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बच्चे के लिए जैतून के तेल की मालिश के फायदे

 नवजात शिशु की लगभग एक से डेढ़ साल तक शरीर की मालिश करना बताया जाता है और हमारे समाज में भी यह प्रथा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है. इससे बच्चों की मांसपेशियां काफी मजबूत हो जाती हैं. वह आसानी से अपने पैरों पर खड़ा भी होने लगता है.

 क्या जैतून का तेल प्रेग्नेंट नवजात शिशु की मालिश के लिए उपयुक्त रहता है.
आज के टॉपिक है.

क्या जैतून का तेल मालिश के लिए सुरक्षित है
बच्चे के लिए जैतून के तेल की मालिश के क्या फायदे होते हैं
जैतून के तेल से शिशु की मालिश कैसे करें
क्या जैतून का तेल बच्चे के रंग को साफ करने में मदद करता है
और मसाज में क्या-क्या सावधानी बरती जाए

Massage newborn with olive oil

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क्या जैतून का तेल मालिश के लिए सुरक्षित है

कई प्रकार के तेलों से बच्चे की मालिश को करना बताया जाता है उसमें जैतून का तेल भी शामिल है इसलिए आप अपने नवजात शिशु की मालिश जैतून के तेल से कर सकते हैं. दोस्तों जैतून का तेल प्रकृति में काफी गर्म होता है और सर्दियों में यह मालिश करने से शरीर में गर्माहट पैदा करता है क्योंकि बच्चे की पहली सर्दी है तो यह काफी फायदेमंद हो सकता है .

बच्चे के लिए जैतून के तेल की मालिश के क्या फायदे होते हैं

एक बार चर्चा कर लेते हैं कि जैतून के तेल से मालिश करने से किस प्रकार के फायदे होते हैं, तो आपको और ज्यादा क्लियर होगा.


जैतून का तेल गर्म प्रकृति का होता है इस से मालिश करने से शरीर के अंदर रक्त संचार बेहतर होता है उसके विकास में काफी मदद मिलती है वैसे किसी अन्य तेल से भी मालिश करेंगे तो भी यह कार्य होता है.


जैतून का तेल बच्चे की मानसिक क्षमताओं को विकसित करता है, तंत्रिका तंत्र के विकास में भी मदद करता है. काफी फायदेमंद है. 


अगर शिशु को खांसी जुखाम किसी कारणवश हो गया है, तो शरीर पर जैतून के तेल से मालिश करने पर खांसी जुखाम में राहत मिलती है, क्योंकि यह गर्म प्रकृति का होता है, और खांसी जुकाम ठंडी प्रकृति के रोग हैं.


अगर आपके शिशु का जन्म थोड़ा समय से पहले हो गया है तो जाहिर सी बात है कि उसका वजन कम ही होगा जैतून का तेल अगर मालिश में प्रयोग किया जाए तो यह उसके वजन को बढ़ाने में मदद करता है.


अगर किसी कारणवश शिशु की त्वचा रूखी सूखी है तो जैतून के तेल से मालिश करके त्वचा की कांति को लौटाया जा सकता है.


अगर बच्चे की मसाज बेहतर तरीके से की जाए बेहतर का मतलब यहां हल्के हाथों से और आराम से है यह बच्चे को बेहतर नींद लाने में काफी मदद करता है इसके लिए आपको गुनगुने जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकती है.
 

क्या जैतून का तेल बच्चे के रंग को साफ करता है.

शुरू के 3 महीने तो बच्चा अपना रंग बदलता रहता है इस संबंध में हमने पहले भी एक वीडियो दिया है कि इसके पीछे क्या कारण है. अगर आप जैतून के तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इससे बिल्कुल भी आपके बच्चे की त्वचा पर फर्क नहीं आएगा और ना ही इस संबंध में कोई शोध उपलब्ध है. जिसके आधार पर यह कहा जाए यह है पूर्ण रूप से बच्चे के जींस पर ही निर्भर करेगा.

जैतून के तेल से कैसे मालिश करें

जैतून के तेल से कैसे मालिश करें जैतून का तेल काफी तेज होता है अगर आप शुद्ध जैतून के तेल की मालिश बच्चे के शरीर पर करोगे तो रैशेज पड़ सकते हैं . इसके लिए आप जैतून के तेल में जितना तेल ले रहे हैं उसी के बराबर गुनगुना पानी मिलाइए उसके बाद मालिश करें.

 
जब आप बच्चे की मालिश करना शुरू करें तो जैतून के तेल को जो कि पानी मिला हुआ है, अपनी हथेली में ले. उसके बाद हल्के हाथों से शिशु के सीने से मसाज शुरू करें. सीने से मसाज करते हुए उसके हाथों और कंधों तक मालिश करें. उसके बाद आप शिशु की पीठ पर मालिश करें. उसके बाद अंत में बच्चे के पैरों और तलवों तक मसाज करें. लगभग 15 से 20 मिनट तक आप मसाज कर सकती हैं, फिर उसके बाद हल्के गुनगुने पानी से बच्चे को नहलाने साफ कर दें.

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार बच्चे के नाक कान और नाभि में तेल डालने की सलाह दी जाती है, तो दोस्तों जैतून का तेल काफी तेज होता है, और पानी मिलाकर तेल नहीं डालना चाहिए. तो इसलिए आप जैतून के तेल का इस्तेमाल ना ही करें तो अच्छा है. तेल से संक्रमण होने का खतरा भी रहता है. मॉडर्न साइंस में इस बात को स्वीकार नहीं किया जाता है.

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कुछ सावधानियां

शोध में पाया गया है कि जैतून के तेल से मसाज करने से शिशु को एटॉपिक डर्मेटाइटिस (त्वचा पर लाल और खुजलीदार चकत्ते होना) हो सकता है। इसलिए, अगर आपके शिशु की त्वचा रूखी है, तो बिना डॉक्टर से परामर्श किये जैतून के तेल का उपयोग करने से बचें.

मसाज करते समय अपने नाजुक हाथों से ही मसाज करनी चाहिए वरना रैशेज और दाने होने का खतरा रहता है.

मसाज करते समय हाथों को बच्चे के शरीर पर नीचे से ऊपर की ओर ले जाएं। इसका उल्टा करने से बच्चे की त्वचा ढीली हो सकती हैं.

पीठ पर मसाज करते समय ज्यादा दबाव डालने से रीढ़ की हड्डी टूट सकती है.

पैरों पर मसाज करते समय हाथों को ऊपर से नीचे की ओर ले जाएं.

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