिश करें, क्योंकि यह वह समय होता है जब अंडा प्रेगनेंसी के लिए तैयार रहता है. इसके लिए मार्केट में ओवुलेशन किट भी आती है उसे कैसे प्रयोग करना उसके सारी इनफार्मेशन उस किट के ऊपर होती है. आप बड़ी आसानी से अनियमित महावारी के दौरान गर्भवती हो सकती हैं.

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