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गर्भपात ना हो इसके लिए प्राकृतिक और घरेलू उपाय

 हम चर्चा करने वाले हैं गर्भपात रोकने के इलाज को लेकर

गर्भपात रोकने के कौन-कौन से प्राकृतिक तरीके हैं
गर्भपात रोकने के कौन-कौन से घरेलू उपचार होते हैं
गर्भपात का निदान और इलाज

 

Natural and home remedies to prevent abortion

गर्भपात को रोकने के प्राकृतिक तरीके

अगर महिला को गर्भपात की समस्या नजर रही है तो अगली बार गर्भ धारण करने से पहले महिला को कुछ प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल अपने लाइफ स्टाइल में करना चाहिए, जिससे कि गर्भपात की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सके.

 इसके लिए महिला को डॉक्टर फोलिक एसिड खाने की सलाह देते हैं. आपकी सेहत अनुसार आपकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टर आपको 400 से 800mg  folic acid रोज देने की सलाह दे सकते हैं.  यह आपको गर्भ धारण करने से कुछ माह पूर्व से लेना शुरू करना होता है. साथ ही साथ डॉक्टर साहब को कुछ विटामिंस लेने की सलाह भी दे सकते हैं जो आपकी होने वाली प्रेगनेंसी को सपोर्ट करता है.

सिगरेट तंबाकू से दूरी:  किसी भी महिला को अगर वह गर्भ धारण करना चाह रही है, तो उसे सिगरेट तंबाकू और दूसरे प्रकार के नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए. यह गर्भ को नुकसान पहुंचाते हैं.

नियमित रूप से व्यायाम करें : महिला को अपनी शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोजाना सुबह या शाम के समय शेयर करना और व्यायाम करना अत्यधिक आवश्यक होता है.  यह किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा.

नियमित टीकाकरण: पुरानी बीमारियों के चलते गर्भपात की समस्या हो जाती है. इसलिए महिला को हर प्रकार का टीकाकरण कराना चाहिए. जिससे कि गर्भपात की समस्या का समाधान मिल सके.

घरेलू उपचार के तौर पर एक चम्मच आंवले के गोदी में शहद मिलाकर खाने से गर्भ अवस्था में होने वाली समस्याओं और गर्भपात के खतरे को टाला जा सकता है, और भी बहुत सारे उपाय जो कि घरेलू स्तर पर महिलाएं गर्भपात को रोकने के लिए करती हैं.

गर्भपात की स्थिति में डॉक्टर्स कुछ इस प्रकार के टेस्ट करते हैं, जिनसे इस बात का पता लगाया जा सकता है कि ऐसी स्थिति क्यों आई और भविष्य में इस प्रकार की समस्या से बचने में उस मदद मिले.

गर्भत कभी-कभी गरीब ग्रीवा के फैलने की वजह से भी हो जाता है तो उसकी जांच की जा सकती है.

डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करके भ्रूण के दिल की धड़कन को जांच कर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि उसमें किसी प्रकार की कोई समस्या तो नहीं थी.

बहुत सारे टेस्ट कैसे होते हैं जो ब्लड के माध्यम से किए जाते हैं, और उनमें आवश्यक हारमोंस का पता लगाया जाता है किसी प्रकार की अनियमितता जानने की कोशिश की जाती है.

अगर ग्रीवा से टिश्यू बाहर निकलने लगे हैं, तो डॉक्टर गर्भपात का पता लगाने के लिए इनकी जांच सकते हैं.

गर्भपात का कारण स्त्री और पुरुष दोनों के क्रोमोसोम में होने वाली अनियमितता भी हो सकती है, इसके लिए डॉक्टर पुरुष और स्त्री दोनों के क्रोमोसोम की जांच कर सकते हैं.

गर्भपात के बाद सावधानियां

गर्भपात के बाद महिला की देखभाल और अच्छी तरह करने की ज़रूरत होती है। महिला के शारीरिक रूप से पूरी तरह ठीक न होने पर और देखभाल करने की आवश्यकता होती है। यहां हम बता रहे हैं कि गर्भपात के बाद क्या-क्या सावधानियां बरतने की ज़रूरत होती है।

धूम्रपान और कैफीन का सेवन करें.

कच्चा मांस सॉफ्ट चीज़ खाने से बचें . खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें.

गर्भपात के बाद लगभग 3 माह के बाद ही दूसरे बच्चे की प्लानिंग करनी चाहिए.

अगर गर्भपात के बाद बुखार रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करें. बुखार को बिल्कुल भी अनदेखा करें, कभी-कभी पीठ दर्द की समस्या भी होती है क्योंकि यह गर्भपात के बाद इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है.

गर्भपात के बाद कम से कम 15 दिन तक मिलन करने से बचें.

गर्भपात के बाद डॉक्टर की सलाह से नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए और अपना वज़न नियंत्रित रखना चाहिए.

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