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प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग होना | Mood swings during pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग की समस्या को लेकर चर्चा करने जा रहे हैं.

महिला के शरीर में हार्मोन परिवर्तन के कारण काफी सारे चेंजेज नजर आते हैं. ऐसे ही कुछ चेंजेज महिला के बिहेवियर में भी नजर आते हैं. उनमें से ही एक परिवर्तन मूड स्विंग की समस्या है.

आइए दोस्तों मूड स्विंग की समस्या पर थोड़ा डिटेल में चर्चा कर लेते हैं. जिससे आप इसे काफी अच्छी तरह से समझ पाए और इसके द्वारा होने वाली समस्याओं से अपने आप को बचा पाए.

 आज हम चर्चा करेंगे कि ----


यह मूड स्विंग होता क्या है.
गर्भावस्था में मूड स्विंग कब होता है.
और यह मूड स्विंग की समस्या प्रेगनेंसी में ही क्यों होती है.
कैसे पता करें आपको मूड स्विंग है, इसके लक्षण.
मूड स्विंग के कैसे बचा जाए.
मूड स्विंग का क्या इलाज है.
प्रेगनेंसी में मूड स्विंग को नियंत्रित करने के लिए कौन से योगा करने चाहिए.
मूड स्विंग को नियंत्रित करने के लिए हमें क्या खाना चाहिए.
किस स्थिति में हम डॉक्टर के पास जाएं .

इन सब बातों पर अपने इस वीडियो के माध्यम से हम चर्चा करने वाले हैं ---

 

Mood swings during pregnancy | प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग होना

यह मूड स्विंग होता क्या है

साधारण भाषा में मूड स्विंग क्या होता है. इस पर बात करें तो मन की स्थिति में तुरंत बदलाव मूड स्विंग कहलाता है. जैसे कि --

  • आप अभी काफी खुश नजर आ रहे हैं.

  • आप एकदम से उदास हो जाते हैं.

  • आपको घबराहट होने लगती है.

  • कभी भी गुस्से में आ सकते हैं.

  • आप इमोशनल हो सकते हैं.

यह सब मूड स्विंग कि समस्या कहलाती है.

यह सारी भावनाएं अधिकतर बच्चे की सुरक्षा को लेकर, और अपनी लाइफ स्टाइल बदल जाने की वजह से भी हो जाती है. यह समस्या अधिक जिम्मेदारी आ जाने पर भी प्रेगनेंसी के दौरान नजर आती है.

 गर्भावस्था में मूड स्विंग कब होता है

मूड स्विंग की समस्या अधिकतर महिलाओं के अंदर विभिन्न प्रकार के हारमोंस में आए बदलावों के कारण होती है. और यह गर्भावस्था के दौरान ही अधिकतर देखने में आती है. गर्भावस्था के दौरान पहली तिमाही के दौरान यह समस्या काफी ज्यादा अनुभव होती है.

यह मूड स्विंग की समस्या प्रेगनेंसी में ही क्यों होती है

मूड स्विंग की समस्या पूर्ण रूप से हमारी भावनाओं पर हमारा नियंत्रण कम हो जाना ही कहलाता है.
इसके कुछ कारण मुख्यतः नजर आते हैं जैसे कि –

शरीर के मेटाबॉलिज्म में बदलाव होना

अक्सर महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान तनाव हो सकता है. यह तनाव कई कारणों से हो सकता है. 

  • बच्चे की सुरक्षा को लेकर तनाव हो सकता है .

  • महिला की लाइफ स्टाइल अचानक से रुक जाती है. इस कारण से भी तनाव की स्थिति बन सकती है.

  • बहुत से फैमिली मैटर भी होते हैं, जिनकी वजह से तनाव हो सकता है .

  • अक्सर महिला प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे की सुरक्षा को लेकर परिवार की स्थिति को लेकर काफी ज्यादा चिंता करने लगती है, कि वह यह जिम्मेदारी कैसे उठाएगी. इस स्थिति में भी मूड स्विंग की समस्या नजर आती है.

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन  हारमोंस में जो बदलाव होता है. उसकी वजह से भी मूड स्विंग की समस्या नजर आती है.

  •  जैसा कि हमने बताया बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति अत्यधिक सजगता भी मूड स्विंग की समस्या को पैदा करती है.

  • कभी कभी थकान हो जाने के कारण भी मूड स्विंग नजर आता है.


मूड स्विंग के लक्षण

आपको कैसे पता चलेगा कि महिला मूड स्विंग का शिकार है इसके लिए कुछ लक्षण है अगर वह दिखाई पड़ते हैं तो आप इस बात को समझ सकते हैं कि गर्भस्थ महिला मूड स्विंग की समस्या से परेशान हैं .

  • अगर महिला किसी भी बात की जिद पकड़ लेती है चाहे वह जायज है या नाजायज हो यह मूड स्विंग को दिखाता है .

  • महिला को किसी वजह से या बिना वजह जल्दी जल्दी गुस्सा आता है. यह भी मूड स्विंग की समस्या है.

  • कभी-कभी महिला अपेक्षाकृत अजीब सा व्यवहार करने लगती है, जो उसके Nature में है ही नहीं ऐसा व्यवहार तो यह मूड स्विंग की वजह से हो सकता है .

  • अगर महिला किसी भी चीज पर अक्सर कड़ी प्रतिक्रिया देती है, तो यह मूड स्विंग की वजह से हो सकता है.


 प्रेगनेंसी में मूड स्विंग का इलाज

मूड स्विंग एक मनोवृत्ति है सबसे पहले तो इसके लिए परिवार वालों को महिला की इस स्थिति को समझना चाहिए. यह स्थाई स्थिति नहीं है, कुछ समय के बाद यह स्थिति समाप्त हो जाएगी. मूड स्विंग में राहत पाने के लिए कुछ चीजों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि—

  • महिला को मूड सिंह से बचने के लिए प्राणायाम और योगा का सहारा लेना चाहिए. इसके लिए वह किसी प्रशिक्षित योगाचार्य से दिशा निर्देशन ले सकती है.

  • माना जाता है, कि मसाज भी मूड स्विंग की समस्या को दूर करने के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है. वैज्ञानिकों के एक अध्ययन के अनुसार मसाज चिंता को दूर करने के लिए और अच्छी नींद के लिए कारगर होती है. लेकिन यह आप किसी एक्सपर्ट की निगरानी में ही करवाएं तो ज्यादा अच्छा है.

  • अगर महिला की स्थिति काफी ज्यादा खराब हो जाती है, तो फिर दवाइयों का भी सहारा लिया जाता है.


हम आपको बता दें हर एक महिला को इस तरह की समस्या नहीं होती है. कुछ महिलाओं को मूड स्विंग बिल्कुल भी नहीं नजर आता.


गर्भावस्था में मूड स्विंग होने से कैसे बचें

प्रेगनेंसी के दौरान अगर मूड स्विंग की समस्या नजर आ रही है, तो कुछ ऐसी चीजें हैं. जिन पर अमल किया जाए तो यह समस्याएं काफी हद तक ठीक हो सकती हैं.

  • सबसे पहले तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना चाहिए.

  • महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए.

  • गर्भावस्था के दौरान महिला को अल्कोहल और धूम्रपान से बिल्कुल परहेज करना चाहिए.

  • जिस भी प्रकार की समस्या उस वक्त होती है, उन्हें अपने परिवार वालों और दोस्तों से भी शेयर करना चाहिए.

  • सुबह शाम जब भी आपको समय मिलता है. सावधानीपूर्वक टहलना चाहिए.

  • आपको अपने पार्टनर के साथ बात करनी चाहिए, समय बिताना चाहिए.


मूड स्विंग की समस्या में कैसा भोजन खाएं

  • कुछ भोजन इस प्रकार के होते हैं जो कि मूड स्विंग की समस्या में काफी फायदा करते हैं. आप मूड स्विंग को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न प्रकार की सब्जियां, बीज, नट्स, साबुत अनाज, फलिया इत्यादि अपने आहार में शामिल कर सकती हैं.

  • मछली को अपने भोजन में शामिल करने से चिंता और अवसाद की समस्या में काफी राहत मिलती है. मूड स्विंग नियंत्रित रहता है.

  • दही के अंदर अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो कि शरीर की पाचन क्रिया को सही करते हैं, और अच्छे व्यक्ति रिया मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं.

  • हरी सब्जी और ताजे फल में पाए जाने वाले पोषक तत्व मस्तिष्क को ताकत देने का कार्य करते हैं.

  • चावल व ओट्स जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पेट के लिए अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा दे सकते हैं.

  • मूड स्विंग की समस्या दो से तीन हफ्तों में अपने आप समाप्त होने लगती है. अगर यह समस्या समाप्त नहीं हो रही है. लगातार बनी हुई है, या बढ़ती जा रही है, तो आपको डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता होती है.

  • विभिन्न प्रकार के योगा मस्तिष्क की ताकत को बनाए रखने के लिए मददगार होते हैं. मूड स्विंग की समस्या में काफी राहत प्रदान करते हैं. इस प्रकार के योगा आपको किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही करने चाहिए. कुछ योगा है जैसे कि प्राणायाम, ताड़ासन, कटिचक्रासन, भद्रासन यह सभी के सभी मूड स्विंग की समस्या में राहत प्रदान करते हैं, मगर एक बात वही किसी इंस्ट्रक्टर की देखरेख में ही यह सब करने चाहिए खासकर प्रेग्नेंसी के समय. 

 


 

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